RBI MPC Meeting: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अहम मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिन की मीटिंग 5 जून को खत्म होगी। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा 5 जून को इस बैठक के फैसलों की घोषणा करेंगे।

RBI MPC Meeting: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अहम मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिन की मीटिंग 5 जून को खत्म होगी। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा 5 जून को इस बैठक के फैसलों की घोषणा करेंगे।
इस बार कर्ज लेने वालों, FD निवेशकों और बाजार की नजरें रेपो रेट पर टिकी हैं। हालांकि ज्यादातर एक्सपर्ट्स का मानना है कि RBI फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। इसके साथ ही बाजार की नजर महंगाई, GDP ग्रोथ और रुपये को लेकर RBI के नजरिए पर भी रहेगी।
किन चुनौतियों के बीच हो रही है बैठक?
यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है। कच्चे तेल और गैस की कीमतें बढ़ रही हैं। सप्लाई चेन पर दबाव है और रुपया भी कमजोर हुआ है।
इन वजहों से महंगाई और आर्थिक विकास दोनों को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। ऐसे में RBI के लिए महंगाई को काबू में रखना और विकास को सहारा देना दोनों बड़ी चुनौतियां हैं।
रेपो रेट पर क्या है एक्सपर्ट्स की राय?
Moneycontrol के सर्वे में शामिल 16 अर्थशास्त्रियों, फिक्स्ड इनकम एक्सपर्ट्स और ट्रेजरी प्रमुखों का मानना है कि RBI इस बार रेपो रेट को 5.25% पर ही बरकरार रख सकता है।
हालांकि एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि RBI का रुख पहले के मुकाबले थोड़ा सख्त नजर आ सकता है। इसकी वजह रुपये में कमजोरी, बढ़ती ऊर्जा कीमतें और महंगाई का संभावित दबाव है।
महंगाई अनुमान में हो सकता है बदलाव
Kotak Mahindra AMC के हेड फिक्स्ड इनकम अभिषेक बिसेन का कहना है कि RBI फिलहाल रेपो रेट में बदलाव नहीं करेगा, लेकिन अपने बयान में सख्त रुख अपना सकता है।
उनके मुताबिक, खुदरा महंगाई दर अभी 3.48% पर है, लेकिन थोक महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतें आगे दबाव बढ़ा सकती हैं। ऐसे में RBI महंगाई का अनुमान बढ़ा सकता है और आर्थिक विकास के अनुमान में हल्की कटौती कर सकता है।
होम लोन सेक्टर को स्थिर ब्याज की उम्मीद
BASIC Home Loan के CEO और Co-Founder अतुल मोंगा का मानना है कि RBI इस बार संतुलित रुख अपना सकता है। उनके मुताबिक, घर खरीदने वालों के लिए ब्याज दरों में स्थिरता जरूरी है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी उधारी लागत ने खासकर पहली बार घर खरीदने वाले ग्राहकों की क्षमता को प्रभावित किया है। उनका कहना है कि स्थिर ब्याज दरें और पर्याप्त लिक्विडिटी हाउसिंग डिमांड और होम लोन की ग्रोथ को सहारा दे सकती हैं।
रुपये पर भी रहेगी खास नजर
इस बार RBI के बयान में रुपये की स्थिति पर भी खास नजर रहेगी। साल 2026 में अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले 6% से ज्यादा कमजोर हो चुका है, जो एक दशक का सबसे खराब प्रदर्शन माना जा रहा है।
ऐसे में बाजार यह जानना चाहेगा कि RBI रुपये में उतार-चढ़ाव को संभालने के लिए आगे क्या रणनीति अपनाने वाला है।
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