OMC Stocks: घरेलू स्टॉक मार्केट में सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) की उठा-पटक के बीच तेल बेचने वाली सरकारी कंपनियों इंडियन ऑयल, हिंद पेट्रो और भारत पेट्रोलियम के शेयर धड़ाम हो गए। इनके शेयरों पर घरेलू ब्रोकरेज फर्म कोटक इंस्टीट्यूशनल की रिपोर्ट ने दबाव बनाया जिसने इनके टारगेट प्राइस में कटौती की है। इसने निवेशकों का सेंटिमेंट प्रभावित किया और ये 1% से अधिक टूट गए। आज बीएसई पर इंडियन ऑयल के शेयर बीएसई पर 1.71% की गिरावट के साथ ₹146.65 (Indian Oil Share Price), हिंद पेट्रो के शेयर 2.36% की फिसलन के साथ ₹346.20 (Hind Petro Share Price) और भारत पेट्रोलियम के शेयर 1.16% की गिरावट के साथ ₹299.90 (Bharat Petroleum Share Price) पर बंद हुए हैं। इंडियन ऑयल के शेयर आज इंट्रा-डे में 2.51% टूटकर ₹145.45 , बीपीसीएल के शेयर 2.21% फिसलकर ₹298.20 और एचपीसीएल के शेयर 4.03% गिरकर ₹340.25 तक आ गए थे।
Indian Oil, Hind Petro और BPCL का अब क्या है टारगेट प्राइस?
17 मार्च को अपने नोट में घरेलू ब्रोकरेज फर्म ने इंडियन ऑयल, हिंद पेट्रो और बीपीसीएल को फिर से सेल रेटिंग दी है। ब्रोकरेज फर्म ने इंडियन ऑयल के टारगेट प्राइस को 20% घटाकर ₹125 से ₹100 कर दिया है तो भारत पेट्रोलियम का टारगेट प्राइस भी 20% कम करके ₹300 से ₹240 कर दिया। हिंद पेट्रो के टारगेट प्राइस में अधिक कटौती है और इसे ₹335 से करीब 30% घटाकर ₹235 कर दिया है।
ब्रोकरेज फर्म ने क्यों अपना बेयरेश रुझान?
अपनी ब्रोकरेज रिपोर्ट में कोटक इंस्टीट्यूशनल ने वित्त वर्ष 2027 के लिए कच्चे तेल की कीमतों का अपना अनुमान बढ़ाकर प्रति बैरल $85 और वित्त वर्ष 2028 के लिए प्रति बैरल $75 कर दिया है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रही लड़ाई और होर्मुज स्ट्रेट में रुकावटों के चलते अगले वित्त वर्ष में तेल की कीमतों में उछाल का रिस्क बढ़ गया है।
कोटक ने अपने नोट में कहा है कि पेट्रोल और डीजल के भाव तय करने की स्वतंत्रता न होने, तेल कंपनियों को कच्चे तेल, माल ढुलाई और इंश्योरेंस पर खर्च में बढ़ोतरी को खुद झेलना होगा। ब्रोकरेज फर्म का यह भी कहना है कि एलपीजी की कमी के निगेटिव पब्लिक सेंटिमेंट बना दिया है जिसने तेल कंपनियों के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाना बहुत मुश्किल कर दिया है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में देश की तेल कंपनियों को बढ़े हुए मार्केटिंग मार्जिन से फायदा मिला है लेकिन आने वाले समय में कमजोर कमाई से यह फायदा कम हो जाएगा। वैसे ब्रोकरेज फर्म को उम्मीद है कि पश्चिमी एशिया में चल रही लड़ाई के खत्म होने पर तेल कंपनियां नए कैपेक्स का ऐलान कर सकती हैं।
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