एफएमसीजी कंपनी डाबर इंडिया (Dabur India) ने 5 मई को वित्त वर्ष 2021-22 की मार्च तिमाही के लिए अपने नतीजे जारी कर दिये हैं। वित्त वर्ष 2021-22 की चौथी तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 294 करोड़ रुपये रहा। बढ़ी हुई इनपुट लागत और तुर्की में कंपनी की शाखा की गुडविल बिगड़ने की वजह से मुनाफे में कमी देखने को मिली।
पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में कंपनी को 377.3 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड मुनाफा हुआ था।
पिछले एक साल में तुर्की मुद्रा में भारी अवमूल्यन के कारण तुर्की में डाबर की सहायक कंपनी होबी कोज़मेटिक (Hobi Kozmetic) की गुडविल खराब होने के कारण डाबर को तिमाही में 85 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था।
कंपनी ने अपनी बीएसई फाइलिंग में कहा "इस हानि की वजह से 2021-22 की चौथी तिमाही के लिए शुद्ध मुनाफा घटकर 294 करोड़ रुपये रहा। उच्च मुद्रा अवमूल्यन के बावजूद डाबर के तुर्की व्यवसाय ने तिमाही के दौरान स्थानीय मुद्रा में 47 प्रतिशत की वृद्धि के साथ एक मजबूत प्रदर्शन किया।"
डाबर ने कहा कि तिमाही के दौरान कंसोलिडेटेड आय स्थिर रही। कंपनी की वित्त वर्ष 2022 की चौथी तिमाही में आय पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही की तुलना में 7.7 प्रतिशत बढ़कर 2,518 करोड़ रुपये हो गई।
कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहित मल्होत्रा ने कहा, "तिमाही के दौरान इनपुट लागत में वृद्धि प्रमुख चुनौती थी। हमने मूल्य निर्धारण और लागत नियंत्रण उपायों पर ऐक्शन लेते हुए इस चुनौती का सामना किया।"
उन्होंने आगे कहा कि नये उत्पाद पेश करते रहना कंपनी की रणनीति की आधारशिला बना हुआ है। वहीं नए लॉन्च से आय में 5 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी होती है।
सालाना आधार पर Q4FY22 में ऑपरेटिंग EBITDA 2.5 प्रतिशत 453.6 करोड़ रुपये हो गया। इसे उच्च मूल्य निर्धारण द्वारा सपोर्ट मिला लेकिन इस पर इनपुट लागत का असर भी पड़ा है।
पूरे वर्ष के लिए आकंड़ों पर नजर डालें तो डाबर ने पिछले वर्ष की तुलना में 1,742.3 करोड़ रुपये के मुनाफे में 2.8 प्रतिशत की वृद्धि और 10,888.7 करोड़ रुपये की आय में 13.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।