इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने जेन स्ट्रीट को 31 मार्च को एक ड्राफ्ट नोटिस भेजा है। इसमें पूछा गया है कि पिछले चार से पांच सालों में जेन स्ट्रीट सिंगापुर ने डेरिवेटिव मार्केट में जो करीब 20,000 करोड़ रुपये कमाए हैं, उस पर सिंगापुर ट्रीटी बेनेफिट्स देने से डिपार्टमेंट को क्यों नहीं इनकार कर देना चाहिए। इस मामले से जुड़े दो लोगों ने यह जानकारी दी। जेन स्ट्रीट हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर है।
नोटिस से जेन स्ट्रीट पर बढ़ा दबाव
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के इस नोटिस से जेन स्ट्रीट पर दबाव बढ़ गया है। सेबी पहले ही बाजार में कथित मैनिपुलेशन के लिए उस पर 4,843 करोड़ रुपये की पेनाल्टी लगा चुका है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने जुलाई 2025 में कुछ खास मार्केट एनटिटीज पर छापे मारे थे। इनमें जेन स्ट्रीट का ग्लोबल कस्टोडियन भी शामिल था। ये छापे एक जांच से जुड़े थे।
7000 करोड़ लग सकता है टैक्स
अगर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट सिंगापुर ट्रीटी के फायदे देने से इनकार देता है तो जेन स्ट्रीट को करीब 7,000 करोड़ रुपये का टैक्स चुकाना पड़ेगा। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने यह भी आरोप लगाया है कि जेन स्ट्रीट ने सिर्फ सिंगापुर ट्रीटी का फायदा उठाने के लिए अपना बेस FY20 के बाद हांगकांग से सिंगापुर ट्रांसफर किया था। डिपार्टमेंट ने यह भी कहा है कि जेन स्ट्रीट के ट्रेडर्स अब भी हांगकांग में बैठते हैं, जबकि कंपनी सिंगापुर एनटिटी के जरिए टैक्स बेनेफिट्स क्लेम करती है। मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने यह जानकारी दी।
टैक्स छूट के लिए सिंगापुर में बनाया ऑफिस
मनीकंट्रोल ने इस बारे में जेन स्ट्रीट और टैक्स डिपार्टमेंट को ईमेल भेजे। लेकिन उसके जवाब नहीं मिले। मामले की सीधी जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने कहा, "प्लेस ऑफ इफेक्टिव मैनेजमेंट (POEM) वह प्रमुख जांच है, जिससे यह तय होता है कि एनटिटी पर टैक्स लगेगा या नहीं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का मानना है कि जेन स्ट्रीट सिंगापुर को हांगकांग से कंट्रोल किया जा रहा था। सिंगापुर का इस्तेमाल सिर्फ भारत में टैक्स से बचने के लिए किया जा रहा था। अगर डिपार्टमेंट की यह दलील सही है तो दूसरे ट्रेडर्स पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि उन्होंने इसी तरह के स्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया है।"
जेन स्ट्रीट ने आरोपों को किया खारिज
जेन स्ट्रीट की हालांकि इस बारे में दलील यह है कि उसे कोविड के दौरान लॉकडाउन के प्रतिबंध के चलते बेस सिंगापुर शिफ्ट करना पड़ा। कोविड के दौरान हांगकांग ने दुनिया के सबसे सख्त नियम लागू किए थे। ऊपर जानकारी देने वाले व्यक्ति ने बताया, "जेन स्ट्रीट का दावा है कि उसके ट्रेडर्स ने बार-बार अनुरोध किए थे कि हांगकांग ऑफिस से काम करने में मुश्किल आ रही है। इसलिए कंपनी लॉकडाउन हटने तक एक विकल्प की तलाश कर रही थी। इस वजह से जेन स्ट्रीट को अपने ट्रेडर्स सिंगापुर शिफ्ट करने पड़े। लॉकडाउन के बाद एंप्लॉयीज फिर से हांगकांग शिफ्ट हो गए।" हालांकि, जेन स्ट्रीट अपने ट्रेड्स वाया सिंगापुर रूट करती है और ट्रीटी के फायदों का दावा करती है।
भारत-सिंगापुर के बीच है टैक्स ट्रीटी
भारत और सिंगापुर के बीच डबल टैक्स अवॉयडेंस एग्रीमेंट (DTAA) है। इसके तहत सिंगापुर स्थित फंडों को डेरिवेटिव मार्केट्स में हुए फायदों पर भारत में टैक्स चुकाने से छूट मिलती है। डोमेस्टिक इनवेस्टर्स को डेरिवेटिव मार्केट्स में हुई कमाई पर भारत में टैक्स चुकाना पड़ता है, क्योंकि इसे बिजनेस इनकम माना जाता है। फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स (FPI) के लिए यह प्रॉफिट कैपिटल गेंस माना जाता है।