IT Stocks Crash: आईटी शेयरों में लगातार तीसरे दिन मचा कोहराम; इंफोसिस, TCS, विप्रो 8% तक टूटे, जानें कारण

IT Stocks: आईटी कंपनियों के शेयरों में शुक्रवार 13 फरवरी को लगातार तीसरे दिन कोहराम देखने को मिला। इंफोसिस (Infosys), टीसीएस (TCS), विप्रो (Wipro), टेक महिंद्रा (Tech Mahindra) और एचसीएल टेक (HCL Tech) के शेयर शुरुआती कारोबार में 8 प्रतिशत तक टूट गए। कोफोर्ज, बिरला सॉफ्ट और परसिस्टेंट सिस्टम्स जैसी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली

अपडेटेड Feb 13, 2026 पर 10:18 AM
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IT Stocks: निफ्टी आईटी इंडेक्स शुरुआती कारोबार के दौरान 5 प्रतिशत तक लुढ़क गया

IT Stocks: आईटी कंपनियों के शेयरों में शुक्रवार 13 फरवरी को लगातार तीसरे दिन कोहराम देखने को मिला। इंफोसिस (Infosys), टीसीएस (TCS), विप्रो (Wipro), टेक महिंद्रा (Tech Mahindra) और एचसीएल टेक (HCL Tech) के शेयर शुरुआती कारोबार में 8 प्रतिशत तक टूट गए। कोफोर्ज, बिरला सॉफ्ट और परसिस्टेंट सिस्टम्स जैसी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली।

निफ्टी आईटी इंडेक्स शुरुआती कारोबार के दौरान 5 प्रतिशत तक लुढ़क गया। इससे पहले 12 फरवरी को भी इसमें 5.5% की गिरावट देखने को मिली थी। साल 2026 में अब तक आईटी सेक्टोरल इंडेक्स करीब 17.5% गिर चुका है।

आईटी कंपनियों के शेयरों में इस तगड़ी बिकवाली से सेंसेक्स और निफ्टी में भी भारी गिरावट दिखी। यह गिरावट अमेरिकी शेयर बाजारों में रातभर चली भारी बिकवाली के बाद आई है, जिससे भारतीय आईटी सेक्टर पर नेगेटिव असर पड़ा।


अमेरिकी बाजार में गिरावट का असर

अमेरिका में सूचीबद्ध इंफोसिस के एडीआर (ADR) गुरुवार रात करीब 10% तक टूट गए, जबकि विप्रो के एडीआर में लगभग 5% की गिरावट दर्ज की गई। दरअसल निवेशकों को आशंका है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इन कंपनियों के बिजनेस मॉडल को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके इस महीने की शुरुआत से ही आईटी कंपनियों के शेयरों में दबाव बना हुआ है।

हालांकि SaaS आधारित कंपनियों में गिरावट सीमित रही, लेकिन बड़ी टेक कंपनियों में तेज बिकवाली ने बैंकिंग, रियल एस्टेट और लॉजिस्टिक्स जैसे दूसरे सेक्टरों को भी प्रभावित किया। वॉल स्ट्रीट पर बढ़ती अस्थिरता का सीधा असर भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों पर पड़ा।

AI से बिजनेस मॉडल पर असर की चिंता

बाजार जानकारों के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ऑटोमेशन से भारतीय आईटी कंपनियों के पारंपरिक बिजनेस मॉडल पर दबाव बढ़ सकता है। खासकर वे कंपनियां, जिनका मॉडल श्रम-आधारित सेवाओं पर ज्यादा निर्भर है, उनके मार्जिन और बिल योग्य घंटों पर असर पड़ सकता है। इस आशंका ने निवेशकों के सेंटिमेंट पर दबाव डाला है और आईटी शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिल रही है।

ग्लोबल संकेत भी कमजोर

अमेरिका का टेक-हैवी नैस्डैक कंपोजिट इंडेक्स गुरुवार को 2% से ज्यादा गिर गया। निवेशक अब शुक्रवार को आने वाले अमेरिका के महंगाई आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, जो ब्याज दरों की भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। जनवरी में उम्मीद से बेहतर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों ने भी निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को कमजोर कर दिया है।

रिलायगेर ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजीत मिश्रा ने कहा, “आईटी शेयरों में आई तेज गिरावट ने फिलहाल बाजार में तेजी के सेंटीमेंट को कमजोर कर दिया है।” उन्होंने कहा कि ग्लोबल अस्थिरता और आईटी शेयरों में भारी बिकवाली के चलते शेयर बाजार का सेंटिमेंट कमजोर हुआ है।

मार्केट कैप पर असर

इससे पहले गुरुवार के कारोबार में भी आईटी शेयर सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले सेक्टर रहे थे। टीसीएस का मार्केट कैप ₹10 लाख करोड़ से नीचे फिसल गया, जो दिसंबर 2020 के बाद पहली बार हुआ है। इंफोसिस का बाजार पूंजीकरण भी इस सप्ताह ₹6 लाख करोड़ से नीचे चला गया।

सुबह 10 बजे के करीब, टीसीएस के शेयर 4.95% फीसदी की गिरावट के साथ 2,614.10 रुपये के भाव पर कारोबार कर रहे थे, जबकि इंफोसिस करीब 6.26 फीसदी की गिरावट के साथ ₹1,299.30 के स्तर पर कारोबार कर रहे थे। पिछले एक महीने में दोनों निफ्टी 50 हैवीवेट शेयरों में 18% से 20% तक की गिरावट आ चुकी है।

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