China IPO market : लंदन से लेकर हॉन्गकॉन्ग इस साल सभी बड़े फाइनेंशियल सेंटर्स में प्राइमरी यानी आईपीओ (IPO) मार्केट में सन्नाटा छाया रहा। लेकिन चीन में इस बाजार में खासा जोश बना रहा।

China IPO market : लंदन से लेकर हॉन्गकॉन्ग इस साल सभी बड़े फाइनेंशियल सेंटर्स में प्राइमरी यानी आईपीओ (IPO) मार्केट में सन्नाटा छाया रहा। लेकिन चीन में इस बाजार में खासा जोश बना रहा।
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, चीन के मुख्य स्टॉक एक्सचेंजेस में 2022 में अभी तक 57.8 अरब डॉलर के आईपीओ आ चुके हैं जो अभी तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। जनवरी से अभी तक ऐसे 5 IPO रहे, जिन्होंने 1 अरब डॉलर से ज्यादा रकम जुटाई और जल्द ही इस साइज का एक अन्य आईपीओ मार्केट में आ रहा है। इसके उलट, न्यूयॉर्क और हॉन्गकॉन्ग में इस साइज के सिर्फ 1-1 आईपीओ ही आए हैं। वहीं लंदन में अभी तक इतना बड़ा कोई आईपीओ नहीं आया है।
चीन के बाजार का स्थानीय इनवेस्टर्स पर जोर
चीन के आईपीओ मार्केट (IPO market) ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी और अमेरिका में मंदी की आशंकाओं जैसी दिक्कतों को खारिज कर दिया, जो दुनिया में पूंजी जुटाने से जुड़ी गतिविधियों में बड़ी बाधाएं मानी जा रही हैं।
एशियाई इकोनॉमी में आईपीओ का जोर मुख्य रूप से स्थानीय इनवेस्टर्स पर है, जिसकी मौद्रिक नीति फेडरल रिजर्व से अलग है।
ग्रोथ के पटरी पर आने की उम्मीद
कुछ मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लिस्टिंग में बढ़ोतरी को इस वजह से भी सपोर्ट मिला कि बाजार को चीन की कोविड जीरो स्ट्रैटजी के चलते साल में आगे हालात बिगड़ने की आशंका थी। चीन ने इस साल लगभग 5.5 फीसदी के आधिकारिक ग्रोथ टारगेट के साथ नरमी के संकेत दिए हैं, जिससे ग्रोथ के फिर पटरी पर आने की उम्मीदों पर असर पड़ा है।
सेकेंडरी मार्केट में भी दबदबा
ब्लूमबर्ग के डाटा के मुताबिक, कंपनियों की लिस्टिंग के साथ ग्लोबल आईपीओ में चीन की हिस्सेदारी तिगुनी बढ़कर 44 फीसदी हो गई, जो 2021 के अंत में 13 फीसदी के स्तर पर थी। नए स्टॉक्स के बेहतर प्रदर्शन से भी लिस्टिंग को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं।
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