अमेरिकी शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव, एक्सपर्ट बोले- जंग लंबी खिंची, तो वैश्विक मंदी का खतरा
ईरान युद्ध और तेल की बढ़ती कीमतों ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। अमेरिकी शेयर बाजार में उतार चढ़ाव दिखा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर तनाव लंबा चला तो ऊर्जा संकट के साथ वैश्विक मंदी का खतरा बढ़ सकता है।
पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं मिलने के कारण अमेरिकी शेयर बाजार मंगलवार को लाल निशान में खुले।
पश्चिम एशिया में ईरान से जुड़ा युद्ध वैश्विक बाजारों पर भारी पड़ रहा है। तेल की कीमतों में आई तेज बढ़त ने यह डर बढ़ा दिया है कि दुनिया एक नए ऊर्जा संकट की ओर बढ़ सकती है। इसी चिंता के बीच शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिली। साथ ही प्राइवेट क्रेडिट इंडस्ट्री को लेकर बढ़ती आशंका ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
शेयर बाजार और कमोडिटी पर दबाव
पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं मिलने के कारण अमेरिकी शेयर बाजार मंगलवार को लाल निशान में खुले। Dow Jones Industrial Average में गिरावट सबसे ज्यादा रही। बाजार खुलते ही यह इंडेक्स 0.8% गिर गया। हालांकि, बाद में इसमें तगड़ी रिकवरी दिखी और यह शाम 9.10 बजे तक करीब 0.3% चढ़ गया।
वहीं S&P 500 में भी कमजोरी दिखी और यह करीब 0.6% नीचे ट्रेड करने लगा। यह भी बाद में हरे निशान में आ गया। लेकिन दूसरी ओर Nasdaq Composite भी दबाव में रहा। टेक स्टॉक्स में हल्की बिकवाली के कारण यह इंडेक्स करीब 0.5% गिर गया।
कमोडिटी बाजार में भी बड़ा उतार-चढ़ाव दिखा। ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। दूसरी तरफ सोना लगातार 10वें दिन गिरावट की ओर बढ़ रहा है। इस बीच अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर दोनों में मजबूती देखी गई।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ी चिंता
अमेरिका-इजरायल गठबंधन और ईरान के बीच संघर्ष जारी है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत चल रही है। इसी दौरान ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले कुछ कमर्शियल जहाजों से ट्रांजिट फीस लेना शुरू कर दिया है।
यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा ट्रांजिट रूट्स में से एक है। इसलिए यहां किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक ऊर्जा सप्लाई को प्रभावित कर सकती है। Miller Tabak के मैट माले के मुताबिक फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि होर्मुज जलडमरूमध्य सामान्य रूप से खुलेगा या नहीं।
उनका कहना है कि अगर इस हफ्ते के अंत में बातचीत में प्रगति की खबर आती भी है, तो उसका असर तब तक सीमित रहेगा जब तक यह समुद्री मार्ग पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाता।
प्राइवेट क्रेडिट बाजार को लेकर चिंता
मार्केट एक्सपर्ट मैट माले का कहना है कि प्राइवेट क्रेडिट बाजार की समस्याएं अभी खत्म नहीं हुई हैं। इसलिए इन जोखिमों को नजरअंदाज करना निवेशकों के लिए ठीक नहीं होगा। दरअसल यह बाजार करीब 1.8 ट्रिलियन डॉलर का है। यहां निवेशक कंपनियों को सीधे कर्ज देते हैं। लेकिन हाल के समय में इस मॉडल को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
चिंता की एक वजह यह भी है कि कई कंपनियां ऐसी हैं जिनका बिजनेस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण प्रभावित हो सकता है। अगर इन कंपनियों की कमाई घटती है, तो उनके लिए कर्ज चुकाना मुश्किल हो सकता है। इसी डर के कारण कई निवेशक अपने पैसे प्राइवेट क्रेडिट फंड्स से निकालने की कोशिश कर रहे हैं।
इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि डायरेक्ट लेंडिंग, जिसमें पैसा लंबे समय के लिए फंस सकता है, क्या उन निवेशकों के लिए सही है जिन्हें जरूरत पड़ने पर जल्दी पैसा निकालना पड़ सकता है।
तेल महंगा रहा तो बढ़ सकता है दबाव
Macquarie Group के थियरी विजमैन का कहना है कि सोमवार को बाजार में यह उम्मीद दिखी थी कि पश्चिम एशिया का युद्ध जल्दी खत्म हो सकता है। लेकिन अभी हालात देखकर लगता है कि यह उम्मीद शायद जल्दबाजी में बना ली गई थी।
उनका कहना है कि अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो दुनिया के केंद्रीय बैंक महंगाई को काबू में करने के लिए सख्त मौद्रिक नीति अपना सकते हैं। हालांकि विजमैन यह भी चेतावनी देते हैं कि जब महंगाई की वजह सप्लाई की कमी होती है, तब सख्त मौद्रिक नीति अक्सर वित्तीय बाजारों पर ज्यादा दबाव डालती है और आर्थिक तनाव बढ़ा सकती है।
संकट लंबा चला तो बढ़ेगा मंदी का खतरा
PIMCO के टिफनी वाइल्डिंग और एंड्रयू बॉल्स का कहना है कि अगर यह संकट ज्यादा समय तक नहीं चलता, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था में मध्यम गति से वृद्धि जारी रह सकती है।
लेकिन अगर यह तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो दुनिया भर में मंदी का खतरा बढ़ सकता है।
युद्ध की खबरों पर टिका बाजार
फिलहाल बाजार पूरी तरह युद्ध से जुड़ी खबरों पर नजर रखे हुए है। निवेशक हर नई जानकारी के आधार पर अपने फैसले बदल रहे हैं। Forex.com के फवाद रजाकजादा के मुताबिक ट्रेडर खास तौर पर यह देख रहे हैं कि क्या सीजफायर को लेकर बातचीत शुरू होती है या नहीं।
उनका कहना है कि जब तक कोई ठोस संकेत नहीं मिलते, तब तक बाजार में जोखिम लेने का भरोसा वापस आना मुश्किल रहेगा।
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