ICICI Bank वैल्यूएशन में पहली बार HDFC Bank से आगे निकला, जानिए पूरा मामला

आईसीआईसीआई बैंक ने अपनी स्थिति इम्प्रूव करने के लिए बहुत मेहनत की है। उसने अपनी बैलेंसशीट को साफसुथरा बनाया है। दबाव वाले लोन के लिए प्रोविजनिंग बढ़ाई है। अपने लोन पोर्टफोलियो में कॉरोपोरेट की जगह रिटेल की हिस्सेदारी बढ़ाई है

अपडेटेड Apr 21, 2022 पर 12:26 PM
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आईसीआईसीआई बैंक ने कोरोना की महामारी के बावजूद वित्त वर्ष 2020-21 में अपनी नेट इंटरेस्ट इनकम में अच्छी ग्रोथ हासिल की है।

ICICI Bank पहली बार वैल्यूएशन के मामले में HDFC Bank से आगे निकल गया है। इसकी वजह आईसीआईसीआई बैंक के शेयर में आई तेजी है। पिछले एक साल में ICICI Bank का शेयर 30% चढ़ा है। इस शेयर में इनवेस्टर्स ने बहुत दिलचस्पी दिखाई है। आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक दोनों प्राइवेट बैंक हैं।

12 महीने के ट्रेलिंग बेसिस पर ICICI Bank के शेयर में उसकी बुक वैल्यू के 3.3 गुना पर कारोबार हो रहा है। इसके मुकाबले एचडीएफसी बैंक के शेयर में 3 गुना पर कारोबार हो रहा है। हालांकि, दोनों बैंकों की बुक वैल्यू पर आधारित वैल्यूएशन में ज्यादा फर्क नहीं है। दूसरी बात, मार्केट कैपिटलाइजेशन के मामले में भी एचडीएफसी बैंक ICICI Bank से काफी आगे है।

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आईसीआईसीआई बैंक का मार्केट कैपिटलाइजेशन 5.25 लाख करोड़ है। इसके मुकाबले एचडीएफसी बैंक का मार्केट कैपिटलाइजेशन 7.5 लाख करोड़ रुपये है। इसके बावजूद यह अहम है कि पहली बार आईसीआईसीआई बैंक का शेयर वैल्यूएशन के एक महत्वपूर्ण पैरामीटर पर एचडीएफसी बैंक के शेयर से आगे निकल गया है।

आईसीआईसीआई बैंक ने अपनी स्थिति इम्प्रूव करने के लिए बहुत मेहनत की है। उसने अपनी बैलेंसशीट को साफसुथरा बनाया है। दबाव वाले लोन के लिए प्रोविजनिंग बढ़ाई है। अपने लोन पोर्टफोलियो में कॉरोपोरेट की जगह रिटेल की हिस्सेदारी बढ़ाई है। फाइनेंशियल ईयर 2021-22 की दिसंबर तिमाही में आईसीआईसीआई बैंक को प्रोविजन कवरेज रेशियो 80 फीसदी रहा, जो इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा है। पांच साल पहले यह रेशियो महज 54 फीसदी था।

आईसीआईसीआई बैंक ने कोरोना की महामारी के बावजूद वित्त वर्ष 2020-21 में अपनी नेट इंटरेस्ट इनकम में अच्छी ग्रोथ हासिल की है। बीते वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाहियों में भी नेट इंटरेस्ट इनकम में अच्छी ग्रोथ हुई है। इससे बैंक की ऑपरेटिंग प्रॉफिट ग्रोथ को सपोर्ट मिला है। पिछले कुछ सालों में इसकी नेट प्रॉफिट ग्रोथ में दिखी अस्थिरता खत्म हो गई है। क्रेडिट कॉस्ट घटी है और रिटर्न ऑन इक्विटी काफी बढ़ा है। इसकी कॉर्पोरेट लोन ग्रोथ भी जबरदस्त रही है।

ICICI Bank के टॉप मैनेजमेंट और कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर संदेह भी दूर हो रहे हैं। 2018 में इस बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर के करप्शन में लिप्त होने की खबर आने से आईसीआईसीआई बैंक की साख को बहुत चोट पहुंची थी। अक्टूबर 2018 में कोचर को इस्तीफा देने को मजबूर होना पड़ा। इसके बाद संदीप बख्शी ने बैंक की कमाई संभाली। उन्होंने कुछ ही साल में बैंक का कायापलट दी।

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