इन 4 कारणों से गिर सकता है शेयर बाजार? HSBC ने क्यों दी निवेशकों का सावधान रहने की सलाह

भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन इस साल अब तक लगभग सपाट रहा है। जबकि चीन से लेकर अमेरिका तक के शेयर बाजारों ने इसी दौरान अपने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। ऐसे में यह सवाल उठने लगने है कि भारतीय शेयर मार्केट कब वापसी करेगा? सेंसेक्स और निफ्टी कब सुस्ती से बाहर निकलकर रफ्तार पकड़ना शुरू करेगे? ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म HSBC ने इसे लेकर अपना कैलकुलेशन किया है

अपडेटेड Sep 02, 2025 पर 7:29 PM
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HSBC ने कहा कि साल 2025 के लिए अर्निंग्स ग्रोथ के अनुमान पहले ही घटाए जा चुके हैं

भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन इस साल अब तक लगभग सपाट रहा है। जबकि चीन से लेकर अमेरिका तक के शेयर बाजारों ने इसी दौरान अपने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। ऐसे में यह सवाल उठने लगने है कि भारतीय शेयर मार्केट कब वापसी करेगा? सेंसेक्स और निफ्टी कब सुस्ती से बाहर निकलकर रफ्तार पकड़ना शुरू करेगे? ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म HSBC ने इसे लेकर अपना कैलकुलेशन किया है और पाया कि कम से कम चार ऐसी बातें हैं जो मार्केट की तेजी के रास्ते में ब्रेकर की तरह काम कर सकती हैं। हालांकि ब्रोकरेज ने इसके साथ 5 ऐसे फैक्टर्स भी बताएं है, जो आगे चलकर मार्केट के पक्ष में काम कर सकते हैं। आइए इन्हें सभी फैक्टर्स को एक-एक कर जानते हैं।

HSBC के मुताबिक भारतीय बाजार के 4 बड़े जोखिम-

1. कमजोर अर्निंग्स

HSBC ने कहा कि साल 2025 के लिए अर्निंग्स ग्रोथ के अनुमान पहले ही घटाए जा चुके हैं। वहीं अगले साल 2026 के लिए 14% के अर्निंग्स ग्रोथ का अनुमान जताया गया है। लेकिन जब तक मांग में सुधार के स्पष्ट संकेत नहीं दिखाई देते हैं, तब तक अनुमान के भी घटाए जाने की आशंका बनी हुई है।


2. शेयरों की भारी सप्लाई

ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि मार्केट में इनसाइडर सेलिंग जारी है। यानी कंपनी के प्रमोटर और दूसरे बड़े निवेशक अपने शेयर लगातार बेच रहे हैं। वहीं दूसरी विदेशी निवेशक बड़े पैमाने पर खरीदारी करने से बच रहे हैं। ऐसे में बाजार में शेयरों की सप्लाई अधिक हो रही है, जिसके चलते वैल्यूएशन पर दबाव पड़ रहा है।

3. कॉम्पिटीशन के चलते मार्जिन पर दबाव

लगभग सभी सेक्टर में कॉम्पिटीशन तेजी से बढ़ रहा है, जिससे चलते कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी और उनके मार्जिन पर दबाव देखा जा रहा है। कम मार्जिन का असर शेयर वैल्यूएशन पर भी नजर आ सकता है।

4. प्राइवेट इनवेस्टमेंट में सुस्ती

HSBC का कहना है कि प्राइवेट कैपेक्स अभी भी एनर्जी और माइनिंग सेक्टर तक सीमित है। वहीं मैन्युफैक्चरिंग और कैपिटल गुड्स में निवेश की रफ्तार नहीं बढ़ पाई है।

HSBC के बताए 5 फैक्टर्स जो मार्केट को आगे चलकर सपोर्ट कर सकते हैं-

1. मॉनिटरी पॉलिसी

HSBC ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से आगे ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद अभी भी बनी हुई है। ब्याज दरों में कटौती और महंगाई दर में नरमी से बैंकों पर दबाव हल्का हो सकता है। बैंक इसलिए शेयर मार्केट के लिए काफी अहम हैं क्योंकि मार्केट में सबसे अधिक वेटेज इसी का है।

2. GST स्ट्रक्चर में सुधार

ब्रोकरेज ने कहा कि सरकार GST स्ट्रक्चर को सरल बनाने की दिशा में काम कर रही है। टैक्स को घटाने जैसे अहम कदम से कंज्म्पशन को बढ़ावा मिल सकता है। इससे ग्रोथ रिकवरी को भी धीरे-धीरे सपोर्ट मिलने की उम्मीद है।

3. वैल्यूएशन में सुधार

ब्रोकरेज ने कहा कि शॉर्ट टर्म में री-रेटिंग की संभावना सीमित है, लेकिन घरेलू मांग से शेयरों को सपोर्ट मिल रहा है। मांग में तेजी आने के बाद आगे चलकर कई स्टॉक की री-रेटिंग देखने को मिल सकती है।

4. टैरिफ का कम असर

HSBC का मानना है कि अमेरिकी टैरिफ से भारतीय शेयर मार्केट में लिस्टेड कंपनियों पर प्रत्यक्ष रूप से बहुत ही कम असर पड़ने की उम्मीद है। ऐसे में इसके चलते बाजार में किसी बहुत बड़े गिरावट के आने की आशंका नहीं है।

5. चाइनीज मार्केट से अब कोई खतरा नहीं

अभी तक माना जाता रहा है कि भारत और चीन के मार्केट में एक ऊपर जाएगा तो दूसरा नीचे लेकिन HSBC का मानना है कि भारत और चीन एक साथ आगे बढ़ सकते हैं क्योंकि विदेशी निवेशकों की होल्डिंग में ज्यादा ओवरलैप नहीं है।

HSBC ने भारतीय शेयर बाजार को न्यूट्रल की रेटिंग दी और कहा कि निकट टर्म में भारतीय बाजार में तेजी की गुंजाइश सीमित है।

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