कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी के एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसीडेंट और फंड मैनेजर देवेंद्र सिंघल ने मनीकंट्रोल के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि चौथी तिमाही में अब तक आए कंपनियों के नतीजों और उनके मैनेजमेंट की कमेंट्री से संकेत मिलता है कि मार्जिन पर दबाव का सबसे बुरा दौर बीत चुका है। कंपनियों को कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और वेतन बढ़ोतरी ( खास कर आईटी इंडस्ट्री में) को दबाव से निजात मिल रही। इसके चलते आगे हमें कंपनियों का मार्जिन ओर बेहतर होता दिखेगा।
इक्विटी फंड प्रबंधन और रिसर्च में दो दशकों से अधिक का अनुभव रखने वाले देवेंद्र सिंघल का कहना है कि हाल में आए कंपनियों के नतीजों और आईटी कंपनियों के मैनेजमेंट की कमेंट्री से पता चलता है कि आईटी सेक्टर के अधिकांश ग्राहक गैर जरूरी आईटी खर्च को टाल रहे हैं। ऐसे में लगता है कि आईटी सेक्टर में होने वाले निवेश में कमजोरी देखने को मिलेगा। इस सेक्टर में निवेश के लिए अभी और इंतजार करने की जरूरत है।
भारतीय बाजार इस समय फेयर वैल्यू जोन में
भारतीय इक्विटी मार्केट पर बात करते हुए देवेंद्र सिंघल ने कहा कि भारतीय इक्विटी मार्केट अक्टूबर 2021 से ही एक दायरे में घूमता रहा है और पिछली कुछ तिमाहियों में सेक्टर रोटेशन देखने को मिला है। इस अवधि के दौरान कंपनियों आय में तेजी से वृद्धि हुई है। मार्केट का वैल्यूएशन भी निश्चित रूप से उतना महंगा नहीं है जितना पहले हुआ करता था। अगर हम फॉरवर्ड अर्निंग मल्टिपल्स पर नजर डालें तो पता चलता है कि भारतीय बाजार इस समय फेयर वैल्यू जोन में है। हमें लगता है कि अगर कोई बड़ा बाहरी झटका नहीं लगता तो जल्द ही हमें बॉटम बनता दिखेगा जो मौजूदा स्तरों से दूर नहीं होगा।
अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी का दौर अभी लंबा चल सकता है
अमेरिकी आर्थिक आंकड़े मिलेजुले नजर आ रहे हैं। एक ओर आर्थिक विकास धीमा पड़ता दिख रहा है। लेकिन दूसरी ओर महंगाई अभी भी ऊंचे स्तर पर है। रोजगार के आंकड़े मजबूत हैं और मजदूरी दरें भी मजबूत हैं, जिसके चलते देश में महंगाई बढ़ती दिख रही है। ऐसे में अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी का दौर अभी लंबा चल सकता है।
बाजार पर पड़ सकता है देश की राजनीतिक गतिविधियों का असर
चालू वित्त वर्ष में इक्विटी बाजारों के लिए कौन सी हैं बड़ी चुनौतियां? इस सवाल का जवाब देते हुए देवेंद्र सिंघल ने कहा कि भारत कमोडिटी के साथ-साथ कैपिटल का भी बड़ा आयातक है। कमोडिटी की लागत में, विशेष रूप से तेल और ब्याज दरों में भारी वृद्धि हमारे समग्र आर्थिक ग्रोथ के लिए हानिकारक है। हमें इन दोनों कारकों पर कड़ी नजर रखने की जरूरत है।
देश की राजनीतिक गतिविधियों का असर भी बाजार पर पड़ सकता है। 2024 के आम चुनावों की ओर बढ़ने के साथ ही आने वाले राज्यों के चुनावों में कोई बड़ा उलटफेर भी बाजार में कुछ उतार-चढ़ाव ला सकता है।
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