घरेलू इक्विटी मार्केट दूसरे एशियाई बाजारों से संकेत लेते हुए 27 जनवरी को जोरदार गोता लगाते दिखे। यूएस फेड की 26 जनवरी को आए मॉनीटरी पॉलीसी स्टेटमेंट के बाद निवेशक बाजार को लेकर निगेटिव हो गए हैं। जिसके चलते आज यह भारी गिरावट आती दिखी है । 27 जनवरी य़ानी आज के सुबह के कारोबार में निफ्टी 280 यानी 1.06 फीसदी तक फिसल गया औऱ इसने 16,997 तक का स्तर छू लिया। वहीं बीएसई सेंसेक्स 826 अंक यानी 1.4 फीसदी टूटकर 57,031 पर पहुंच गया।
हालांकि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने फिलहाल अभी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है लेकिन उसने कहा है कि जल्द ही ब्याज दरों में बढ़ोतरी करना बेहतर रहेगा। इसके अलावा यूएस फेड के चेयरमैन Jerome Powell ने आगे चलकर मॉनीटरी पॉलीसी में और कड़ाई लाने के साफ संकेत दिए। जिससे निवेशकों में अफरातफरी फैल गई।
Jerome Powell ने पॉलीसी मीट के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेस में कहा कि अमेरिका में लेबर मार्केट में आई मजबूती और कई दशकों के ऊंचाई पर चल रहे महंगाई के और बढ़ने की संभावना के बीच यह बेहतर होगा कि इनसे निपटने के लिए ब्याज दरें जल्द से जल्द बढ़ाई जाए। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि लेबर मार्केट को कोई खतरा पहुंचाए बिना हमारे पास ब्याज दरों में बढ़ोतरी की पर्याप्त मौके हैं।
बाजार ने Jerome Powell के इस कथन का अर्थ यह लगा लिया कि यूएस फेड इस साल 4 से ज्यादा बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। जिसका असर आज बाजार पर देखने को मिल सकता है। बता दें कि पहले बाजार की राय थी कि यूएस फेड इस साल 4 बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। इन्वेस्टमेंट बैंक नोमुरा का मानना है कि मार्च में होने वाली फेड मीटिंग में यूएस फेड ब्याज दरों में 50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। नोमुरा ने यह भी कहा है कि ब्याज दरों में तेजी से होने वाली बढ़ोतरी की वजह से भारत जैसे उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी निकासी में और तेजी आ सकती है। अक्टूबर से अब तक विदेशी निवेशकों ने भारत के बाजार से करीब 1 लाख करोड़ रुपये की निकासी कर ली है।
इसके साथ ही यूएस डॉलर इंडेक्स में आई मजबूती की वजह से भी भारत से विदेशी पैसे की निकासी बढ़ी है। Jerome Powell के 26 जनवरी के बयान के बाद से डॉलर इंडेक्स 26 जनवरी को करीब 1 फीसदी मजबूत हो गया। जेपी मॉर्गन इंडिया की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक Nifty 50 इंडेक्स और यूएस डॉलर इंडेक्स के बीच एक नकारात्मक सह-संबंध है। यूएस सेंट्रल बैंक के कल की कमेंट्री के प्रभाव के अलावा कुछ और भी कारण है जो भारतीय बाजार पर दबाव बना रहे हैं। आइए डालते हैं इन पर एक नजर।
रूस और यूक्रेन के बीच तनाव बढ़ने से कच्चा तेल 7 साल की ऊंचाई पर दिख रहा है। ब्रेंट का भाव फिर 90 डॉलर के पास पहुंच गया है।
यूक्रेन और रूस के बीच बढ़ते तनाव के कारण अमेरिका सहित तमाम नाटो देश रूस के खिलाफ खड़े नजर आ रहे है। रूस ने यूक्रेन से लगी अपनी सीमा पर 1 लाख से ज्यादा सैनिक इक्टठा कर लिएं है जिससे यूक्रेन पर रूस के आक्रमण का खतरा बढ़ता नजर आ रहा है। नाटो देश और अमेरिका ने रूस को धमकी दी है कि अगर वह आक्रमक रवैया नहीं छोड़ता है तो उसपर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाएंगे। इस सबकी वजह से क्रूड की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
बजट के पहले की अनिश्चितता
यूनियन बजट के पहले बाजार में घबराहट दिखाई दे रही है। बाजार में इस तरह की अफवाहें है कि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स में रिवीजन हो सकता है। बता दें कि वर्तमान में सरकार इक्विटी इन्वेस्टमेंट पर 10 फीसदी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लेती है।
तीसरी तिमाही के नतीजों में किसी पॉजिटीव सरप्राइस का अभाव
दिसंबर तिमाही के नतीजे अभी तक निवेशकों को खुश करने में सफल नहीं रहे हैं। कंपनियों की कमाई उम्मीद के आसपास ही रही है। लेकिन कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण इनके मार्जिन पर प्रभाव देखने को मिला है जिससे एनालिस्ट अगले वित्त वर्ष के मुनाफे के अनुमान में कटौती करते नजर आ रहे हैं।