हिताची एनर्जी इंडिया, सीजी पावर और जीई वर्नोवा एएंडडी के शेयरों में 3 जुलाई को बड़ी गिरावट आई। इसकी वजह सरकार का एक फैसला है। केंद्र ने भारत में प्लांट वाली चीन की चार पावर इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनियों को पावर प्रोजेक्ट्स के लिए बोली लगाने की इजाजत दे दी है। फाइनेंस मिनिस्ट्री की तरफ से 24 जून को इश्यू ऑर्डर में इन कंपनियों के नाम शामिल हैं।
सरकार के एक आदेश से शेयरों में आई गिरावट
सरकार के आदेश के बाद TBEA Energy, Nanjing Electric India, New Northeast Electric India और Taikai Electric (India) अब भारत में पावर प्रोजेक्ट्स के सरकार के टेंडर में बोली लगा सकेंगी। पावर मिनिस्ट्री ने उन चाइनीज कंपनियों को पावर प्रोजेक्ट्स के लिए बोली लगाने की इजाजत देने की सिफारिश की थी, जिनके भारत में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स हैं। रायटर्स ने जनवरी में बताया था कि चीन से सीमा के मसलों को लेकर तनाव घटने के बाद भारत में सरकार चाइनजी कंपनियों को पावर प्रोजेक्ट्स के लिए बोली लगाने की इजाजत देने पर विचार कर रही है।
12 बजे Hitachi Energy India का शेयर 9.58 फीसदी गिरकर 30,535 रुपये पर चल रहा था। CG Power का शेयर 6.69 फीसदी फिसलकर 895.75 रुपये पर चल रहा था। GE Vernova का शेयर 1.87 फीसदी की कमजोरी के साथ 1,13.11 रुपये पर चल रहा था। Thermax और BHEL के शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली। BHEL का शेयर 3.68 फीसदी गिरकर 387.15 रुपये पर था। Thermax का शेयर 4.82 फीसदी की कमजोरी के साथ 4,677 पर चल रहा था। जीई पावर और टीडी पावर में भी कमजोरी दिखी।
भारतीय कंपनियों के लिए बढ़ जाएगी प्रतिस्पर्धा
चीन की पावर इक्विपमेंट कंपनियों को भारत में प्रोजेक्ट्स के लिए बोली लगाने की इजाजत से भारतीय ग्रिड इक्विपमेंट कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ जाएगी। TBEA Energy के पास हाई वोल्टेज ट्रांसफॉर्म्स बनाने के लिए अलग इकाई है। Nanjing Electric हाई-वोल्टेज डायरेक्ट करेंट प्रोजेक्ट्स के लिए छोटे जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम्स बनाती है। Taikai Electric की 400/765 किलोवॉच जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम्स के लिए एक शेल फैक्ट्री है।
2020 में चीन की सीमा पर झड़प के बाद नियमों में सख्ती
चीन के साथ सीमा पर 2020 में झड़प के बाद भारत ने चाइनीज कंपनियों के लिए नियम सख्त कर दिए थे। किसी सरकारी प्रोजेक्ट में बोली लगाने के लिए चीन की कंपनियों का सरकार के पैनल के पास रजिस्टर्ड होना जरूरी कर दिया गया था। इन कंपनियों को बोली लगाने से पहले पॉलिटिकल और सिक्योरिटी क्लियरेंस भी लेना जरूरी है। 24 जून को फाइनेंस मिनिस्ट्री की तरफ से इश्यू ऑर्डर में कहा गया है कि चीन की कंपनियों को यह छूट दो साल के लिए होगी। यह भी कहा गया है कि इसे दूसरी कंपनियों के लिए नजीर नहीं माना जाएगा।