पिछले कुछ महीनों में टैक्सपेयर्स को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से धड़ाधड़ नोटिस मिल रहे हैं। टैक्स चुकाने वाले लोगों को इनकम टैक्स विभाग मैसेज और ई-मेल के जरिये नोटिस जारी किए गए हैं। ये नोटिस इसलिए भेजे जा रहे हैं क्योंकि टैक्स डिपार्टमेंट के पास ब्याज से होने वाली कमाई का जो ब्योरा है, वह टैक्सपेयर्स के इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) से मेल नहीं खाता है।
दरअसल, बैंक में किए गए फिक्स्ड डिपोजिट पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल होता है। लेकिन इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करते वक्त लोग अकसर इस बात को भूल जाते हैं और एफडी के ब्याज से होने वाली कमाई को ITR में नहीं दिखाते हैं। इस छोटी सी गलता के कारण टैक्स डिपार्टमेंट टैक्सपेयर्स को नोटिस भेज रहा है।
अगर इमकम टैक्स डिपार्टमेंट के नोटिस से बचना चाहते हैं तो ITR में Bank FD पर मिले ब्याज की जानकारी टैक्स विबाग को दें। लेकिन आपको यह पता होना चाहिए कि ITR में इसका ब्योरा कैसे देना है।
दरअसल, ब्याज से होने वाली कमाई का ब्योरा देने के लिए ITR में दो ऑप्शन मिलते हैं। टैक्सपेयर अपने इंटरेस्ट इनकम को ITR में ईयर ऑफ एक्रुअल (year of accrual) के साथ ईयर ऑफ रिसीप्ट (year of receipt) में दिखा सकते हैं।
यानी आर ब्याज का ब्योरा हर साल के हिसाब से दे सकते हैं या उस वर्ष भी दे सकते हैं जब आपको FD का रिटर्न मिलता है। लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स का सुजाव है कि FD पर मिलने वाले इंटरेस्ट को ईयर ऑफ एक्रुअल में दिखाएं।
यानी आपको ITR में हर साल के ब्याज की जानकारी देनी चाहिए। एकमुश्त ब्याज दिखाने के बजाय हर साल मिलने वाला ब्याज दिखाने से टैक्स स्लैब कम होगा और आज अधिक टैक्स देने से बच जाएंगे।
हर साल के ब्याज पर बैंक की तरफ से TDS भी काटा जाता है, जिसे आईटीआर फॉर्म 26AS में दिखा सकते हैं। इससे TDS और एनुअल इंटरेस्ट के आंकड़े में कोई अंतर नहीं होगा और टैक्स डिपार्टमेंट के नियमों का कोई उल्लंघन भी नहीं होगा।
अगर आपकी इनकम एग्जेम्टेड लिमिट से कम है तो आपको मिलने वाले ब्याज पर TDS का पेमेंट नहीं करना पड़ता है। बैंक 10 फीसदी की दर से टीडीएस काटते हैं।
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