Zomato : जोमैटो ने क्विक कॉमर्स कंपनी ब्लिंकिट (Blinkit) के अधिग्रहण के लिए अपनी प्रस्तावित बैठक को एक सप्ताह के लिए टाल दिया है। इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले सूत्रों के मुताबिक, फूड डिलिवरी यूनिकॉर्न कंपनी ने अपने शेयरहोल्डर्स को भरोसे में लेने के लिए यह कदम उठाया है।
एक सूत्र ने कहा, भले ही डील का होना तय है लेकिन शीर्ष प्रबंधन बड़े इनवेस्टर्स और इंस्टीट्यूशनल शेयरहोल्डर्स के रूठने का जोखिम नहीं लेना चाहता। वे इस डील पर आगे बढ़ने से पहले सभी को राजी करना चाहते हैं।
मनीकंट्रोल ने इसी महीने खबर दी थी कि इस मुद्दे पर बोर्ड की बैठक 17 जून को होनी है और इसी दिन डील पर मुहर लग सकती है। इस मसले पर जोमैटो (Zomato) को भेजे गए ईमेल पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
पूर्व में ब्लिंकिट को 70 करोड़ डॉलर में खरीदने की चर्चा हुई थी, हालांकि अंतिम सौदा इससे कम कीमत पर होने का अनुमान है। इस डील में 1:10 के अनुपात में शेयरों की अदलाबदली होगी, जहां जोमैटो के एक शेयर के बदले में ब्लिंकिट के 10 शेयर मिलेंगे।
ग्रोफर्स को दिया था 15 करोड़ डॉलर कर्ज
इस साल मार्च में, Zomato ने कैश की कमी से जूझ रही ग्रोफर्स इंडिया प्रा. लि. (Grofers India) को 15 करोड़ डॉलर का कर्ज देकर एक बड़ी मुश्किल से उबारा था। फूड डिलिवरी कंपनी ने अपनी पिछली अर्निंग कॉल में कहा था कि पूरी धनराशि नहीं दी गई है और बाकी धनराशि कंपनी की जरूरत के आधार पर दिया जाएगा।
लिस्टेड फूड टेक कंपनी ने उस समय एक्सचेंजेस में दी फाइलिंग में कहा था, लोन की ब्याज दर 12 फीसदी या उससे ज्यादा होगा और इसकी अवधि एक साल से ज्यादा नहीं होगी। इस लोन से निकट भविष्य में ग्रोफर्स की कैपिटल संबंधी जरूरतें पूरी होंगी और यह हमारी दो साल में क्विक कॉमर्स में 40 करोड़ डॉलर के निवेश की हमारी योजना का हिस्सा है।
ग्रोफर्स इंडिया ने बीते साल अगस्त में जोमैटो से 10 करोड़ डॉलर जुटाए थे। इसके साथ ही वह यूनिकॉर्न बन गई थी। इस डील को सीसीआई से मंजूरी भी मिल गई थी।