IT Stocks : शुक्रवार को भारतीय IT शेयरों में बिकवाली का भारी दबाव देखने को मिल रहा है। एक्सेंचर द्वारा अपने रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान घटाने और कमजोर डिमांड का संकेत देने के बाद Nifty IT इंडेक्स में लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट आई। इससे ग्लोबल टेक्नोलॉजी खर्च में रिकवरी की रफ़्तार को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं। सुबह 10:20 बजे के आसपास निफ्टी IT इंडेक्स 5.8 प्रतिशत नीचे दिख रहा था। आज यह सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर इंडेक्स है।
इस बिकवाली का असर पूरे मार्केट पर पड़ा है। सेंसेक्स 704.02 अंक या 0.91 प्रतिशत गिरकर 76,705.96 पर और निफ्टी 190.70 अंक या 0.79 प्रतिशत गिरकर 23,977.30 के आसपास दिख रहा है।
लार्ज-कैप और मिड-कैप इंडेक्स में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली कंपनियों की लिस्ट में IT शेयरों का दबदबा देखने को मिल रहा है। Nifty 50 में सबसे ज्यादा गिरावट वाली पांचों कंपनियां टेक्नोलॉजी सेक्टर से हैं। इनमें इन्फोसिस सबसे गिरी है। इसके शेयर में 7.6 प्रतिशत की गिरावट आई है। टेक महिंद्रा के शेयर 6.3 प्रतिशत गिरे हैं। जबकि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में 6 प्रतिशत की गिरावट दिख रही है। HCLTech और विप्रो के शेयरों में 5.3 प्रतिशत और 3.6 प्रतिशत की गिरावट आई है।
मिड और स्मॉलकैप आईटी में भी दबाव है। BSE मिडकैप इंडेक्स पर सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाली टॉप 10 कंपनियों में 7 IT कंपनियां शामिल हैं। Mphasis के शेयर 5.4 प्रतिशत, Persistent Systems के 5 प्रतिशत और Coforge के 4.1 प्रतिशत गिरे हैं। जबकि KPIT Technologies, Tata Elxsi, Hexaware Technologies और LT Technology के शेयरों में भी भारी गिरावट आई है।
ग्लोबल टेक्नोलॉजी सर्विस कंपनी एक्सेंचर ने अपने FY26 के रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस को घटा दिया है। कंपनी का कहना है कि वेस्ट एशिया से होने वाली कमाई में गिरावट से आगे कंपनी की कमाई पर दबाव देखने को मिल सकता है। कंपनी के कमजोर गाइडेंस बाद इसके शेयरों में कल भारी गिरावट आई और भारतीय IT ADRs भी कमजोर हुए। एक्सेंचर के शेयर लगभग 18 प्रतिशत गिर गए,जबकि Infosys ADR में 9.7 प्रतिशत और Wipro ADR में 3.6 प्रतिशत की गिरावट आई।
तीसरी तिमाही में एक्सेंचर की रेवेन्यू 18.7 अरब डॉलर रही है जो काफी हद तक उम्मीदों के मुताबिक है। लेकिन क्लाइंट के खर्च को लेकर बनी लगातार अनिश्चितता और मिडिल ईस्ट में परेशानियों कारण उसने अपने सालाना ग्रोथ आउटलुक को घटा दिया है। कंपनी ने यह भी बताया है कि पिछले साल की समान अवधि की तुलना में नई बुकिंग में भी कमी आई है।
आईटी सेक्टर पर ब्रोकरेज की राय
ब्रोकरेज फर्मों का कहना है कि एक्सेंचर के गाइडेंस में कटौती का कारण डिमांड में कमजोरी का माहौल है। इस कटौती का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से कोई लेना देना नहीं है। CLSA का कहना है कि मैनेज्ड-सर्विसेज की डिमांड अच्छी बनी हुई है और कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोतरी एक अच्छा संकेत है। हालांकि कंपनी की ऑर्डर बुक में सालाना आधार 14.7 प्रतिशत की गिरावट आई है। CLSA को Infosys और Wipro के मुकाबले HCLTech ज्यादा पसंद है क्योंकि कॉस्ट-ऑप्टिमाइज़ेशन प्रोग्राम में इसकी मजबूत मौजूदगी है।
HSBC का कहना है कि Accenture के बदले हुए अनुमान से पता चलता है कि मांग की स्थिति अभी भी कमजोर है। वहीं, Nomura ने चेतावनी के लहजे में कहा है कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक उथल-पुथल से निकट भविष्य में रेवेन्यू ग्रोथ और डील एक्टिविटी पर असर पड़ सकता है।
उधर Jefferies ने इस सेक्टर पर अपना'अंडरवेट'रुख बनाए रखा है। इसका कारण अर्निंग के अनुमान में और कटौती का डर और मैक्रो-इकोनॉमिक स्थितियों व AI से जुड़े खर्च को लेकर बनी अनिश्चितता है।
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