महंगे हो चुके बाजार में ऊपरी स्तरों पर बिकवाली संभव, अब जेब में डाल लें कुछ मुनाफा

CNBC-TV18 से बात करते हुए कोटक महिंद्रा असेट मैनेजमेंट के नीलेश शाह ने भी 22 अगस्त को कहा कि भारतीय बाजार इस समय दूसरे उभरते बाजारों की तुलना में काफी महंगे नजर आ रहे हैं

अपडेटेड Aug 22, 2022 पर 12:32 PM
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IIFL Securities का कहना है कि बाजार की इस रैली को अपनी पोजिशन को हल्का करने के लिए इस्तेमाल करें क्योंकि बाजार में अब हमें ऊपरी स्तर पर कुछ दबाव देखने को मिल सकता है

इसी साल जून के मध्य में 52 वीक लो छूने के बाद घरेलू बेंचमार्क इक्विटी इंडेक्सों में 17 फीसदी की तेजी आ चुकी है। इस तेजी के चलते दूसरे उभरते बाजारों (इमर्जिंग मार्केट) की तुलना में भारतीय बाजार काफी महंगा हो गया है। इस समय किसी विदेशी निवेशक को MSCI India index को ट्रैक करने वाले किसी ETF (exchange-traded fund) को खरीदने के लिए MSCI Emerging Market index को ट्रैक करने वाले ETF की तुलना में दोगुने पैसे का भुगतान करना होगा।

इस समय MSCI India index, MSCI इमर्जिंग मार्केट इंडेक्स की तुलना में 103 फीसदी प्रीमियम पर नजर आ रहा है। ये आंकड़े Bloomberg के विवरण पर आधारित हैं। इतिहास पर नजर डालें तो भारतीय इक्विटी मार्केट अपने इमर्जिंग मार्केट समकक्षों पर इस तरह का हाई प्रीमियम लंबे समय तक बनाए रखने में कामयाब नहीं रहे हैं।

इसी साल जनवरी में MSCI इंडिया इंडेक्स, MSCI इमर्जिंग मार्केट इंडेक्स की तुलना में 109 फीसदी प्रीमियम पर चला गया था। उसके लगभग 5 महीने बाद MSCI इंडिया इंडेक्स अपने 1 साल के निचले स्तर पर फिसल गया। बाजार जानकारों का कहना है कि भारतीय इक्विटी मार्केट का वैल्यूएशन विदेशी निवेशकों के बीच एक बड़ा मुद्दा होगा। इस समय निफ्टी और सेंसेक्स अपने लॉन्ग टर्म 1 ईयर फॉरवर्ड प्राइस- टू-अर्निंग रेशियो (PE)के ऊपर नजर आ रहे हैं।


CNBC-TV18 से बात करते हुए कोटक महिंद्रा असेट मैनेजमेंट के नीलेश शाह ने भी 22 अगस्त को कहा कि भारतीय बाजार इस समय दूसरे उभरते बाजारों की तुलना में काफी प्रीमियम पर (महंगे) नजर आ रहे हैं। ऐसे में बाजार में नियर टर्म में करेक्शन देखने को मिल सकता है। बाजार जानकारों का यह भी कहना है कि आरबीआई सहित दुनिया भर के सेंट्रल बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर विराम का कोई संकेत नहीं दे रहे हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए वैल्यूएशन अब काफी अहम हो सकता है।

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जानकारों का यह भी कहना है कि MSCI इंडिया इंडेक्स अपने लॉन्ग टर्म फॉरवर्ड PE रेशियो से करीब 28 फीसद प्रीमियम पर नजर आ रहा है। जबकि निफ्टी 18000 के आसपास घूम रहा है। ऐसे में अब निवेशकों को यह बहुत सोच समझकर तय करना होगा कि वे अपने निवेश को बढ़ाना चाहते हैं या फिर वे कुछ मुनाफावसूली करना चाहते हैं।

IIFL Securities का कहना है कि अगर निफ्टी के टेक्विकल चार्ट पर नजर डालें तो अब यह अपने लॉन्ग टर्म डाउनवर्ड स्लोपिंग ट्रेंडलाइन रजिस्टेंस के करीब पहुंच गया है। ऐसे में निवेशकों को सलाह होगी कि वे बाजार की इस रैली को अपनी पोजिशन को हल्का करने के लिए इस्तेमाल करें क्योंकि बाजार में अब हमें ऊपरी स्तर पर कुछ दबाव देखने को मिल सकता है।

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