IT Stocks की दूसरे दिन भी पिटाई, H-1B Visa के नियमों में बदलाव पर सहमे निवेशक

IT Stocks Fall on H-1B Visa Rules Change: लगातार दूसरे कारोबारी दिन आज आईटी शेयरों में बिकवाली का दबाव दिखा। यह दबाव अमेरिका की ट्रंप सरकार के एच-1बी वीजा से जुड़े नियमों में बदलाव के चलते आया है। जानिए ट्रंप सरकार ने ऐसा क्या बदलाव किया है जो घरेलू स्टॉक मार्केट में लिस्टेड आईटी कंपनियों के निवेशक सहम उठे?

अपडेटेड Dec 24, 2025 पर 12:09 PM
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IT Stocks Fall: आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनियों इंफोसिस (Infosys), टीसीएस (TCS), टेक महिंद्रा (Tech Mahindra) और विप्रो (Wipro) जैसे आईटी शेयरों में आज लगातार दूसरे दिन बिकवाली का दबाव दिखा।

IT Stocks Fall: आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनियों इंफोसिस (Infosys), टीसीएस (TCS), टेक महिंद्रा (Tech Mahindra) और विप्रो (Wipro) जैसे आईटी शेयरों में फिर बिकवाली का दबाव दिखा। आईटी शेयरों में आज लगातार दूसरे दिन मुनाफावसूली हो रही है और इसकी वजह ये है कि एच-1बी वीजा (H-1B Visa) के सेलेक्शन प्रोसेस में ट्रंप सरकार ने बदलाव का ऐलान किया है। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने मंगलवार को यह बदलाव किया। इसका झटका आईटी शेयरों को लगा क्योंकि दिग्गज भारतीय आईटी कंपनियां अपने रेवेन्यू के बड़े हिस्से के लिए अमेरिकी मार्केट पर निर्भर हैं।

H-1B Visa को लेकर क्या बदलाव किया है ट्रंप सरकार ने?

मंगलवार को डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने H-1B वीजा के सेलेक्शन प्रोसेस में बदलाव किया है। इसमें बदलाव करते हुए रैंडम लॉटरी सिस्टम की जगह अब वेटेड सेलेक्शन प्रोसेस अपनाने का फैसला हुआ है। इस नए सिस्टम में हाई स्किल वाले और अधिक वेतन पाने वाले एंप्लॉयीज को अधिक प्राथमिकता दी जाएगी। USCIS का कहना है कि रैंडम प्रोसेस का कम वेतन वाले एंप्लॉयीज गलत इस्तेमाल कर रहे थे, जिस वजह से इसमें बदलाव किया जा रहा है जोकि अमेरिकी वर्कर्स को अधिक सुरक्षा देगा। नया प्रोसेस अगले साल 27 फरवरी, 2026 को प्रभावी होगा और वित्त वर्ष 2027 के एच-1बी कैप रजिस्ट्रेशन सीजन से लागू होगा। कुछ समय पहले ट्रंप सरकार ने एक और अहम नीति का ऐलान कर झटका दिया था जिसके तहत वीजा की फीस $1 लाख तक करने का ऐलान किया गया था।


मौजूदा और नए प्रोसेस में क्या होगा फर्क?

अभी वीजा सेलेक्शन का जो प्रोसेस है, उसमें कुल एच-1बी वीजा एप्लीकेशन में 35-40% हिस्सेदारी एंट्री लेवल एंप्लॉयीज, 35% हिस्सेदारी क्वालिफाइड एंप्लॉयीज, 15-20% हिस्सेदारी अनुभवी एंप्लॉयीज और 10% या इससे कम हिस्सेदारी हाई स्किल वाले यानी हाई सैलरी वाले की है। इसका मतलब है कि अभी लगभग 70% एच-1बी वीजा वेज लेवल 1 और 2 एंप्लॉयीज को जारी किए जाते हैं जबकि हाई स्किल और हाई सैलरी वाले एंप्लॉयीज को सिर्फ 30% वीजा मिलते हैं।

अब बदलाव के बाद की व्यवस्था की बात करें तो हर यूनिक बेनेफेशियरी को उसके पेमेंट के आधार पर सेलेक्शन पूल में कई एंट्री दी जाएगी। लेवल 4 को सबसे अधिक वेटेज मिलेगा और उन्हें सेलेक्शन पूल में कई बार शामिल किया जाएगा यानी कि इन्हें वीजा मिलने की संभावना काफी बढ़ जाएगी। वहीं लेवल 1 को कोई अतिरिक्त वेटेज नहीं मिलेगा तो इनके वीजा मिलने की संभावना काफी कम होगी।

IT Stocks के लिए क्यों झटका?

ट्रंप सरकार ने जब सितंबर महीने में वीजा की फीस को बढ़ाकर $1 लाख किया था तो इसे लेकर सोविलो इंवेस्टमेंट मैनेजर्स के फंड मैनेजर संदीप अग्रवाल ने अनुमान लगाया था कि इससे भारतीय आईटी कंपनियों के मार्जिन को 6-7% का झटका लग सकता है। अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज बेरिल होवेल ने वीजा के फीस में बढ़ोतरी को लेकर मंगलवार को कहा कि यह कानून के हिसाब से ही है। इसके साथ ही मंगलवार को जब वीजा के सेलेक्शन प्रोसेस में बदलाव का भी ऐलान हुआ तो मार्जिन पर अधिक झटके की आशंका पर घरेलू मार्केट में आईटी स्टॉक्स सहम उठे।

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