जीवीके पावर एंड इंफ्रा (GVK Power and Infra) के शेयर पिछले कारोबारी दिन यानी मंगलवार 16 जुलाई को लोअर सर्किट पर बंद हुए थे। निवेशक इसे फटाफट बेचकर निकलना चाहते हैं लेकिन लोअर सर्किट की वजह से कोई खरीदार ही नहीं है। इसके शेयरों में बिकवाली की वजह है कि अब इसे दिवालिया प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा। कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी कोर्ट ने लेंडर्स का लोन नहीं चुकाने के चलते यह फैसला सुनाया है। इस मामले में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की हैदराबाद बेंच ने यह फैसला सुनाया। यह फैसला ICICI बैंक की अगुवाई में लेंडर्स की याचिका पर आया है। कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में इस कार्रवाई की जानकारी दी है। इसके शेयर एनएसई पर 9.63 रुपये के लोअर सर्किट पर मंगलवार को बंद हुए।
NCLT ने 12 जुलाई को दिया आदेश
एनसीएलटी ने जीवीके पावर एंड इंफ्रा के मामले में 12 जुलाई यानी शुक्रवार को फैसला सुनाया था लेकिन यह सार्वजनिक सोमवार को ही हुआ। इस मामले में याचिका ICICI बैंक ने वर्ष 2022 में दायर की थी। एनसीएलटी ने सतीश कुमार गुप्ता को अंतरिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल नियुक्त कर दिया है जो इनसॉल्वेंसी के दौरान कंपनी का काम-काज देखेंगे। आईसीआईसीआई बैंक की तरफ से पेश वकील के विवेक रेड्डी ने दिवालिया कार्यवाही के लिए पिछले साल अक्टूबर के लंदन अदालत के फैसले का हवाला दिया। उन्होंने दलील दी कि जब पहली बार फरवरी 2017 में किश्त चुकाने से कंपनी चूकी थी और यह मामला सुलझा नहीं तो जीवीके पावर एंड इंफ्रा पर इसकी जिम्मेदारी आ जाती है। लंदन कोर्ट ने भी इस बात को माना और कहा कि अगर जीवीके पैसे नहीं भरती है तो बैंकरप्सी जरूरी है।
क्या है GVK Power and Infra से जुड़ा पूरा मामला
जिस लोन को लेकर जीवीके पावर एंड इंफ्रा के खिलाफ यह कार्रवाई हो रही है, वह जीवीके कोल डेवलपर्स (सिंगापुर) ने करीब एक दशक पहले लिया था और इसकी गारंटर जीवीके पावर एंड इंफ्रा थी। सितंबर 2011 में ICICI बैंक की दुबई, बहरीन और सिंगापुर ब्रांच; बैंक ऑफ बड़ौदा की रस अल खैमाह ब्रांच; बैंक ऑफ इंडिया की लंदन और सिंगापुर; केनरा बैंक की लंदन ब्रांच ने 8356 करोड़ रुपये का टर्म लोन फैसिलिटी और 292 करोड़ रुपये के लेटर ऑफ क्रेडिट जारी किया था। जीवीके कोल को यह लोन ऑस्ट्रेलिया में कोल माइन खरीदने के लिए मिला था। इसके अलावा मार्च 2014 में कुछ और बैंकों ने इसे 367 करोड़ रुपये का अतिरिक्त टर्म लोन दिया जो बाद में बढ़कर 2089 करोड़ रुपये कर दिया गया।
मार्च 2016 में आईसीआईसीआई बैंक ने पाया कि जीवीके ग्रुप बिना लेंडर्स की सहमति के बंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट में अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचना चाहती है जो लोन के लिए की गई शर्तों का उल्लंघन है। बैंकों ने अप्रैल 2016 में लंदन की एक अदालत में याचिका दायर की, जहां जीवीके ने बेंगलुरु हवाई अड्डे में अपनी हिस्सेदारी नहीं बेचने का वादा किया। फिर लोन की लगातार कई किश्तें के पेमेंट से चूकने पर बैंकों ने लंदन कोर्ट में फैसिलिटी एग्रीमेंट-1 के तहत 5915 करोड़ रुपये और फैसिलिटी-एग्रीमेंट-2 के चहत 1236 करोड़ रुपये के दावे के लिए याचिका दायर किया।
नवंबर 2020 में, ICICI बैंक ने अपनी कॉर्पोरेट गारंटी का इस्तेमाल करते हुए जीवीके पावर एंड इंफ्रा से मूलधन और ब्याज के लिए 5,000 करोड़ रुपये की मांग की। कंपनी ने अपनी असमर्थता जता दी। हालांकि कंपनी ने यह भी कहा कि अदाणी ग्रुप के साथ समाधान को लेकर बातचीत चल रही है और ऐसे में उसने बैंक से कोई भी कार्रवाई नहीं करने का आग्रह किया। हालांकि ICICI बैंक जीवीके पावर एंड इंफ्रा के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने के लिए 2022 में एनसीएलटी पहुंच गया। 12 जुलाई को एनसीएलटी ने तय किया किया कि 13 जून 2022 तक जीवीके पावर एंड इंफ्रा पर 15,576 करोड़ रुपये की देनदारी है, जिसमें मूलधन में 9,463 करोड़ रुपये, ब्याज के 6,113 करोड़ रुपये और एजेंसी शुल्क के 1.23 करोड़ रुपये शामिल हैं।