सरकारी हिस्सेदारी में कमी की बाट जोह रहे IDBI Bank ने जनवरी-मार्च 2026 तिमाही और वित्त वर्ष 2026 के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। तिमाही के दौरान बैंक का स्टैंडअलोन बेसिस पर शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 5 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर 1943.17 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले मुनाफा 2051.18 करोड़ रुपये था। कुल स्टैंडअलोन इनकम 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 9409.45 करोड़ रुपये हो गई। मार्च 2025 तिमाही में यह 9035.29 करोड़ रुपये थी।
बैंक ने शेयर बाजारों को बताया है कि मार्च 2026 तिमाही के दौरान उसकी कुल ब्याज आय 7798.47 करोड़ रुपये रही, जो एक साल पहले 6978.64 करोड़ रुपये थी। शुद्ध ब्याज आय (NII) एक साल पहले से 17 प्रतिशत बढ़कर 3,851.5 करोड़ रुपये हो गई। यह मार्च 2025 तिमाही में 3,290 करोड़ रुपये थी। शुद्ध ब्याज मार्जिन (NIM) 15 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी के साथ 4.15 प्रतिशत रहा। पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी की स्टैंडअलोन इनकम 35743.53 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 9513.36 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
IDBI Bank की एसेट क्वालिटी में सुधार
IDBI Bank का मार्च 2026 तिमाही में ग्रॉस NPA रेशियो घटकर 2.32 प्रतिशत हो गया, जो कि एक साल पहले 2.98 प्रतिशत था। नेट NPA रेशियो 0.15 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो मार्च 2025 तिमाही में भी इसी स्तर पर था।
IDBI Bank का शेयर 1 प्रतिशत लुढ़का
IDBI Bank के शेयरों में 30 अप्रैल को 1 प्रतिशत की गिरावट है। शेयर BSE पर 75.89 रुपये पर है। बैंक का मार्केट कैप 81600 करोड़ रुपये है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। शेयर एक महीने में 23 प्रतिशत बढ़ा है। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 118.45 रुपये और एडजस्टेड लो 61.05 रुपये है।
IDBI Bank में सरकारी हिस्सेदारी की बिक्री का प्लान कहां पहुंचा
सरकार IDBI Bank में अपनी हिस्सेदारी लंबे वक्त से कम करना चाहती है। इसके लिए अब नए सिरे से बैंक की वैल्यूएशन को आंकना शुरू किया जा चुका है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सरकारी हिस्सेदारी की बिक्री के लिए बोलियां आमंत्रित करने पर कोई फैसला लिया जाएगा। नया मूल्यांकन भविष्य में होने वाली किसी भी हिस्सेदारी बिक्री के लिए एक बेंचमार्क का काम करेगा। रणनीतिक बिक्री की कोशिश के पिछले दौर से उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिले। इसके चलते केंद्र सरकार को बाजार की कमजोर स्थिति को देखते हुए कीमतों से जुड़ी अपनी उम्मीदों पर फिर से विचार करना पड़ा।
विनिवेश के तहत सरकार IDBI Bank में अपनी और LIC की हिस्सेदारी में से 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचना चाहती है। इस साल मार्च महीने की शुरुआत में इस प्रस्तावित बिक्री को रद्द कर दिया गया। इसकी वजह यह रही कि कथित तौर पर दो संभावित खरीदारों की वित्तीय बोलियां, रिजर्व प्राइस से कम थीं। ये संभावित खरीदार एमिरेट्स NBD और फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स थे।
वर्तमान में IDBI Bank में पब्लिक शेयरहोल्डिंग केवल 5.29 प्रतिशत है। सरकारी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के पास 49.24 प्रतिशत हिस्सेदारी है और इसका बैंक पर नियंत्रण है। वहीं, भारत सरकार की हिस्सेदारी 45.48 प्रतिशत है। सरकार का प्लान IDBI Bank में अपनी 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का था। वहीं LIC, बैंक में 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रही थी।
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