Israel Iran War: अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर संयुक्त हमले के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव अचानक बढ़ गया है। ऐसे हालात में निवेशक आमतौर पर सुरक्षित निवेश की तरफ भागते हैं। यही वजह है कि सोने की कीमतों में फिर से तेजी की संभावना बढ़ गई है।
Israel Iran War: अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर संयुक्त हमले के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव अचानक बढ़ गया है। ऐसे हालात में निवेशक आमतौर पर सुरक्षित निवेश की तरफ भागते हैं। यही वजह है कि सोने की कीमतों में फिर से तेजी की संभावना बढ़ गई है।
SMC Global Securities में कमोडिटी रिसर्च की AVP वंदना भारती कहती हैं कि ऐसी खबरों के तुरंत बाद सोने में तेज उछाल आना सामान्य है। निवेशक जोखिम से बचने के लिए हेजिंग करते हैं। हालांकि समय बीतने के साथ अगर तनाव कम होता है तो कीमतों में ठहराव या हल्की गिरावट भी आ सकती है। शुरुआत में तेजी अक्सर डर और सुरक्षा की भावना से चलती है, लेकिन बाद में बाजार फिर बुनियादी आर्थिक कारकों पर लौट आता है।
गोल्ड लोन में रिकॉर्ड तेजी
इस बीच एक और दिलचस्प ट्रेंड दिख रहा है। गोल्ड लोन की ग्रोथ पिछले एक साल में बेहद तेज रही है। RBI के आंकड़ों के मुताबिक 2025 के आखिर तक बकाया गोल्ड लोन सालाना आधार पर करीब 125 से 128 प्रतिशत बढ़कर 3.3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गए। जबकि कुल बैंक क्रेडिट की ग्रोथ सिंगल डिजिट में रही।
हालांकि गोल्ड लोन अभी भी कुल बैंकिंग क्रेडिट का छोटा हिस्सा हैं, लेकिन पर्सनल लोन की बढ़ोतरी में इनका योगदान काफी बड़ा रहा है।
सोने की तेजी से मिला फायदा
पिछले एक साल में सोना करीब 87 प्रतिशत और चांदी 181 प्रतिशत तक चढ़ चुकी है। सोने की इस तेजी ने गिरवी रखे जाने वाले आभूषण की वैल्यू बढ़ा दी है। इसका मतलब यह है कि लोग बिना ज्यादा सोना गिरवी रखे पहले से ज्यादा लोन ले पा रहे हैं।
साथ ही बैंकों ने अनसिक्योर्ड पर्सनल लोन पर सख्ती बढ़ाई है। इसका नतीजा यह हुआ कि उधारकर्ता सुरक्षित विकल्पों जैसे गोल्ड लोन की तरफ मुड़े हैं। अब इस सेगमेंट में LTV नियम स्पष्ट हैं और प्रोसेस ज्यादा पारदर्शी हुआ है। कई लेंडर डिजिटल प्रोसेसिंग और तेज डिस्बर्सल भी दे रहे हैं, जिससे यह फौरन नकदी जरूरतों के लिए आसान विकल्प बन गया है।
गोल्ड लोन लेने से पहले क्या समझें?
BankBazaar.com के CEO आदिल शेट्टी के मुताबिक, गोल्ड लोन लेने से पहले कुछ जरूरी बातों को समझना चाहिए। RBI लोन-टू-वैल्यू अनुपात करीब 75 प्रतिशत तक सीमित करता है। यानी सोने की पूरी बाजार कीमत के बदले आपको सिर्फ एक हिस्सा ही लोन के रूप में मिलता है।
ब्याज दर आमतौर पर 9 से 15 प्रतिशत के बीच होती है, जो अनसिक्योर्ड पर्सनल लोन से कम है। लेकिन हर लेंडर की दर और शुल्क अलग हो सकते हैं। कुल लागत लोन की अवधि और भुगतान के तरीके पर निर्भर करती है। अगर समय पर भुगतान नहीं हुआ तो गिरवी रखा सोना नीलाम हो सकता है।
कीमत गिरी तो बढ़ेगा दबाव
फाइनेंशियल सर्विसेज के एक्सपर्ट परमदीप सिंह बताते हैं कि 75 प्रतिशत LTV का मतलब है कि आपके पास बहुत बड़ा सुरक्षा मार्जिन नहीं है। अगर सोने की कीमत 5 से 10 प्रतिशत भी गिरती है तो यह मार्जिन तेजी से घट सकता है और भुगतान का दबाव बढ़ सकता है।
सोने की कीमतें सिर्फ ऊपर नहीं जातीं, नीचे भी आ सकती हैं। तेजी के समय उधारी क्षमता बढ़ती है, लेकिन गिरावट के समय वही गिरवी संपत्ति कम वैल्यू की हो जाती है।
परमदीप सिंह कहते हैं कि कई लोग गोल्ड लोन को आसान नकदी का जरिया समझ लेते हैं, लेकिन बाजार में उतार-चढ़ाव आते ही स्थिति बदल सकती है। लेंडर अपने जोखिम को सीमित रखने के लिए सख्त नियम अपनाते हैं और कीमत गिरने पर नीलामी की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ सकती है।
आर्थिक जोखिम को समझना जरूरी
आदिल शेट्टी का कहना है कि गोल्ड लोन सुविधाजनक जरूर है, लेकिन जोखिम मुक्त नहीं है। भुगतान में देरी होने पर लेंडर कानूनी नोटिस के बाद गिरवी रखे गए आभूषण की नीलामी कर सकते हैं। इससे आर्थिक नुकसान के साथ भावनात्मक नुकसान भी होता है, क्योंकि अक्सर गिरवी रखा सोना पारिवारिक संपत्ति होता है।
चूंकि उधारकर्ता को सोने की पूरी बाजार कीमत नहीं मिलती, इसलिए नकदी उतनी नहीं मिलती जितनी संपत्ति की कुल वैल्यू होती है। अगर लोन शॉर्ट टर्म या बुलेट रीपेमेंट में है और आय अनियमित है तो दबाव और बढ़ सकता है। सोने की कीमत में उतार-चढ़ाव होने पर नवीनीकरण के समय उधारी सीमा भी कम हो सकती है।
कब लेना चाहिए गोल्ड लोन?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि गोल्ड लोन तभी लेना चाहिए जब भुगतान की स्पष्ट योजना हो और अन्य कम जोखिम वाले विकल्पों पर विचार कर लिया गया हो। साथ ही यह भी देखना जरूरी है कि लोन किस काम के लिए लिया जा रहा है। आय पैदा करने वाले या उत्पादक उपयोग के लिए लिया गया लोन और उपभोग के लिए लिया गया लोन, दोनों का जोखिम अलग होता है।
सोना निश्चित रूप से मूल्य का मजबूत भंडार है। लेकिन ऊंची कीमतों पर उसे गिरवी रखकर कर्ज लेना सोच-समझकर और स्पष्ट रीपेमेंट प्लान के साथ ही करना चाहिए, भावनाओं में आकर नहीं।
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