FMCG Index: शेयर बाजार में जारी चौतरफा गिरावट के बीच निवेशकों ने अब डिफेंसिव शेयरों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। इसके चलते फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCGs) सेक्टर के शेयरों में आज 13 मार्च को अच्छी खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी FMCG इंडेक्स आज हरे निशान में कारोबार करने वाला इकलौता शेयर रहा। वहीं बाकी सभी सेक्टरों के इंडेक्स में गिरावट देखने को मिली।
Tata Consumer और HUL में तेजी
FMCG कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) के शेयर लगभग 3 प्रतिशत तक उछल गए। बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच निवेशक अब सुरक्षित और स्थिर कमाई वाले सेक्टरों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे FMCG कंपनियों में निवेश बढ़ा।
हालांकि एनालिस्ट्स का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव FMCG कंपनियों के मार्जिन पर दबाव डाल सकता है। चॉइस इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने एक रिपोर्ट में बताया कि कच्चे तेल और उससे बनने वाले उत्पाद कई FMCG कंपनियों के लिए काफी अहम कच्चा माल हैं।
खासतौर पर ब्यूटी और पर्सनल केयर सेगमेंट में कच्चे तेल से जुड़े डेरिवेटिव्स कुल कच्चे माल की लागत का लगभग 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। वहीं फूड आइटम्स बनाने वाली FMCG कंपनियों में यह हिस्सा लगभग 10 से 15 प्रतिशत के आसपास रहता है।
ब्रोकरेज के अनुसार अगर कच्चे तेल की कीमतें 100 से 130 डॉलर प्रति बैरल के बीच पहुंचती हैं, तो ब्यूटी और पर्सनल केयर कंपनियों के ग्रॉस मार्जिन पर 100 से 250 बेसिस पॉइंट तक का असर पड़ सकता है।
कीमतें बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है
लागत बढ़ने की स्थिति में कंपनियों को अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि कंपनियां लागत के दबाव को कम करने के लिए हाई सिंगल डिजिट से लेकर लो डबल डिजिट तक कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं। हालांकि कीमत बढ़ाने से निकट अवधि में मांग पर असर पड़ सकता है और पिछले कुछ तिमाहियों में दिखी वॉल्यूम रिकवरी कमजोर पड़ सकती है।
फूड प्रोडक्ट्स बनाने वाली FMCG कंपनियों पर कच्चे तेल की कीमतों का असर तुलनात्मक कम माना जा रहा है। इन कंपनियों के लिए मुख्य कच्चा माल पाम ऑयल है, जिसकी कीमतें फिलहाल थोड़ी स्थिर बनी हुई हैं।
एक्सिस सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के अनुसार FMCG सेक्टर में मांग धीरे-धीरे सुधरने लगी है। वित्त वर्ष 2026 की दिसंबर तिमाही के नतीजों में शहरी और ग्रामीण दोनों बाजारों में कंज्म्प्शन की भावना में सुधार के संकेत मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार कई कंपनियों ने वॉल्यूम आधारित ग्रोथ दर्ज की है, जिससे यह संकेत मिलता है कि मांग में सुधार केवल कीमतों के कारण नहीं बल्कि वास्तविक खपत बढ़ने से हो रहा है।
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