FY23 के बजट में सरकार ने वित्तीय अनुशासन और ग्रोथ के बीच संतुलन साधने की पूरी कोशिश की है। सरकार की बड़े कर्ज लेने की तैयारी से जुड़ी चिंताओं के बीच बॉन्ड यील्ड में बढ़त देखने को मिली है। Jefferies ने अपने एक रिपोर्ट में कहा है कि बढ़ती बॉन्ड यील्ड इक्विटी मार्केट के लिए नेगेटिव है। खासकर NBFC शेयरों को इससे झटका लग सकता है। वहीं कैपिटल गुड्स, सीमेंट और पाइप कंपनियों को बजट एलानों से फायदा हो सकता है।
Jefferies ने बजट के बाद इन शेयरों और सेक्टरों पर निवेश की राय दी है। आइए डालते है इनपर एक नजर
कैपेक्स/ इंफ्रा: कल आए बजट में सरकार ने पूंजी खर्च में सालाना आधार पर 15 फीसदी की बढ़ोतरी का एलान किया है। बजट का यह एलान L&T सहित इस सेक्टर से जुड़ी दूसरी कंपनियों के लिए पॉजिटीव है। इसके साथ ही डेटा सेंटरों को इंफ्रास्ट्रक्चर स्टेटस देने की बात कही गई है जिससे इनको टैक्स हॉलिडे मिल सकता है। बजट के इन एलानों से Siemens, ABB जैसे कंपनियों को भी फायदा होगा। इसके अलावा कल आए बजट में डिफेंस पर होने वाले खर्च में सालाना आधार पर 10 फीसदी की बढ़ोतरी का एलान किया गया है। इस एलान से Bharat Electronics और L&T को फायदा होगा।
ITC (पॉजिटीव ): कल आए यूनियन बजट में तंबाकू और सिगरेट पर कोई भी टैक्स नहीं लगाया गया है । इसके अलावा जीएसटी टैक्स कलेक्शन में भी जनवरी में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है। यह खबर इस स्टॉक के लिए पॉजिटीव है।
Titan (पॉजिटीव ): कट और पॉलिश्ड डायमंड पर कस्टम ड्यूटी में कटौती का भी एलान किया गया है। अब यह ड्यूटी 7.5 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दी गई है। यह खबर टाइटन के लिए पॉजिटीव खबर है। इस खबर के चलते इस स्टॉक में कल जोरदार रैली देखने को मिली थी।
पाइप कंपनियां : पाइप के जरिए घरों तक शुद्ध जल पहुंचाने की योजना के आवंटन में 35 फीसदी की बढ़ोतरी के एलान से Supreme, Astral, और Finolex Industries को फायदा होगा।
RIL: सोलर सेल मैन्यूफैक्चरिंग के लिए पीएलआई स्कीम के विस्तार से रिलायंस को फायदा होगा।
Financials: कल आए बजट में फाइनेंशियल सेक्टर के लिए भी कई एलान किए गए है। इस सेक्टर के लिए ECLG scheme को मार्च 2023 तक विस्तार दे दिया गया है। यह एलान फाइनेंशियल सेक्टर के लिए हल्का पॉजिटीव है। इसके अलावा पूंजी खर्च में बढ़ोतरी के एलान से भी बैंकिंग सेक्टर के लिए अच्छे मौके बनेगे।
Jefferies ने अपने इस नोट में कहा है कि कल आए बजट के नेगेटिव पक्षों पर नजर डालें तो सरकार के उम्मीद से ज्यादा कर्ज लेने के प्रोग्राम और देश में विदेशी निवेश को आर्कषित करने के लिए कोई बड़ा एलान ना होना नेगेटिव फैक्टर है। इससे बॉन्ड यील्ड में और बढ़ोतरी हो सकती है जो पीएसयू बैंकों और कोटक बैंक के लिए ज्यादा नुकसानदेह होगा। इसके अलावा एनबीएफसी कंपनियों पर भी दबाव आएगा।