Market insight : अब मार्केट आउटलुक और कमाई की थीम पर चर्चा करते हुए पेडिग्री एडवाइजर (PADIGREE ADVISORY) के फाउंडर दिलीप भट्ट ने कहा कि बाजार में इस समय काफी पेन है। बाजार पर ईरान युद्ध का असर देखने को मिल रहा है। इससे बाजार और तमाम दिग्गज शेयरों को गहरा घाव लगा है। तमाम अच्छे स्टॉक्स स्ट्रगल करते दिख रहे हैं। ऐसे में हमें कोई जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। ये लड़ाई कब बंद होगी इस पर गेस वर्क भी नहीं करना चाहिए। थोड़ा बहुत वेट करें और थोड़ा बहुत और स्पष्टता आ जाए तो उसके बाद ही काम करे। इस लड़ाई से सप्लाई चेन बुरी तरह से प्रभावित हुई है। लेकिन ये पता नहीं चल रहा है कि इससे कौन, किधर और कितना प्रभावित हो रहा है और कितना इंपैक्ट हो रहा है। ऐसे में बाजार में डर का माहौल बना रहेगा। ऐसे में अगर मार्केट में कुछ करना भी है तो स्टॉक स्पेसिफिक रहना चाहिए।
इंडेक्स में थोड़ा बहुत निफ्ट्ट 50 पर ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा थोड़ा बहुत मिड कैप इंडेक्स पर भी ध्यान देना चाहिए लेकिन स्टॉक स्पेसिफिक ही रहे। इस समय बाजार में चैलेंज बहुत जबरदस्त है। हमें यह देखना होगा कि ईरान युद्ध के चलते सप्लाई चेन में दिक्कत की किस सेक्टर पर कितना और कैसा असर पड़ा है। फिर भी इस समय फार्मा शेयरों में मौके नजर आ रहे हैं। इसके अलावा इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन और कैपिटल गुड्स पर फोकस करना चाहिए। हालांकि ये शेयर कुछ महंगे जरूर हैं। फाइनशियल सेक्टर और एनबीएफसी से चुनिंदा शेयर भी राडार पर रहने चाहिए। कैपिटल गुड्स में L&T पर ध्यान देना चाहिए।
कंज्यूमर ड्यूरेबल शेयर भी लग रहे अच्छे
इस बार काफी गर्मी पड़ने की संभावना है। ऐसे में कंज्यूमर ड्यूरेबल सेक्टर के वोल्टॉस और ब्लू स्टार जैसे शेयर अच्छा कर सकते हैं। इन शेयरों में काफी करेक्शन आ चुका है। पिछले 2-3 साल से इन शेयरों पर दबाव रहा है। अब ये तेजी पकड़ सकते हैं।
आईटी शेयरों पर बात करते हुए दिलीप भट्ट ने कहा कि जिस तरह से रुपी डेप्रिशिएट हो रहा है उससे आईटी सेक्टर को एक बहुत सपोर्ट अच्छा सपोर्ट मिल रहा है। रुपए की गिरावट से IT कंपनियों के मार्जिन को सपोर्ट संभव है। डिफेंसिव बेट के तौर पर आईटी पर जरूर फोकस करना चाहिए।
डिफेंस सेक्टर में जल्दबाजी करने से बचें
डिफेंस सेक्टर पर बात करते हुए दिलीप भट्ट ने कहा कि ईरान युद्ध से साफ है कि नए जमाने में लड़ाई के तरीके बदल रहे हैं। लड़ाई के परंपरागत हथियार और तरीके तेजी से हो रहे बदलाव का शिकार हो रहे हैं। हमें यह देखना होगा कि हमारी डिफेंस कंपनियां इन बदलावों को किस तरह और कितनी तेजी से अपनाती हैं। डिफेंस कंपनियों के लिए ये बहुत बड़ा चैलेंज होगा। डिफेंस कंपनियों को लेकर हमें अभी जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं है।
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