Gold Bond का जादू, ₹3788 के निवेश पर अब मिल रहा ₹15009, RBI ने ऐसे निकाला भाव

SGB 2019-20 Series V Pre-Redemption: 2019-20 सीरीज V के गोल्ड बॉन्ड निवेशकों को प्री-रिडेम्पशन पर निवेशकों की पूंजी करीब चार गुना बढ़ी हुई आ रही है। आरबीआई ने एक यूनिट का भाव ₹15009 फिक्स किया है। जानिए आरबीआई ने यह भाव कैसे निकाला और प्री-रिडेम्प्शन का मतलब क्या है

अपडेटेड Apr 15, 2026 पर 10:40 AM
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RBI ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) 2019-20 सीरीज V के लिए रिडेम्प्शन प्राइस प्रति यूनिट ₹15009 पर फिक्स किया है।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) 2019-20 सीरीज V के निवेशकों को आज प्री-मेच्योर हो रहे रिडेम्प्शन पर प्रति यूनिट करीब ₹11,221 का मुनाफा मिलने वाला है। यह मुनाफा ₹15,009 के तय रिडेम्प्शन प्राइस पर आधारित है। गोल्ड बॉन्ड की यह किश्त 15 अक्टूबर, 2019 को जारी की गई थी। इसका भाव प्रति यूनिट ₹3788 थी। इसका मतलब हुआ कि इस सीरीज के तहत निवेशकों का पैसा करीब 296% बढ़ा है यानी कि लगभह चार गुना। हालांकि फायदा सिर्फ यही नहीं है बल्कि सोवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम के तहत निवेशकों को अलर से सालाना 2.5% का ब्याज भी मिल रहा है।

कैसे तय हुआ रिडेम्प्शन प्राइस?

केंद्रीय बैंक आरबीआई ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) 2019-20 सीरीज V के लिए रिडेम्प्शन प्राइस प्रति यूनिट ₹15009 पर फिक्स किया है। यह भाव पिछले तीन कारोबारी दिनों में यानी 9 अप्रैल, 10 अप्रैल और 13 अप्रैल को 999 शुद्धता वाले यानी 24 कैरेट गोल्ड के क्लोजिंग प्राइस का साधारण औसत है। हर दिन के भाव IBJA (इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन) से लिए जाते हैं।


प्रीमेच्योर रिडेंप्शन का क्या है मतलब?

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम के तहत निवेशक यूनिट जारी होने के पांच साल पूरा होने के बाद ब्याज पेमेंट होने वाले डेट पर प्रीमेच्योर रिडेम्प्शन कर सकते हैं यानी कि मेच्योरिटी से पहले भी पैसे निकाल सकते हैं। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का मेच्योरिटी पीरियड 8 वर्ष है। ध्यान देने वाली बात ये है कि प्रीमेच्योर रिडेम्प्शन का विकल्प तो है लेकिन फिर मुनाफा टैक्सफ्री नहीं रह जाता है। वैसे एक और अहम बात ये भी है कि 1 अप्रैल से टैक्स से जुड़े नियमों में कुछ बदलाव भी हुआ है जिससे मेच्योरिटी तक होल्ड करने के बावजूद मुनाफे पर टैक्स देना पड़ सकता है। अब सिर्फ उन्हीं निवेशकों को सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को मेच्योरिटी तक गोल्ड बॉन्ड होने करने पर टैक्स नहीं देना होगा, जिन्होंने इसे प्राइमरी इश्यू यानी जब RBI ने जारी किया था, तब लिया था। जो निवेशक इसे सेकेंडरी मार्केट से ले रहे हैं, उन्हें अब मेच्योरिटी पर टैक्स फ्री का फायदा नहीं मिलेगा।

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