पिछले कुछ महीनों से कई कारणों से सीमेंट स्टॉक में भारी उतार-चढ़ाव आता रहा है। नवंबर के सुस्त प्रदर्शन के बाद दिसंबर में सीमेंट के मांग में जोरदार तेजी आई और यह तेजी जनवरी के अंत तक कायम रही। फरवरी में 5 राज्यों में चुनावों के कारण श्रमिकों की अनुपलब्धता के कारण भारत के एक बड़े हिस्से में कंस्ट्रक्शन की गतिविधियों में बाधा आई। इसके बाद मार्च में खासकर दूसरे पखवाड़े से सीमेंट सेक्टर मे फिर तेजी आती दिखी।
जेएम फाइनेंशियल की एक रिपोर्ट के मुताबिक चौथी तिमाही में पिछले साल के बड़े बेस की वजह से सीमेंट सेक्टर के ओवरऑल वॉल्यूम में 1 फीसदी की हल्की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसी तरह एक्सिस सिक्योरिटीज ने अपनी एक रिपोर्ट मे कहा है कि पिछले साल लीड भूमिका में रहने वाले ग्रामीण डिमांड में अभी रिकवरी देखने को नहीं मिली है जिसके कारण सीमेंट की मांग में तुलनात्मक रुप से मंदी कायम रही है। हालांकि चौथी तिमाही में शहरी और अर्धशहरी क्षेत्रों में कंस्ट्रक्शन गतिविधियों के बढ़ने के साथ मांग में कुछ तेजी आती नजर आ रही है।
बाजार जानकारों का कहना है कि वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही में सीमेंट की मांग में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। इस अवधि में सरकारी प्रोजेक्ट्स की गतिविधियों में तेजी के साथ ही सीमेंट की मांग बढ़ती नजर आएगी। इसके साथ ही रियल एस्टेट सेक्टर से आ रही मांग में मजबूती और अच्छी रबी फसल के बाद ग्रामीण क्षेत्रों की मांग में हो रही बढ़ोतरी सीमेंट सेक्टर के लिए शुभ संकेत है।
जेएम फाइनेंशियल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पेट कोक और कोयले की कीमतों में बढ़त का असर वित्त वर्ष 2023 के पहली तिमाही के कंपनियों के प्रदर्शन पर नजर आ सकता है। वित्त वर्ष 2022 की चौथी तिमाही में भी कंपनियों की लागत में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
मोतीलाल ओसवाल की एक रिपोर्ट के मुताबिक सीमेंट कंपनियों के एबिटडा में सालाना आधार पर 23 फीसदी की गिरावट देखने को मिल सकती है। सीमेंट कंपनियों की औसत ऑपरेटिंग मार्जिन सालाना आधार पर 6.5 फीसदी तक घट सकती है। इस विश्लेषण के आधार पर ब्रोकरेज हाउस Shree Cement, Orient Cement, JK Cement, UtraTech, ACC, Dalmia Bharat, Star Cement और Birla Corp पर बुलिश हैं।