Investment Strategy: बाजार में लौटी तेजी, एकमुश्त निवेश करें या STP का लें सहारा?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि मध्यपूर्व में अस्थायी सीजफायर से भले ही टेंशन कम हुआ है, लेकिन अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है। ऐसे में निवेशकों को निवेश में सावधानी बरतने की जरूरत है। छोटी से गलती से उन्हें बड़ा नुकसान हो सकता है

अपडेटेड Apr 11, 2026 पर 12:48 PM
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एक्सपर्ट्स का कहना है क्रूड में उछाल का असर इनफ्लेशन पर पड़ेगा। इससे कंपनियों का मार्जिन घट सकता है।

मध्यपूर्व में तनाव घटने से भारतीय शेयर बाजारों में एक बार फिर रौनक लौट आई है। निवेशकों के मन में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह निवेश करने का सही समय है? CNBC-आवाज पर लक्ष्मण रॉय के साथ हुई खास चर्चा में एक्सपर्ट्स ने बताए कि निवेशकों को अभी क्या करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भले ही बाजार में रिकवरी दिख रही है, लेकिन निवेश में सावधानी बरतना अब भी जरूरी है।

एकमुश्त निवेश या धीरे-धीरे पैसे लगाएं?

मिहिर बोरा (Mihir Vora) ने कहा कि अगर आपका नजरिया 3 से 5 साल का है, तो यह एक बेहतरीन 'एंट्री लेवल' है। बाजार में प्राइस, टाइम और करेंसी तीनों स्तरों पर करेक्शन हो चुका है। जब सेंटीमेंट सबसे ज्यादा नकारात्मक होता है, तभी पैसा बनाने का सबसे अच्छा मौका होता है। उन्होंने कहा कि एकमुश्त निवेश करने के बजाय अगले 1-2 महीनों में पैसा धीरे-धीरे (Staggered manner) लगाएं। जो निवेशक खुद फैसला नहीं ले पा रहे, वे फ्लेक्सी कैप या मल्टीकैप फंड चुन सकते हैं।


सुनील सुब्रमण्यम (Sunil Subramaniam) ने'डेली एसटीपी' (Daily STP) का सुझाव दिया। उनके अनुसार, निवेशक अपना पैसा लिक्विड या आर्बिट्राज फंड में डालें और अगले 45 दिनों के लिए डेली एसटीपी लगा दें। इससे बाजार की अस्थिरता का फायदा मिलेगा और एवरेजिंग बेहतर होगी।

जसप्रीत सिंह (Jaspreet Singh) ने कहा कि आक्रामक निवेशकों के लिए 2-4 हफ्ते और कंजर्वेटिव निवेशकों के लिए 2-4 महीने का स्टैगरिंग पीरियड सही रहेगा। इसका मतलब है कि निवेशकों को एक बार में पूरा पैसा निवेश करने की जगह थोड़ा-थोड़ा निवेश करना ठीक रहेगा।

किन सेक्टर्स में है कमाई का मौका?

सुनील सुब्रमण्यम ने अग्रेसिव निवेशकों के लिए तीन सेक्टर फंड्स का सुझाव दिया है—50% बैंकिंग, 25% कंजम्पशन और 25% इंफ्रास्ट्रक्चर फंड। मिहिर बोरा कैपिटल गुड्स पर ज्यादा पॉजिटिव हैं। उनका मानना है कि ऑटो सेक्टर में शॉर्ट टर्म में कुछ दबाव दिख सकता है, लेकिन कैपिटल गुड्स में लॉन्ग टर्म स्टोरी और सरकार का फोकस (विशेषकर पावर सेक्टर पर) काफी मजबूत है। मॉडरेट रिस्क लेने वालों के लिए मल्टी एसेट एलोकेशन फंड बेहतर हैं, क्योंकि वहां गोल्ड और सिल्वर का भी एक्सपोजर मिलता है।

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अभी सावधानी बरतने की सलाह

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भले ही युद्ध रुक गया हो, लेकिन इसका असर आने वाले नतीजों और कंपनियों के 'गाइडेंस' पर दिखेगा। जसप्रीत सिंह के अनुसार, डीजल और गैस की बढ़ती कीमतों का असर मार्जिन पर पड़ेगा। आने वाले समय में महंगाई (Inflation) 2% से बढ़कर 4% तक जा सकती है, जिस पर नजर रखना जरूरी है। बाजार का ध्यान अब सिर्फ तिमाही नतीजों पर नहीं, बल्कि भविष्य के लिए कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले गाइडेंस पर होगा।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल हिंदी कोई निवेश सलाह नहीं दे रहा है। शेयर बाजार जोखिमों के अधीन है। यहाँ निवेश के लिए आपको सेबी (SEBI) रजिस्टर्ड एक्सपर्ट्स की सलाह लेनी चाहिए। किसी भी निवेश से पहले स्वयं शोध करना अनिवार्य है।

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