IndusInd Bank: 25 अक्टूबर को 19% टूटने के बाद क्या इंडसइंड बैंक के शेयरों में खरीदारी का मौका है?

इंडसइंड बैंक के दूसरी तिमाही के नतीजे अच्छे नहीं हैं। क्रेडिट ग्रोथ साल दर साल आधार पर 13.2 फीसदी रही, जबकि तिमाही दर तिमाही आधार पर 2.7 फीसदी रही। माइक्रोफाइनेंस सेगमेंट में प्रदर्शन कमजोर रहा। बैंक के मैनेजमेंट का मानना है कि जब तक एमएफआई बुक में ग्रोथ नहीं दिखती, बैंक का प्रदर्शन कमजोर बना रह सकता है

अपडेटेड Oct 25, 2024 पर 4:46 PM
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इंडसइंड बैंक का कुल GNPA 2.11 फीसदी रहा, जबकि NPA 0.64 फीसदी रहा। इसमें तिमाही दर तिमाही आधार पर बदलाव नहीं है।
     
     
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    इंडसइंड बैंक का स्टॉक 25 अक्टूबर को 19 फीसदा फिसला। इसकी वजह बैंक के दूसरी तिमाही के नतीजे हैं। बैंक का प्रदर्शन सितंबर तिमाही में कमजोर रहा। क्रेडिट ग्रोथ साल दर साल आधार पर 13.2 फीसदी रही, जबकि तिमाही दर तिमाही आधार पर 2.7 फीसदी रही। माइक्रोफाइनेंस सेगमेंट में प्रदर्शन कमजोर रहा। बैंक के मैनेजमेंट का मानना है कि जब तक एमएफआई बुक में ग्रोथ नहीं दिखती, बैंक का प्रदर्शन कमजोर बना रह सकता है।

    क्रेडिट ग्रोथ के मुकाबले डिपॉजिट ग्रोथ ज्यादा

    हालांकि, IndusInd Bank की डिपॉजिट ग्रोथ अच्छी रही। यह क्रेडिट ग्रोथ से ज्यादा है, जिससे क्रेडिट-डिपॉजिट (CD) रेशियो घटा है। रिटेल डिपॉजिट की ग्रोथ तिमाही दर तिमाही आधार पर 4.4 फीसदी रही। इससे कुल डिपॉजिट में रिटेल डिपॉजिट की हिस्सेदारी बढ़कर 44.1 फीसदी पहुंच गई। आगे अगर क्रेडिट ग्रोथ नहीं बढ़ती है तो बैंक डिपॉजिट ग्रोथ घटाने की कोशिश कर सकता है। बैंक के इंटरेस्ट मार्जिन में गिरावट आई है, जिसकी वजह लेंडिंग यील्ड में कमी हो सकती है। सीडी रेशियो घटने का असर भी मार्जिन पर पड़ा है।


    माइक्रोफाइनेंस सेगमेंट में बेहतर प्रदर्शन जरूरी 

    कॉस्ट फंड में स्थिरता आ रही है, लेकिन यील्ड बढ़ाने में बैंक की नाकामी का मतलब है कि मार्जिन पर तब तक दबाव रह सकता है, जब तक माइक्रोफाइनेंस सेगमेंट में दिक्कतें खत्म नहीं होती हैं। फीस इनकम के मामले में भी प्रदर्शन कमजोर रहा। ट्रेडिंग से प्रॉफिट भी कम रही। इंटरेस्ट और नॉन-इंटरेस्ट इनकम में सुस्ती का असर कॉस्ट टू इनकम रेशियो पर पड़ा। तिमाही दर तिमाही आधार पर यह 49.7 फीसदी से बढ़कर 52.2 फीसदी हो गई।

    525 करोड़ रुपये का बफर बनाने पर सवाल

    बैंकों के लिए कंटिंजेंसी बफर बनाना नई बात नहीं है। आम तौर पर बैंक तब यह बफर बनाते हैं जब उन्हें बहुत ज्यादा प्रॉफिट हुआ होता है या कुल मिलाकर सबकुछ अच्छा चल रहा होता है। लेकिन, ऐसे समय 525 करोड़ रुपये के बफर बनाने पर सवाल खड़े होते हैं, जब बैंक का तिमाही प्रदर्शन अच्छा नहीं है। इंडसइंड बैंक का कुल GNPA 2.11 फीसदी रहा, जबकि NPA 0.64 फीसदी रहा। इसमें तिमाही दर तिमाही आधार पर बदलाव नहीं है। प्रोविजन कवर 72 फीसदी है। कंटिंजेंसी प्रोविजन को छोड़ दिया जाए तो दूसरी तिमाही में क्रेडिट कॉस्ट 131 बेसिस प्वाइंट्स रही, जो बैंक के 110-130 बेसिस प्वाइंट्स के गाइडेंस के करीब है।

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    क्या आपको निवेश करना चाहिए?

    IndusInd Bank के शेयरों में गिरावट से इसकी वैल्यूएशन अट्रैक्टिव हो गई है। हालांकि, निवेशकों को यह बात ध्यान में रखनी होगी कि इस स्टॉक को लेकर सेंटिमेंट में तब तक बदलाव नहीं आएगा जब तक माइक्रो फाइनेंस (MFI) सेगमेंट में क्राइसिस कम नहीं हो जाती। जब तक एमएफआई सेगमेंट में लेंडिंग रफ्तार नहीं पकड़ेगी तब तक अर्निंग्स में इम्प्रूवमेंट नहीं दिखेगा। हालांकि, शेयरों में 25 अक्टूबर को आई गिरावट के बाद इसके और नीचे जाने की ज्यादा आशंका नहीं है। यह 5 फीसदी से ज्यादा और नहीं गिरेगा। लेकिन, बैंक के शेयरों में तेजी के लिए लंबा इतंजार करना पड़ सकता है। जो निवेशक रिस्क ले सकते हैं, वे इस स्टॉक में धीरे-धीरे निवेश बढ़ा सकते हैं।

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