Making money in financial markets : अगर विभिन्न ग्लोबल इक्विटी इंडेक्स के बीते एक साल के रिटर्न को देखें तो 45 फीसदी के रिटर्न के साथ MSCI Czech Republic Index टॉप पर रहा है। एमएससीआई टर्की (MSCI Turkey) ने 34 फीसदी और एमएससीआई अर्जेंटीना (MSCI Argentina) ने 31 फीसदी रिटर्न दिया है। अब कुछ अहम प्वाइंट्स पर गौर कीजिए...
अच्छा प्रदर्शन करने वाले देशों की स्थिति
चेक इकोनॉमी 5 फीसदी से कम सीएजीआर दर से बढ़ी है, इनफलेशन औसतन 3 फीसदी रही है और ब्याज दरें 2017 के लगभग जीरो से अब 3.75 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई हैं। यूथ अनइम्प्लॉयमेंट रेट 5 फीसदी से 12 फीसदी के बीच है।
तुर्की की इकोनॉमी भी 5 फीसदी से कम सीएजीआर दर से बढ़ी है, इनफ्लेशन 10 फीसदी (2016-17) और 36 फीसदी (वर्तमान) के बीच रही है और ब्याज दरें 16 फीसदी हैं। अनइम्प्लॉयमेंट रेट 11 फीसदी से ज्यादा है।
इसकी तुलना में एमएससीआई इंडिया इंडेक्स (MSCI India Index) 29 फीसदी रिटर्न के साथ पांचवां सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला इंडेक्स रहा है। भारत की जीडीपी ग्रोथ 5 फीसदी से ज्यादा रही है, इनफ्लेशन 6 फीसदी से कम और ब्याज दरें लगभग 4 फीसदी हैं।
पहली नजर में लगता है कि स्टॉक मार्केट का प्रदर्शन आर्थिक और सामाजिक वास्तविकताओं से अलग रहता है। कुछ लोग दलील दे सकते हैं कि तुर्की और अर्जेंटीना के इक्विटी मार्केट का प्रदर्शन पूर्व में कमजोर प्रदर्शन और निकट भविष्य में रिकवरी की ‘उम्मीद’ को ध्यान में रखकर देखना चाहिए।
“उम्मीद” रिकवरी का आधार, तो इक्विटी रिसर्च का कोई मतलब नहीं
उनके लिए मेरा जवाब होगा कि एमएससीआई टर्की इंडेक्स पिछले 3 साल से अच्छा प्रदर्शन करने वाले टॉप 10 इंडेक्स में बना हुआ है। अगर मौजूदा निराशा के हालात की परवाह किए बिना इक्विटीज में निवेश का पहला क्राइटीरिया ‘उम्मीद’ है तो संभवतः इक्विटी रिसर्च और एनालिसिस का कोई मतलब नहीं है।
इनवेस्टर्स को ऐसी असेट्स खरीदनी चाहिए जो हाल के दौर में निराशा का शिकार हुई हैं। यह स्ट्रैटजी कारगर रही है, उदाहरण के लिए, ग्लोबल फाइनेंसियल क्राइसिस के मामले में ग्रीक, इटैलियन, पुर्तगाल और स्पेनिश और डेट के मामले में हुआ।
इससे पता चलता है कि फाइनेंशियल मार्केट्स में कमाई का राज “निराशा” में छिपा है, “उम्मीद” में नहीं।
“लॉटरी” की उम्मीद में प्रतिक्रिया दे रहे लोग
शायद यही बात निवेशकों को डीएचएफएल, जेपी इंफ्राटेक, बीआईएलटी, सिंटेक्स जैसी निराशाजनक कंपनियों के शेयरों को खरीदने के लिए प्रेरित करती है। हालांकि, इनवेस्टर बजट और राज्य चुनावों जैसे नॉन इवेंट्स को लेकर परेशान हैं और "लॉटरी" की उम्मीद में प्रतिक्रिया दे रहे हैं और इस तरह प्री बजट रैली के लिए तैयार बाजारों के नैरेटिव को जटिल बना देते हैं।
इस पर ध्यान दिए बिना, मैं अपने इनवेस्टमेंट को सिर्फ उम्मीद के सहारे लगाने को प्राथमिकता नहीं देता हूं। मैं देखना चाहूंगा कि क्या इस सोशियो इकोनॉमिक डिस्ट्रेस के दौर में इक्विटी आउटपरफॉर्मैंस का कोई मेथड है और क्या असेट की कीमतों से जमीनी वास्तविकताएं जाहिर हो रही हैं।