Stock Market की 4 दिन की गिरावट में इनवेस्टर्स के डूबे 8 लाख करोड़, इन 4 वजहों से टूट रहा बाजार

अमेरिकी बाजारों में 5 दिन से जारी गिरावट का असर भारतीय बाजार पर दिख रहा है। भारतीय बाजारों में पिछले 4 दिन से गिरावट दिख रही है

अपडेटेड Jan 21, 2022 पर 12:55 PM
अमेरिकी बाजारों में गिरावट का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिख रहा है

Investors wealth : लगातार चार ट्रेडिंग सेशंस में बेंचमार्क इक्विटी इंडेक्स में लगभग 4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, जिसके चलते इक्विटी इनवेस्टर्स की वैल्थ में 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कमी दर्ज की गई है। दोपहर लगभग 12 बजे सेंसेक्स 377 अंकों की गिरावट के साथ 59,086 पर और निफ्टी50 118 अंक गिरकर 17,635 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी मिडकैप, स्माल कैप सहित सभी इंडेक्स में गिरावट बनी हुई थी।

जिओजित फाइनेंसियल सर्विसेज के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट वीके विजयकुमार ने एक नोट में कहा, “नैस्डैक के टेक हैवीवेट्स में गिरावट के साथ अमेरिकी बाजारों में लगातार पांचवें दिन कमजोरी बनी हुई है। इसका असर भारत के टेक सेक्टर पर भी दिख रहा है, जिनमें भारी कमजोरी बनी हुई है।”

आइए इस मौजूदा गिरावट के पीछे की वजहों पर नजर डालते हैं।


1. ग्लोबल मार्केट

अमेरिकी बाजारों में गिरावट का असर भारतीय बाजार पर दिख रहा है, जहां लगातार पांचवें दिन गुरुवार को कमजोरी रही। यूएस फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद में ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में उछाल के चलते इनवेस्टर जोखिम लेने से बच रहे हैं और इसलिए अपने पोर्टफोलियो में कम रिस्की असेट्स शामिल कर रहे हैं। गोल्ड और स्विस फ्रैंक जैसी करेंसीज में मजबूती से रिस्क से बचने का पता चलता है।

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2. आर्थिक तंगी

न सिर्फ अमेरिका, बल्कि भारत में वित्तीय स्थिति खराब हो रही है। इसके चलते रिजर्व बैंक (आरबीआई) धीरे-धीरे लिक्विडिटी के नॉर्मलाइजेशन की ओर बढ़ रहा है। कॉल मनी रेट 4.55 फीसदी की ऊंचाई पर पहुंच गया, जो पिछले महीने 3.25-3.50 फीसदी के स्तर पर था। कॉल मनी रेट, वह रेट है जिस पर बैंक ओवरनाइट कर्ज लेते हैं। कॉल रेट में उछाल के साथ ही ट्राई पार्टी रेपो डीलिंग और सेटलमेंट भी 4.24 के स्तर पर पहुंच गया, जो दिसंबर के अंत तक लगभग 3.5 फीसदी था।

3. एफपीआई की बिकवाली

foreign portfolio investors : फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स की बिकवाली जारी है, क्योंकि वे ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के बीच महंगे बाजारों से निकल रहे हैं और जापान और यूरोप जैसे आकर्षक वैल्यू वाले बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं। कुल मिलाकर फॉरेन इनवेस्टर्स अक्टूबर से अभी तक 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली कर चुके हैं।

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4. मार्जिन और डिमांड की चिंताएं

दिसंबर में समाप्त तिमाही में भारतीय कंपनियों की अर्निंग से अभी तक उनके ऑपरेटिंग मार्जिन पर भारी दबाव के संकेत मिले हैं और इसका असर उनकी प्रॉफिटेबिलिटी पर पड़ रहा है। हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी कंपनियों की इनीशियल कमेंट्री से रूरल इकोनॉमी पर दबाव के संकेत मिले हैं, वहीं बजाज फाइनेंस ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि शहरी क्षेत्रों के लो इनकम वाले कंज्यूमर भी महामारी से प्रभावित हुए हैं।

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