2022 में बाजार को गिरा सकती है महंगाई, फिस्कल डेफिसिट और कोरोना की तिकड़ी: Zerodha के को-फाउंडर निखिल कामत

निखिल कामत ने कहा, "आज की तारीख में रिस्क-फ्री-बॉन्ड, सेविंग्स अकाउंट या फिक्सड डिपॉजिट पर मिलने वाला रिटर्न महंगाई को एडजस्ट करने पर नकारात्मक में है।"

अपडेटेड Jan 04, 2022 पर 9:21 PM
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जीरोधा और ट्रू बीकन के को-फाउंडर निखिल कामत (फाइल फोटो)

जीरोधा (Zerodha) और ट्रू बीकन (True Beacon) के को-फाउंडर निखिल कामत (Nikhil Kamath) का मानना है स्टॉक मार्केट का वैल्यूएशन थोड़ा महंगा है और साल 2022 में महंगाई, राजकोषीय घाटा और कोरोना की तीसरी लहर सहित कई ऐसे खतरे हैं, जिनसे स्टॉक मार्केट में गिरावट देखने को मिल सकती है।

लाइव मिंट के साथ एक बातचीत में निखिल कामत ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि बाजार का मौजूदा वैल्यूएशन वाजिब है। यह जरूर है कि बहुत सारी मोमेंटम और कैपिटल शेयर बाजारों में निवेश के लिए रास्ता तलाश रही है। लेकिन फिर मैं सावधानी बरतने के पक्ष में हूं। मेरा मानना ​​है कि बाजार जितना होना चाहिए उससे थोड़ा अधिक महंगा है।"

यह पूछे जाने पर कि वह 2002 में मार्केट के लिए क्या बड़ा खतरा देखते हैं? कामत ने कहा, "महंगाई सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में एक बड़ा मुद्दा है। अगर आप आज की तारीख में रिस्क-फ्री-बॉन्ड खरीदते हैं या सेविंग अकाउंट में पैसे जमा करते हैं या फिक्सड डिपॉजिट लेते हैं, तो महंगाई को एडजस्ट करने पर वास्तविक रिटर्न नकारात्मक में है। इसकी वजह से पिछले एक या दो वर्षों में बहुत सारा पैसा शेयर मार्केट में लगा है। RBI के पास एक ही उपाय है कि वह ब्याज दरों को बढ़ाए और उन्हें जल्द ही किसी न किसी बिंदु पर इसे शुरू करना होगा। ऐसा करते ही, पहले से खराब दिख रही NPA की तस्वीर शायद और तेजी से बिगड़ सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि हम अभी-अभी कोविड से बाहर आए हैं। मुझे लगता है कि यह बाजार के लिए पहला बड़ा जोखिम है।"


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कामत ने आगे कहा, "बाजार के लिए दूसरा खतरा फिस्कल डेफिसिट यानी राजकोषीय घाटे का है। ऐसा लगता है कि कोई भी इसे उस तरीके से नहीं देख रहा है जैसा उन्हें देखना चाहिए। पिछले महीने हमारा फिस्कल डेफिसिट 15 अरब डॉलर का था, जो पिछले करीब 14-15 महीनों का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। एक देश के रूप में हमारा नेट रिजर्व करीब 600 अरब डॉलर है। लेकिन अगर आप हर महीने इसी तरह 15 अरब डॉलर के घाटे में रहे, तो जल्द ही यह 600 अरब डॉलर का नेट रिजर्व खत्म हो सकता है। मुझे लगता है कि यह एक सिस्टमैटिक जोखिम है, जिस पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है।"

जीरोधा के को-फाउंडर ने आगे कहा, "मुझे तीसरा खतरा कोरोना महामारी लगता है। एक बार फिर से इसके मामले बढ़ते दिख रहे हैं। मुझे नहीं पता कि अगली लहर आने में कितना समय है। शायद जनवरी, फरवरी या मार्च जब भी यह आएगा, तो हमारी अर्थव्यस्था की रफ्तार फिर से सुस्त हो जाएगी। मुझे नहीं लगता कि हमने सभी जोखिमों का सटीक अध्ययन कर लिया है।"

निखिल कामत ने कहा, "मुझे लगता है कि साल 2022 एक दिलचस्प साल होगा। लेकिन मुझे नहीं लगता हमें बाजार में पिछले साल जो बेतहाशा बुल रन देखने को मिली थी, वह इस साल भी मिलेगी।"

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