Yes Bank fund raising : यस बैंक शुक्रवार, 29 जुलाई को पूंजी जुटाने पर विचार कर सकता है। बैंक का बोर्ड इसके लिए राइट इश्यू, प्रिफरेंशियल अलॉटमेंट, क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशंस प्लेसमेंट (QIP) या किसी अन्य स्वीकृत साधन और/ या इनके संयोजन आदि विकल्पों पर विचार कर सकता है। हालांकि, इसके लिए बाद में बैंक के शेयरहोल्डर्स से मंजूरी लेनी होगी।
हिस्सेदारी बेचने और निवेश जुटाने की खबरों से जुलाई के पहले हफ्ते से ही यस बैंक के शेयरों में तेजी जारी है। बुधवार को बीएसई पर शेयर 7 फीसदी से ज्यादा मजबूत होकर 14.70 रुपये पर बंद हुआ। वहीं पिछले तीन हफ्तों में शेयर लगभग 15 फीसदी मजबूत हो चुका है।
पीई कंपनियां 1 अरब डॉलर में खरीद सकती हैं हिस्सेदारी
एक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यस बैंक को जल्द बड़े इनवेस्टर्स मिल सकते हैं। प्राइवेट इक्विटी फर्म Carlyle और Advent यस बैंक में हिस्सेदारी खरीद सकते हैं। यह डील करीब 1 अरब डॉलर में हो सकती है। यस बैंक को पूंजी की जरूरत है। वह लंबे समय से हिस्सेदारी बेचकर पूंजी जुटाने की कोशिश कर रहा है।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यस बैंक अपना डूबा कर्ज JC Flowers Asset Reconstruction Company को बेचने जा रहा है। यस बैंक के बोर्ड में भी बदलाव की खबर है। इससे प्राइवेट इक्विटी फर्मों की दिलचस्पी यस बैंक में बढ़ी है।
वारंट जारी करने पर भी चल रहा है विचार
सूत्रों के मुताबिक, कार्लाइल और एडवेंट के टॉप लेवल के अधिकारियों ने इस हफ्ते यस बैंक और एसबीआई के सीनियर मैनेजमेंट से बातचीत की है। एसबीआई की यस बैंक में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी है। बताया जाता है कि इस बारे में RBI के अधिकारियों से भी बातचीत हुई है।
बताया जाता है कि यस बैंक में इनवेस्टमेंट की यह डील एक्सिस बैंक में बेन कैपिटल के निवेश जैसी होगी। शुरुआत में यस बैंक करीब 2.6 अरब वारंट्स जारी कर सकता है। फिर वह कार्लाइल और एडवेंट को प्रिफरेंशियल एलॉटमेंट के जरिए नए शेयर जारी करेगा।
किस दर पर बिक सकते हैं शेयर
कार्लाइल और एडवेंट Yes Bank में प्रति शेयर 14-15 रुपये की कीमत पर 3,600-3,900 रुपये इनवेस्ट कर सकते हैं। दोनों यस बैंक में 5-5 फीसदी हिस्सेदारी ले सकते हैं। वारंट्स को बाद में पहले से तय कीमत और तारीख पर शेयरों में बदल दिया जाएगा। आम तौर पर वारंट्स को 18 महीने बाद शेयरों में कनवर्ट किया जाता है।
यस बैंक अधिकतम 3.8 अरब डॉलर वारंट्स इश्यू कर सकता है ताकि बैंक में SBI की हिस्सेदारी 26 फीसदी बनी रहे। यस बैंक को डूबने से बचाने के लिए RBI ने जो प्लान एप्रूव किया था, उसके मुताबिक मार्च 2023 से पहले यस बैंक में एसबीआई की हिस्सेदारी 26 फीसदी से कम नहीं हो सकती। अभी यस बैंक में SBI की 30 फीसदी हिस्सेदारी है।