Midcap-Smallcap Crash: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार के मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। चौतरफा बिकवाली के बीच दोनों इंडेक्स करीब 2.3 प्रतिशत तक टूट गए। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स मार्च महीने में अब तक नौ कारोबारी दिन में से सात दिन गिरावट में रहा है और इस दौरान लगभग 10 प्रतिशत टूट गया है। शुक्रवार को यह इंडेक्स लगातार तीसरे दिन लाल निशान में कारोबार करता दिखा।
मिडकैप शेयरों में तेज बिकवाली
निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में नेशनल एल्युमिनियम कंपनी (NALCO) और अशोक लीलैंड सबसे बड़े गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे। NALCO का शेयर लगभग 5.3 प्रतिशत तक टूट गया, जबकि अशोक लीलैंड में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली।
निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में भी लगातार कमजोरी बनी हुई है। मार्च के नौ कारोबारी दिनों में से सात दिन यह इंडेक्स गिर चुका है और कुल मिलाकर लगभग 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज कर चुका है।
शुक्रवार को स्मॉलकैप इंडेक्स में भी लगातार तीसरे दिन गिरावट देखने को मिली। इस इंडेक्स में लॉरेस लैब्स (Laurus Labs) और डेटा पैटर्न्स (Data Patterns) के शेयर प्रमुख गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे।
सेंसेक्स-निफ्टी भी दबाव में
ब्रॉडर मार्केट की कमजोरी बेंचमार्क इंडेक्स में भी दिखाई दी। सेंसेक्स 912.58 अंक या 1.2 प्रतिशत गिरकर 75,121.84 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 314.85 अंक या 1.33 प्रतिशत टूटकर 23,324.30 पर कारोबार करता दिखा।
इस सप्ताह अब तक सेंसेक्स करीब 4.5 प्रतिशत और निफ्टी लगभग 4.8 प्रतिशत गिर चुके हैं, जो दिसंबर 2024 के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट की ओर इशारा करता है।
कच्चे तेल की कीमतों का असर
मार्केट एनालिस्ट्स के मुताबिक बाजार में कमजोरी की प्रमुख वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। ईरान की ओर से दो ऑयल टैंकरों पर हमले की खबरों के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल की सप्लाई बाधित होने की आशंका बढ़ गई है। इसके चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं और शुक्रवार को भी यह लगभग 100.5 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता रहा।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ता है। इससे आयात बिल बढ़ सकता है, चालू खाते का घाटा बढ़ सकता है और महंगाई का दबाव भी बढ़ता है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं और पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहता है, तो मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है।
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