भारतीय बाजार 12-18 महीनों में नई ऊंचाई पर होंगे, कोटक एएमसी के नीलेश शाह ने बताई वजह

शाह ने कहा कि अमेरिका-ईरान में टेंशन घटने से पहले तो बाजार में रिलीफ रैली दिखी है। फिर धीर-धीरे बाजार ऊपर जाएगा। उनका मानना है कि स्ट्रक्चरल इंडिया स्टोरी की बदौलत बाजार 12-18 महीनो में नई ऊंचाई पर पहुंच जाएगा

अपडेटेड Jun 17, 2026 पर 1:43 PM
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नीलेश शाह ने कहा कि बाजार ने घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) के सपोर्ट से स्ट्रेंथ दिखाई है। लेकिन, चुनौतियां अभी बनी हुई हैं।

अमेरिका-ईरान में डील से भारतीय बाजार को पंख लग गए हैं। आज यानी 17 जून को लगातार तीसरा दिन है, जब भारतीय बाजारों में अच्छी रिकवरी दिख रही है। लंबे समय बाद भारतीय बाजार में स्ट्रेंथ दिख रहा है। इससे पहले भारतीय बाजार में तेजी टिक नहीं पा रही थी। क्या इस तेजी में भारतीय बाजार नई ऊंचाई पर पहुंच सकते हैं? मनीकंट्रोल ने इस सवाल का जवाब कोटक एएमसी के एमडी नीलेश शाह से पूछा।

मार्केट के लिए चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं

शाह ने कहा कि अमेरिका-ईरान में टेंशन घटने से पहले तो बाजार में रिलीफ रैली दिखी है। फिर धीर-धीरे बाजार ऊपर जाएगा। उनका मानना है कि स्ट्रक्चरल इंडिया स्टोरी की बदौलत बाजार 12-18 महीनो में नई ऊंचाई पर पहुंच जाएगा। बाजार के दूसरी छमाही में नई ऊंचाई पर पहुंचने की गारंटी नहीं है। उन्होंने कहा कि बाजार ने घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) के सपोर्ट से स्ट्रेंथ दिखाई है। लेकिन, चुनौतियां अभी बनी हुई हैं। इनमें मानसून की सामान्य से कम बारिश, ग्रामीण इलाकों में इनफ्लेशन का रिस्क, अर्निंग्स डिलीवरी, ग्लोबल एआई/लिक्विडिटी शिफ्ट और कुछ पॉकेट्स में वैल्यूएशंस शामिल हैं।


विदेश निवेशकों की बाजार में होगी वापसी

क्या विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में लौटेंगे? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशक दूसरी छमाही में भारतीय बाजार में लौट सकते हैं। इसकी कई वजहें हैं। जियोपॉलिटिकल टेंशन कम हुआ है। ऑयल की कीमतों में स्टैबिलिटी आ रही है। रुपये को सपोर्ट मिलता दिख रहा है। विदेशी निवेशक अर्निंग्स को लेकर तस्वीर साफ होने का इंतजार करना चाहेंगे। उनकी नजरें मार्जिन को लेकर पहली और दूसरी तिमाही के गाइडेंस पर होगी। इसके अलावा वे डिमांड और एआई का असर भी देखना चाहेंगे।

क्रूड में गिरावट से भारत को होगा फायदा

अमेरिका-ईरान डील से भारत को क्या फायदा होगा? इसके जवाब में शाह ने कहा कि इससे भारत में करेंट अकाउंट डेफिसिट घटेगा। इनफ्लेशन बढ़ने का खतरा घटेगा। रुपये में स्थिरता आएगा और कंपनियों का मार्जिन इम्प्रूव हो सकता है। इससे इनवेस्टर्स की रिस्क लेने की क्षमता बढ़ेगी। भारत में घरेलू कंजम्प्शन और पूंजीगत खर्च पर किसी तरह का असर नहीं पड़ा है। लेकिन, निवेशकों को आक्रामक की जगह अनुशासित रहने की जरूरत है।

इन शेयरों में दिख रहे निवेश के मौके

किन शेयरों में निवेश के मौके दिख रहे हैं? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि बैंकों की वैल्यूएशंस ग्रोथ के लिहाज से अच्छी दिख रही है। उनके एसेट क्वालिटी में इम्प्रूवमेंट है। इंटरेस्ट रेट में कमी का संभावित फायदा उन्हें मिलेगा। खासकर सरकारी और प्राइवेट बैंकों की स्थिति डिपॉजिट के लिहाज से स्ट्रॉन्ग है। हालांकि, क्रेडिट ग्रोथ पर नजर रखनी होगी। ऑयल की कीमतों में नरमी का फायदा एविएशन, ऑटो/एफएमसीजी/पेंट्स/कंज्यूमर और ओएमसी को मिल सकता है।

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करेक्शन के मौके का इस्तेमाल खरीदारी के लिए करें

अभी निवेशकों को आपकी क्या सलाह है? उन्होंने कहा कि उन्हें एसेट ऐलोकेशन धर्म का पालन करना चाहिए। मिडकैप्स स्टॉक्स में निवेश बढ़ाया जा सकता है। जियोपॉलिटिकल टेंशन में कमी का स्वागत होना चाहिए, लेकिन लंबी अवधि में सफलता क्वालिटी बिजनेसेज की कंपाउंडिंग से मिलती है। जहां तक नए निवेशकों का सवाल है तो उन्हें करेक्शन को मौके के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए। इस दौरान डायवर्सिफिकेशन का ध्यान रखना जरूरी है।

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