देश के टॉप ब्रोकिंग फर्म ग्रो (Groww) ने ऐसे समय में अपने कॉम्पटीटर्स को पछाड़ दिया. जब स्टॉक मार्केट में धड़ाधड़ बिकवाली चल रही थी। पिछले महीने अक्टूबर में मार्केट में 2020 में कोरोना महामारी के बाद से सबसे बड़ी गिरावट दिखी थी। एनएसई पर मौजूद आंकड़ों के मुताबिक बिकवाली के इस माहौल में भी ग्रो ने 3.5 लाख यूजर्स जोड़े और इसके एक्टिव ट्रेडर्स की संख्या 1.25 करोड़ के पार पहुंच गई। इसकी नजदीकी प्रतिद्वंद्वी जीरोधा के करीब 80 लाख इनवेस्टर्स हैं यानी कि ग्रो और जीरोधा के बीच 45 लाख एक्टिव ट्रेडर्स का फर्क है। ग्रो ने पिछले साल जीरोधा को पछाड़कर सबसे बड़ी ब्रोकरेज फर्म का तमगा हासिल किया था और उस समय दोनों के ही 64-64 लाख यूजर्स थे। अक्टूबर में भारतीय स्टॉक मार्केट में 6 फीसदी की गिरावट आई जो मार्च 2020 के बाद किसी महीने में सबसे बडी गिरावट है। हालांकि इस गिरावट से नए निवेशकों का मूड नहीं खराब हुआ और वे स्टॉक मार्केट में जुड़ते रहे।
एक साल में ग्रो के यूजर्स लगभग डबल हुए हैं जबकि इस दौरान जीरोधा के महज 15 लाख यूजर्स बढ़े यानी कि हर महीने महज 1.25 लाख यूजर्स जबकि ग्रो से हर महीने करीब 5 लाख यूजर्स जुड़े। ग्रो और जीरोधा के बाद सबसे अधिक यूजर्स एंजेल वन (Angel One) ने जोड़े। एक साल में इससे 25 लाख यूजर्स जुड़े यानी 2.5 लाख यूजर्स हर महीने। अब जीरोधा से एंजेल वन सिर्फ 5 लाख यूजर्स ही पीछे है। एनएसई के मुताबिक एक्टिव इनवेस्टर्स ऐसे निवेशकों को कहते हैं जिन्होंने एक साल में कम से कम एक ट्रांजैक्शन किया हो। देश में इस समय 16 करोड़ से अधिक डीमैट खाते हैं लेकिन एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक एक्टिव इनवेस्टर्स की संख्या करीब 5 करोड़ है।
चौथे स्थान पर अपस्टॉक्स है जिसके यूजर्स अक्टूबर में सालाना आधार पर 21.5 लाख से बढ़कर 28.5 लाख पर पहुंच गए। धन की बात करें तो यह 50 हजार से अधिक इनवेस्टर्स जोड़े और टॉप के 3 ब्रोकरेज के बाद सबसे अधिक रहा। धन ने हाल ही में पेटीएम मनी को ब्रोकर्स की टॉप-10 लिस्ट से बाहर कर दिया था।
रेवेन्यू के मामले में अब भी Groww से आगे Zerodha
नए यूजर्स जोड़ने के मामले में ग्रो ने जरूर जीरोधा को पछाड़ दिया है और एक्टिव ट्रेडर्स के मामले में भी यह सबसे आगे है लेकिन रेवेन्यू के मामले में जीरोधा अभी भी सबसे आगे है। वित्त वर्ष 2024 में इसे 8320 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल हुआ था जबकि ग्रो को 2900 करोड़ रुपये का ही रेवेन्यू हासिल हुआ था। हालांकि ब्रोकिंग फर्मों के लिए आगे का रास्ता आसान नहीं दिख रहा है। ट्रेडिंग पर हायर टैक्स, एक्सचेंज से कब रीबेट और रिटेल F&O ट्रेडिंग पर लगाम कसने की आशंका से इन्हें झटका सकता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक वित्त वर्ष 2025 की दूसरी छमाही में अधिकतर ब्रोकिंग फर्मों का रेवेन्यू 30-35 फीसदी तक गिर सकता है।