बाजार की गिरावट जल्द थमने की उम्मीद नहीं, एक्सपर्ट्स से जानिए अब रिटेल निवेशकों की क्या हो रणनीति

निवेशकों को ऐसी कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जिनका कर्ज स्तर कम है और जिनकी प्राइसिंग पॉवर मजबूत है। वर्तमान बाजार स्थितियों में किसी पैनिक सेलिंग या बॉटम फिशिंग से बचने की सलाह होगी

अपडेटेड Jun 16, 2022 पर 7:04 PM
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इस बात में कोई संदेह नहीं है कि नियर टर्म में तमाम चुनौतियां हैं। लेकिन 3-5 साल के नजरिए से देखें तो भारत का ग्रोथ आउटलुक काफी अच्छा नजर आ रहा है

भारतीय बाजार के लिए गुरुवार का दिन काफी खराब साबित हुआ है। बाजार ने आज यानी 16 जून को बढ़त के साथ शुरुआत की थी। लेकिन कारोबार के अंत में यह करीब 2 फीसदी टूटकर बंद हुआ। निफ्टी आज 15400 का अपना मनोवैज्ञानिक सपोर्ट लेवल तोड़ता नजर आया। आज के कारोबार में निफ्टी ने नया 52 वीक लो बनाया। बाजार ने आज तेजी के साथ शुरुआत की थी, लेकिन यूरोपियन बाजारों से खराब संकेत आते ही दोपहर के कारोबारी सत्र में गिरावट बढ़ती नजर आई।

बाजार को बैंक ऑफ इंग्लैंड के फैसलों का इंतजार था। जानकारों का कहना है कि बैंक ऑफ इंग्लैंड भी महंगाई को रोकने के लिए ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है। अधिकांश एनालिस्ट का मानना है कि यूएस फेड द्वारा ब्याज दरों में की गई बढ़ोतरी कमोबेश उम्मीद के अनुरूप रही है। यूएस फेड महंगाई नियंत्रण में आने तक दरों में बढ़ोतरी की नीति पर कायम रहेगा।

भारतीय बाजार की कैसी रहेगी चाल


एनालिस्ट का मानना है कि नियर टर्म में भारतीय बाजार पर दबाव कायम रहेगा। बचे हुए वित्त वर्ष 2023 में बाजार बीयर मार्केट जोन में जाता नजर आ सकता है। दुनिया भर में ब्याज दरों में आक्रामक तौर पर हो रही बढ़ोतरी से मांग पर दबाव आएगा। इसके साथ ही कंपनियों पर लागत का दबाव देखने को मिलेगा और आगे हमें अर्निंग डाउनग्रेडिंग होती नजर आ सकती है।

जानकारों का मानना है कि अगर विकसित देशों में मंदी जैसी कोई स्थिति बनती है तो विकासशील देशों की ग्रोथ पर नेगेटिव असर पड़ेगा। बैंक ऑफ बड़ोदा के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनविस का कहना है कि भारत के लिए इसके दो मतलब निकलते हैं। पहला ब्याज दर बढ़ने से यूएस मार्केट ज्यादा आकर्षक हो जाएगा। जिससे भारत जैसे उभरते बाजारों से डॉलर का फ्लो अमेरिका की तरफ जाता नजर आएगा। दूसरे डालरे के मुकाबले रुपये में कमजोरी बढ़ेगी।

क्या और गिरावट है मुमकिन

इस समय बाजार में हर उछाल पर बिकवाली देखने को मिल रही है। यह निवेशकों में इक्विटी बाजार के प्रति हाल-फिलहाल के लिए घटते रुझान का संकेत है। बाजार जानकारों का कहना है कि अभी यह कहना बहुत कठिन है कि बाजार का बॉटम बन चुका है। लेकिन हम यह कह सकते हैं कि लॉन्ग टर्म बॉटम बनने में अभी कुछ समय लगेगा।

रेलीगेयर ब्रोकिंग के अजीत मिश्रा का कहना है कि निफ्टी के लिए 15,400-15,450 पर पहला सपोर्ट नजर आ रहा है। जबकि 14,800 और 15,000 पर बड़ा सपोर्ट है। इस जोन के आसपास से किसी उछाल के पहले निफ्टी हमें इन लेवलों के पास कंसोलिडेट होता नजर आ सकता है।

निवेशकों की अब क्या हो रणनीति

एक्सपर्ट की सलाह है कि इस समय निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है। सतर्क रहकर क्वालिटी शेयरों का चुनाव करें। इस समय कई अच्छे शेयर सस्ते भाव पर मिल रहे हैं। HDFC सिक्योरिटीज के दीपक जसानी का कहना है कि रिटेल निवेशकों को अपने असेट एलोकेशन और इक्विटी पोर्टफोलियो में समीक्षा और रीबैलेसिंग करनी चाहिए। बीच में कोई उछाल मिलने पर पोर्टफोलियो के रीबैलेंसिंग के नजरिए से मुनाफा वसूली करें। इस मुनाफे के पैसे अगले कुछ महीने में गिरावट थमने पर नई खरीदारी करें।

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जानकारों का कहना है कि निवेशकों को क्वालिटी स्टॉक में अपना निवेश बनाए रखना चाहिए। इस बात में कोई संदेह नहीं है कि नियर टर्म में तमाम चुनौतियां हैं। लेकिन 3-5 साल के नजरिए से देखें तो भारत का ग्रोथ आउटलुक काफी अच्छा नजर आ रहा है। इसके अलावा ट्रेलिंग 12 मंथ बेसिस (trailing twelve-month basis) पर वैल्यूएशन काफी अच्छे नजर आ रहे हैं। निवेशकों को ऐसी कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जिनका कर्ज स्तर कम है और जिनकी प्राइसिंग पॉवर मजबूत है। वर्तमान बाजार स्थितियों में किसी पैनिक सेलिंग या बॉटम फिशिंग से बचने की सलाह होगी। एसआईपी के जरिए निवेश करना भी अच्छा विकल्प है।

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