Get App

Indian Rupee: रुपया गिरकर 95.25 पर, कच्चे तेल और ग्लोबल मार्केट क्यों है अहम

Indian Rupee: रुपये पर ग्लोबल मार्केट में रिस्क से बचने की व्यापक प्रवृत्ति का भी दबाव है। अमेरिका का 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 2023 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जबकि घरेलू शेयर बाजार में कमजोरी और विदेशी निवेशकों की निकासी ने भी करेंसी पर दबाव बढ़ाया है

Edited By: Sujata Yadavअपडेटेड Sep 10, 2026 पर 9:32 AM
Indian Rupee: रुपया गिरकर 95.25 पर, कच्चे तेल और ग्लोबल मार्केट क्यों है अहम
पिछले दो सेशन में रुपया लगभग 0.7% कमजोर हुआ है। हालिया गिरावट से पता चलता है कि तेल की ऊंची कीमतों का असर अब ज्यादा साफ दिख रहा है

Indian Rupee: गुरुवार (10 सितंबर) को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 15 पैसे कमजोर होकर 95.25 पर खुला, जबकि बुधवार (9 सितंबर) को यह 95.10 पर बंद हुआ था। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और ग्लोबल मार्केट में रिस्क से बचने की प्रवृत्ति (risk aversion) का करेंसी पर दबाव बना हुआ है।

पिछले दो सेशन में रुपया लगभग 0.7% कमजोर हुआ है। हालिया गिरावट से पता चलता है कि तेल की ऊंची कीमतों का असर अब ज्यादा साफ दिख रहा है, जबकि हाल के हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद रुपया काफी हद तक स्थिर बना हुआ था।

गुरुवार (10 सितंबर) को अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और तेल की सप्लाई में रुकावट की चिंताओं के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत $100 प्रति बैरल से ऊपर बनी रही। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, इसलिए तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से देश का इंपोर्ट बिल और डॉलर की मांग बढ़ सकती है, जिससे रुपये पर दबाव पड़ेगा।

RBI के दखल से कुछ राहत

सब समाचार

+ और भी पढ़ें