TCS के डिविडेंड का जादू, Air India के ₹40000 करोड़ का घाटा भी सह गई Tata Sons, बाकी कंपनियों की ऐसी है हालत

TCS Dividend and Tata Sons losses: एक तरफ एआई के चलते आईटी कंपनियों को तगड़ा झटका लगा है तो दूसरी तरफ टीसीएस के डिविडेंड से टाटा सन्स को Air India और Tata Digital के घाटे की भरपाई करने में मदद मिली। जानिए टीसीएस से टाटा सन्स को कितना सपोर्ट मिला और टाटा सन्स के पोर्टफोलियो में शामिल लिस्टेड और अनलिस्टेड कंपनियों की सेहत कैसी है

अपडेटेड Mar 30, 2026 पर 2:58 PM
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वर्ष 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक टाटा सन्स की 30 कंपनियों में हिस्सेदारी थी-14 लिस्टेड और 16 अनलिस्टेड।

देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) का रेवेन्यू वित्त वर्ष 2020 से वित्त वर्ष 2025 के बीच 68% बढ़कर ₹4.45 लाख करोड़ हो गया लेकिन इस दौरान मुनाफा सिर्फ 50% बढ़कर ₹48,797 करोड़ पर पहुंचा यानी कि करीब 8% की सालाना बढ़ोतरी। वहीं दूसरी तरफ टाटा सन्स (Tata Sons) के पोर्टफोलियो में शामिल कंपनियों का रेवेन्यू इस दौरान 94% बढ़कर ₹1.5 लाख करोड़ और मुनाफा 250% उछलकर वित्त वर्ष 2025 में ₹1.11 लाख करोड़ पर पहुंच गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि टीसीएस से मिले डिविडेंड ने टाटा सन्स को अपनी घाटे में चल रही कंपनियों के झटके को सहने में मदद की।

टाटा सन्स को सबसे अधिक झटका एयर इंडिया (Air India) ने दिया जिसे वित्त वर्ष 2020 से लेकर पांच वर्षों में ₹40 हजार करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ। टाटा सन्स की और भी कंपनियां घाटे में रही हैं लेकिन टीसीएस के डिविडेंड ने संभाल लिया। मनीकंट्रोल की एनालिसिस में सामने आया कि वित्त वर्ष 2020 से टाटा सन्स को औसतन हर साल ₹30,000 करोड़ का डिविडेंड मिला और अगर टीसीएस के ₹40,000 करोड़ के बायबैक को भी शामिल किया जाए, तो यह राशि और अधिक हो जाती है। वित्त वर्ष 2020 से टाटा सन्स को टीसीएस से पांच वर्षों में करीब ₹1.7 लाख करोड़ का डिविडेंड मिला है।

Tata Sons के मुनाफे में उछाल


टीसीएस से बढ़ते डिविडेंड के चलते टाटा सन्स के नेट प्रॉफिट में तेजी आई है। FY20 तक इसका मुनाफा ₹10,000–₹20,000 करोड़ के बीच था। हालांकि टीसीएस ने डिविडेंड पेमेंट बढ़ाया तो टाटा सन्स का मुनाफा FY25 तक 275% बढ़कर ₹45,588 करोड़ हो गया। टीसीएस का डिविडेंड पेआउट रेश्यो वित्त वर्ष 2023 में 100% और वित्त वर्ष 2025 में 94% था यानी कि कंपनी ने लगभग सारा प्रॉफिट शेयरहोल्डर्स को बांट दिया और इसमें टाटा संस सबसे बड़ा शेयरहोल्डर है। वित्त वर्ष 2024, वित्त वर्ष 2022 और वित्त वर्ष 2021 में डिविडेंड पेआउट 40-60% के बीच रहा। लेकिन इन तीनों वर्षों में टीसीएस ने हर साल ₹16,000 करोड़ से अधिक के शेयर बायबैक का ऐलान किया था जिनके शामिल करने पर पेआउट रेश्यो 85% से काफी ऊपर हो सकता था।

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सात अनलिस्टेड कंपनियां घाटे में

वर्ष 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक टाटा सन्स की 30 कंपनियों में हिस्सेदारी थी-14 लिस्टेड और 16 अनलिस्टेड। वित्त वर्ष 2025 में एक को छोड़ सभी लिस्टेड कंपनियां मुनाफे में थीं, लेकिन 16 अनलिस्टेड में से केवल 9 ही मुनाफे में रहीं। पहले लिस्टेड कंपनियों की बात करें तो टाटा सन्स की प्रमोटेड 14 लिस्टेड कंपनियों में से टाटा टेलीसर्विसेज महाराष्ट्र लगातार घाटे में रही है। FY21 से इसका कुल घाटा ₹6,858 करोड़ था है जिसमें FY25 का ₹1,275 करोड़ का घाटा भी शामिल है। तेजस नेटवर्क्स भी वित्त वर्ष 2025 तक कमजोर रही,लेकिन वित्त वर्ष 2025 में इसे ₹450 करोड़ का मुनाफा हासिल हुआ।

अब अनलिस्टेड कंपनियों में बात करें तो सबसे ज्यादा घाटे वाली कंपनी तो एयर इंडिया रही, जिसे FY25 में ₹10,859 करोड़ का लॉस हुआ तो बाकी छह अनलिस्टेड कंपनियों को कुल मिलाकर वित्त वर्ष 2025 में ₹17,219 करोड़ का घाटा हुआ। टाटा डिजिटल की बात करें तो वित्त वर्ष 2020 में ₹7 करोड़ से इसका रेवेन्यू उछलकर वित्त वर्ष 2025 में ₹32,188 करोड़ पर पहुंच गया लेकिन इस दौरान घाटा ₹84 करोड़ से ₹4,610 करोड़ पर पहुंच गया। टाटा इंटरनेशनल का घाटा वित्त वर्ष 2025 में सालाना आधार पर ₹213 करोड़ से बढ़कर ₹477 करोड़ पर पहुंच गया। इसे वित्त वर्ष 2020 में ₹522 करोड़ का घाटा हुआ था। टाटा प्रोजेक्ट्स को वित्त वर्ष 2025 में ₹697 करोड़ और टाटा प्ले को ₹529 करोड़ का घाटा हुआ।

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