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कोरोना काल में 5 लाख रुपये में अच्छा निवेश पोर्टफोलियो बनाने के गुरुमंत्र

जानकारों की सलाह है कि 35 साल के आयुवर्ग के निवेशकों को मीडियम रिस्क पोर्टफोलियों पर फोकस करना चाहिए।

MoneyControl Newsअपडेटेड Jun 23, 2020 पर 7:38 AM
कोरोना काल  में 5 लाख रुपये में अच्छा निवेश पोर्टफोलियो बनाने के गुरुमंत्र

परंपरागत रुप से अधिकांश लोग सोना, रियल एस्टेट और बैंकों के एफडीआई में निवेश करते हैं लेकिन बढ़ती वित्तीय जागरुकता के साथ अब ज्यादा से ज्यादा लोग इक्विटी, बॉन्ड और म्यूचुअल फंडों को निवेश विकल्प के रूप में चुनने लगे हैं।

इक्विटी मार्केट की तरफ बढ़ते रुझान का एक बड़ा कारण वेल्थ क्रिएट करना है लेकिन निवेशकों को निवेश करते वक्त इस चीज पर भी फोकस करना चाहिए कि स्थितियां खराब होने पर उनकी पूंजी की सुरक्षा कैसे हो सकती है।

COVID-19 महामारी संकट काल जैसी स्थितियों में पोर्टफोलियों का डाईवर्सिफिकेशन पूंजी सुरक्षा के लिए काफी अहम हो जाता है। इक्विटी मार्केट के उतार-चढ़ाव से होने वाले नुकसान से बचने के लिए हमें अपने पैसे का कुछ हिस्सा फिक्स इनकम इस्ट्रूमेंट्स में डालना चाहिए।

हालांकि हमें इक्विटी मार्केट से ज्यादा से ज्यादा वेल्थ क्रिएशन के लिए जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी निवेश  शुरू करना चाहिए लेकिन हम यहां उन निवेशकों पर फोकस कर रहे हैं जो 30 से 35 साल के आयुवर्ग के है और जिनके पास निवेश करने के लिए 5 लाख रुपये हैं, तो आइए हम देखते हैं कि इस आयुवर्ग का कोई निवेशक 1 से ज्यादा निवेश प्रोडक्ट के साथ 5 लाख रुपये में कैसे एक बेहतर पोर्टफोलियों बना सकता है।

जानकारों का कहना है कि फाइनेंशियल मार्केट में किसी प्रोडक्ट में पैसे लगाने के पहले किसी निवेशक को अपने जोखिम उठाने की क्षमता की जांच कर लेनी चाहिए। इस जांच में कई प्रश्न शामिल होते हैं जैसे आपकी सालाना कमाई कितनी है, आपके परिवार में आपके ऊपर कितने लोग निर्भर हैं और आपका निवेश लक्ष्य क्या है?

किसी 35 साल के निवेशक को ध्यान में रखते हुए टाटा कैपिटल के हेड ऑफ वेल्थ मैनजमेंट सौरभ बसू (Saurav Basu) की राय है कि ऐसे निवेशक को मीडियम रिस्क पोर्टफोलियो पर फोकस करना चाहिए जहां उसको अपनी लगभग 40 फीसदी पूंजी फिक्सड इनकम देनी वाली सिक्योरिटीज जैसे लंबी अवधि वाले डेट म्यूचुअल फंड में लगाने चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि इस तरह के निवेशकों को अपने शॉर्ट और लॉन्ग  टर्म गोल का कड़ाई से प्लान करना चाहिए। इसके साथ ही उसको एक अच्छी इंश्योरेंस पॉलिसी भी लेनी चाहिए।

30 साल के निवेशक को ध्यान में रखते हुए बसू का आगे कहना है कि इस उम्र का निवेशक अभी युवा होता है और उसके पास कमाने के लिए कुछ अतिरिक्त साल होते हैं तो वह इक्विटी बाजार में अपना निवेश कुछ बढ़ा सकता है। इस तरह के निवेशकों को अपनी पूंजी का कुछ हिस्सा उच्च जोखिम वाली सिक्योरिटीज में निवेश करना चाहिए जिनमें ज्यादा मुनाफा होने की संभावनाएं हैं।

उन्होंने  आगे कहा कि इस तरह के निवेश के पहले हमें अपने निवेश निर्णय की अच्छी तरह से जांच परख करनी चाहिए। उन्होंने  आगे कहा कि इस आयुवर्ग के निवेशकों को अपने फंड का लगभग 20-30 फीसदी हिस्सा डेट प्रोडक्ट्स में और 50-60 फीसदी हिस्सा इक्विटी में चरणगत तरीके से निवेश करना चाहिए और बचे हुए हिस्से को किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए नकदी के तौर पर या फिर बैंकों में फिक्सड डिपॉजिट के तौर पर रखना चाहिए।

सामान्य तौर पर 30-35 साल के निवेशक आक्रमक निवेशक होते हैं क्योंकि उनके रिटायरमेंट में अभी लंबा समय होता है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए आशिका वेल्थ एडवाइजर के अमित जैन का कहना है कि इस आयु वर्ग के निवेशकों को वर्तमान बाजार परिस्थितियों में नए थीम्स और आकर्षक वैल्यूएशन का फायदा उठाने के लिए अपने फंड का 70 फीसदी हिस्सा इक्विटी में लगाना चाहिए।

अमित जैन ने आगे कहा कि इस आयु वर्ग का निवेशक अपने फंड का 5 फीसदी हिस्सा सोने में और 10 फीसदी हिस्सा Arbitrage फंड में लगा सकता है जिससे बाजार के उतार-चढ़ाव की स्थिति में सुरक्षा मिल सकती है, इसके बाद बचे हुए 15 फीसदी हिस्से को रेग्युलर इनकम के लिए बॉन्ड में निवेश करना चाहिए। लेकिन अगर इस आयुवर्ग का कोई निवेशक बहुत ज्यादा जोखिम उठाने का पक्षधर नहीं है तो अमित जैन की सलाह है कि उसको अपने फंड का सिर्फ 15 फीसदी हिस्सा इक्विटी में,  30 फीसदी हिस्सा Arbitrage फंड में और 25 फीसदी हिस्सा ईएसएस फंड में लगाना चाहिए।

ईएसएस फंड में होने वाले  निवेश का 33 फीसदी इक्विटी में, 33 फीसदी डेट में और 33 फीसदी arbitrage फंड में निवेश होना चाहिए। अब कुल फंड में से बचे 35 फीसदी हिस्से का निवेश AAA रेटेड बॉन्डों अथवा सावेरेन बॉन्डों अथवा पीएसयू बॉन्ड़ों में होना चाहिए। जहां एवरेज यील्ड टू-मैच्योरिटी 5 फीसदी होती है। अभी भी आपके हाथ में कुल फंड का 5 फीसदी हिस्सा बचा हुआ है जिसको सोने में निवेश किया जाना चाहिए।

(डिस्क्लेमरः  Moneycontrol.com पर दिए जाने वाले विचार और निवेश सलाह निवेश विशेषज्ञों के अपने निजी विचार और राय होते हैं। Moneycontrol यूजर्स को सलाह देता है कि वह कोई निवेश निर्णय लेने के पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें। )

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