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HDFC-HDFC Bank merger : डिपॉजिटर्स और बॉरोअर्स के लिए क्या हैं इसके मायने? जमा और कर्ज पर कैसे पड़ेगा असर

मर्जर पूरा होने में 12 से 18 महीने लग सकते हैं और उसके बाद डिपॉजिटर्स को HDFC Bank की जमा दरें ऑफर की जाएंगी

MoneyControl Newsअपडेटेड Apr 04, 2022 पर 5:45 PM
HDFC-HDFC Bank merger : डिपॉजिटर्स और बॉरोअर्स के लिए क्या हैं इसके मायने? जमा और कर्ज पर कैसे पड़ेगा असर
एचडीएफसी का एचडीएफसी बैंक में विलय पूरा होने में 12 से 18 महीने लग सकते हैं, जिससे स्पष्ट है कि तब तक तो स्थिति ऐसी ही बनी रहेगी

HDFC-HDFC Bank merger : एक आल-स्टॉक डील में एचडीएफसी बैंक में भारत की सबसे बड़ी हाउसिंग फाइनेंस कंपनी एचडीएफसी के मर्जर के साथ 12.8 लाख करोड़ रुपये की मार्केट वैल्यू वाली कंपनी बनने के लिए तैयार है।

HDFC और HDFC Bank के शीर्ष प्रबंधन के साथ ही इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह मर्जर दोनों ही कंपनियों, स्टेकहोल्डर्स, कस्टमर्स और साथ ही इकोनॉमी के लिए अच्छी खबर है। हालांकि, एचडीएफसी के डिपॉजिटर्स और बॉरोअर्स को अपने दीर्घकालिक कांट्रैक्ट्स को लेकर कुछ आशंकाएं हैं।

कस्टमर्स के हित

विलय पूरा होने में 12 से 18 महीने लग सकते हैं, जिससे स्पष्ट है कि तब तक तो स्थिति ऐसी ही बनी रहेगी। इस प्रस्ताव को अभी रेगुलेटर्स की मंजूरी की जरूरत है। इसमें RBI, सेबी (SEBI), इरडा (IRDAI), पीएफआरडीए (PFRDA) और सीसीआई (CCI) शामिल हैं। प्रबंधन ने संकेत दिए हैं कि मर्जर वित्त वर्ष 24 की तीसरी या चौथी तिमाही में प्रभावी हो सकता है।

एचडीएफसी बैंक के एमडी और सीईओ शशिधर जगदीशन ने मनीकंट्रोल को बताया, “एचडीएफसी और एचडीएफसी बैंक के डिपॉजिटर्स को अभी जो ब्याज मिल रहा है, वह मिलता रहेगा। मर्जर के बाद बैंक की दरों में सामंजस्य कायम किया जाएगा।”

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