IDBI Bank Ltd के शेयरहोल्डर्स 17 जून को जबरदस्त मुनाफे में हैं। शेयर की कीमत में दिन में पिछले क्लोजिंग प्राइस से 20 प्रतिशत तक का बंपर उछाल देखने को मिला। BSE पर भाव 92.44 रुपये के हाई तक गया। बाद में शेयर 17 प्रतिशत से ज्यादा बढ़त के साथ 90.47 रुपये पर सेटल हुआ। बैंक का मार्केट कैप 97200 करोड़ रुपये है। स्टॉक में कई बड़ी ब्लॉक डील्स की वजह से भारी ट्रेडिंग हुई। शेयर में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी है। इस बीच कीमत 25 प्रतिशत उछली।
इन्फॉर्मिस्ट के अनुसार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर कई बड़े सौदों के जरिए लगभग 1.06 करोड़ शेयरों का लेन-देन हुआ। भाव 82 से 92 रुपये प्रति शेयर के बीच रहा। बायर्स और सेलर्स के बारे में अभी जानकारी सामने नहीं आई है। इसके अलावा ऐसी भी खबर है कि बैंक में सरकारी हिस्सेदारी की बिकी की प्रक्रिया सही रास्ते पर है और वित्त वर्ष 2027 के दौरान पूरी हो सकती है।
शेयर एक महीने में लगभग 30 प्रतिशत उछला
IDBI Bank का शेयर एक महीने में लगभग 30 प्रतिशत उछला है। 3 साल में कीमत लगभग 70 प्रतिशत चढ़ी है। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 118.45 रुपये और एडजस्टेड लो 61.05 रुपये है। वर्तमान में IDBI Bank में पब्लिक शेयरहोल्डिंग केवल 5.29 प्रतिशत है। सरकारी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के पास 49.24 प्रतिशत हिस्सेदारी है और इसका बैंक पर नियंत्रण है। वहीं, भारत सरकार की हिस्सेदारी 45.48 प्रतिशत है।
सरकार IDBI Bank में अपनी हिस्सेदारी लंबे वक्त से कम करना चाहती है। विनिवेश के तहत सरकार IDBI Bank में अपनी और LIC की हिस्सेदारी में से 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचना चाहती है। सरकार का प्लान IDBI Bank में अपनी 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का है। वहीं LIC, बैंक में 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचना चाहती है।
मार्च में रद्द हो गया था सरकारी हिस्सेदारी की बिक्री का प्लान
इस साल मार्च महीने की शुरुआत में IDBI Bank में प्रस्तावित शेयर बिक्री को रद्द कर दिया गया था। इसकी वजह यह रही कि कथित तौर पर दो संभावित खरीदारों की वित्तीय बोलियां, रिजर्व प्राइस से कम थीं। ये संभावित खरीदार एमिरेट्स NBD और फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स थे। मई महीने में ब्लूमबर्ग के हवाले से खबर आई कि केंद्र सरकार IDBI बैंक लिमिटेड में अपनी ज्यादातर हिस्सेदारी बेचने की कवायद में संभावित खरीदारों की दिलचस्पी फिर से जगाने के तरीके तलाश रही है। एक तरीका यह है कि रिजर्व प्राइस को 20 प्रतिशत तक कम कर दिया जाए। अप्रैल में खबर आई कि सरकार नए सिरे से IDBI Bank की वैल्यूएशन को आंक रही है।
कब से अटका है IDBI Bank का प्राइवेटाइजेशन
सरकार ने सबसे पहले साल 2016 में घोषणा की थी कि वह IDBI Bank का प्राइवेटाइजेशन करना चाहती है। यह विचार सबसे पहले फरवरी 2016 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने केंद्रीय बजट भाषण में आधिकारिक तौर पर दिया था। बैंक में सरकारी हिस्सेदारी कम करने की पहली कोशिश मूल्यांकन संबंधी चिंताओं के कारण नाकाम हो गई थी। फिर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फरवरी 2020 में वित्त वर्ष 2021 का बजट पेश करते हुए बैंक में सरकारी हिस्सेदारी और कम करने का प्रपोजल रखा।
IDBI Bank के प्राइवेटाइजेशन की प्रक्रिया को औपचारिक गति तब मिली, जब आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने मई 2021 में बैंक में मैनेजमेंट कंट्रोल के ट्रांसफर के साथ-साथ रणनीतिक विनिवेश के लिए अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दी। सरकार ने अक्टूबर, 2022 में LIC के साथ मिलकर इस बैंक में कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट (EoI) आमंत्रित किए। अक्टूबर 2022 में ही KPMG India को लेनदेन सलाहकार (Transaction Advisor) नियुक्त किया गया। फरवरी 2026 में एमिरेट्स NBD और फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स से वित्तीय बोलियां मिलीं।
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