निफ्टी में हेरफेर से आखिरी समय में जोरदार तेजी आई? 3 और 4 अगस्त के ट्रेड्स की जांच कर रहा SEBI

3 और 4 अगस्त के Closing Auction Session के दौरान निफ्टी में आखिरी मिनट की तेज चाल के बाद SEBI जांच में जुटा है। रेगुलेटर यह पता लगा रहा है कि क्लोजिंग प्राइस में बदलाव सामान्य था या किसी तरह के हेरफेर का नतीजा। जानिए डिटेल।

अपडेटेड Aug 10, 2026 पर 6:28 PM
एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ किसी ट्रेड से इंडेक्स ऊपर-नीचे हुआ, इससे हेरफेर साबित नहीं होता।

मार्केट रेगुलेटर SEBI 3 और 4 अगस्त को क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के दौरान हुए ट्रेड्स की जांच कर रहा है। रेगुलेटर यह पता लगाना चाहता है कि कहीं क्लोजिंग प्राइस या इंडेक्स में हेरफेर तो नहीं किया गया। मामले से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी है।

सूत्रों के मुताबिक, SEBI ने दोनों दिनों का ट्रेडिंग डेटा स्टॉक एक्सचेंजों से मांगा था। एक्सचेंज डेटा दे चुके हैं। अब नियामक उसकी जांच कर रहा है।

क्या देख रहा है SEBI?


SEBI यह समझना चाहता है कि CAS शुरू होने से पहले और उसके बाद इंडेक्स में जो बड़ा अंतर दिखा, वह सामान्य था या किसी ने जानबूझकर क्लोजिंग प्राइस को प्रभावित किया।

3 अगस्त को CAS के पहले दिन निफ्टी 3:28 बजे करीब 24,573 पर था। सिर्फ दो मिनट में यह 201 अंक उछलकर 24,774 पर पहुंच गया।

इसी तरह 4 अगस्त को 3 बजे निफ्टी 24,463 के आसपास था। 3:15 बजे तक यह 152 अंक चढ़कर 24,615 पर पहुंच गया। इन तेज बदलावों के बाद बाजार में सवाल उठने लगे।

हेरफेर की आशंका क्यों?

बाजार के जानकारों का कहना है कि CAS के दौरान ट्रेडिंग कम होती है। ऐसे में कम कारोबार वाले शेयरों या इंडेक्स में बड़ी खरीद-बिक्री करके क्लोजिंग प्राइस को प्रभावित करना आसान हो सकता है।

उदाहरण के लिए, कोई बड़ा निवेशक पहले इंडेक्स में पोजिशन बना सकता है। फिर CAS के दौरान बड़ी खरीदारी करके इंडेक्स को ऊपर धकेलने की कोशिश कर सकता है। एक्सपायरी वाले दिन ऐसा जोखिम और बढ़ सकता है।

लेकिन साबित करना आसान नहीं

एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ किसी ट्रेड से इंडेक्स ऊपर-नीचे हुआ, इससे हेरफेर साबित नहीं होता। SEBI को यह भी दिखाना होगा कि क्लोजिंग प्राइस को प्रभावित करने की मंशा थी और इसमें एक से ज्यादा पक्ष शामिल थे।

SEBI ने क्या कदम उठाए?

SEBI ने ब्रोकरों से कहा है कि वे रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ाएं। साथ ही अपने ट्रेडिंग ऐप पर Indicative Price को साफ तौर पर दिखाएं।

सूत्रों का कहना है कि यह निगरानी पहले से तय योजना का हिस्सा है। इसका मकसद सामान्य निवेशकों को रोकना नहीं, बल्कि बाजार में निष्पक्ष और व्यवस्थित कारोबार सुनिश्चित करना है।

Closing Auction Session (CAS) क्या है?

Closing Auction Session यानी CAS शेयर बाजार में 3:15 बजे से 3:30 बजे तक चलने वाली 15 मिनट की प्रक्रिया है। इस दौरान खरीद और बिक्री के ऑर्डर मिलाए जाते हैं। फिर ऐसा क्लोजिंग प्राइस तय होता है, जिस पर सबसे ज्यादा ट्रेड हो सकें।

SEBI ने यह व्यवस्था इसलिए लागू की है ताकि क्लोजिंग प्राइस ज्यादा सटीक और पारदर्शी हो। साथ ही क्लोजिंग के समय हेरफेर की गुंजाइश कम हो और भारतीय शेयर बाजार वैश्विक मानकों के और करीब पहुंचे।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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