LIC IPO को अगर इसी वित्त वर्ष में लॉन्च करेगी सरकार, तो बाजार में आएगी मुश्किल: राकेश सिंह, फिसडम ब्रोकिंग

फिसडम स्टॉक ब्रोकिंग के सीईओ राकेश सिंह कहते हैं कि LIC को लेकर सरकार को जो रुख है, उसे देखते हुए इस बात की संभावना काफी कम है कि एलआईसी के IPO को टाला जाए

अपडेटेड Feb 25, 2022 पर 3:01 PM
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LIC IPO को सरकार ने इसी वित्त वर्ष में लॉन्च करने की बात कही है

यूक्रेन पर रूस के आक्रमण ने शेयर बाजार का सेंटीमेंट बिगाड़ा है। फिसडम स्टॉक ब्रोकिंग (Fisdom Stock Broking) के सीईओ राकेश सिंह कहते हैं, "LIC को लेकर सरकार को जो रुख है और उसने जिस तरह इसी वित्त वर्ष के अंदर इसके आईपीओ को लॉन्च करने की प्रतिबद्धता जताई है, उसे देखते हुए इस बात की संभावना काफी कम है कि एलआईसी के आईपीओ को टाला जाए।"

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर आईपीओ योजना के अनुसार लॉन्च किया जाता है, तो उनका मानना ​​​​है कि उसे बाजार में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एलआईसी, मार्च के दूसरे सप्ताह में अपना आईपीओ लॉन्च कर सकती है।

FII ने पिछले 5 महीनों में 1.8 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की है। बैंकिंग और वेल्थ मैनेजमेंट में दो दशकों का लंबा अनुभव रखने वाले राकेश सिंह ने इस पर कहा कि रूस-यूक्रेन संकट एक उत्प्रेरक बन सकता है और यह विदेशी निवेशकों की बिकवाली की गति को और तेज कर सकता है।


राकेश सिंह के साथ मनीकंट्रोल की बातचीत के संपादित अंश इस प्रकार हैं:

रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया है। क्या आपको लगता है कि पश्चिमी देशों और चुनिंदा एशियाई देशों की तरफ से रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों का कोई असर हो सकता है?

इन प्रतिबंधों का भू-राजनीतिक तनाव पर क्या असर पड़ेगा, इस पर तो कोई कुछ नहीं कह सकता। लेकिन यह जरूर है कि इन प्रतिबंधों का ग्लोबल ट्रेड और उससे जुड़ी अर्थव्यवस्था पर विपरीत असर पड़ेगा। इन प्रतिबंधों के दूरगामी प्रभाव होने की उम्मीद की जा सकती है, जिसका असर भारत के प्रमुख क्षेत्रों तक भी पहुंचेंगे।

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इन भू-राजनीतिक तनावों के बीच, तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रतिबैरल के निशान को पार कर गई हैं। क्या आप इसे जल्द ही 120 डॉलर प्रति बैरल तक जाने की उम्मीद करते हैं और क्या RBI इसके चलते महंगाई और जीडीपी ग्रोथ रेट से जुड़े अपने अनुमानों को संशोधित कर सकता है?

जिस तरह से चीजें चल रही हैं, उसे देखते हुए तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। अगर ईरान के साथ परमाणु समझौता विफल हो जाता है और ओपेक देश उत्पादन बढ़ाने से इनकार करते हैं, तो तेल की किल्लत और बढ़ जाएगी और ग्लोबल स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आएगी।

क्या विधानसभा चुनावों के बाद आप भारत में फ्यूल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी की उम्मीद करते हैं?

सरकार कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का बोझ उपभोक्ताओं पर डालेगी या टैक्स घटाकर कुछ बोझ को वह खुद सहन करेगी, यह सब राजनीति और अर्थव्यस्था दोनों से जुड़ी कई चीजों पर निर्भर करता है। फिलहाल इसे लेकर मेरे पास काफी कम जानकारी है। हालांकि उम्मीद यही की जा रहा है कि सरकार बढ़ोतरी का अधिकतर बोझ खुद उठाएगी और मामूली बोझ उपभोक्ताओं पर डालेगी।

इन भू-राजनीतिक तनावों को देखते हुए क्या आपको लगता है कि फेडरल रिजर्व इस साल अपने मॉनिटरी पॉलिसी में सख्ती लाएगा?

मौजूदा स्थितियों को देखते हुए यह उम्मीद लगाना कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी की योजना को टाल देगा, यह सही नहीं है। यह उम्मीद करना ज्यादा उचित होगा कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी का चक्र फिर से शुरू हो जाएगा, हालांकि इसे पहले के मुकाबले थोड़ी धीमी गति से बढ़ाया जाएगा। उदाहरण के लिए, पहले फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में 0.50 फीसदी की बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही थी। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में सिर्फ 0.25 फीसदी बढ़ोतरी की उम्मीद है।

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कोरोना महामारी ने पिछले दो साल से अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचाया है। क्या आपको लगता है कि अब यूक्रेन-रूस तनाव इस साल ग्लोबल ग्रोथ के लिए एक बड़ी बाधा होगा?

ग्लोबल इकोनॉमी के कई सेगमेंट अभी भी महामारी के असर से उबर नहीं पाए हैं। यूक्रेन-रूस संकट निश्चित रूप से ग्लोबल आर्थिक सुधार के एजेंडे में मदद नहीं कर रहा है। दुनिया भर के बाजारों में इस तनाव का शुरुआती असर पहले ही देखा जा चुका है। ग्लोबल इकोनॉमी के ग्रोथ पर अब आगे कितना असर पड़ेगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका और नाटो सेनाओं का क्या प्रतिक्रिया रहता है और वह किस स्तर का प्रतिबंध लगाते हैं। ग्लोबल ग्रोथ की संभावनाएं पूरी तरह से पटरी से नहीं उतरी हैं, लेकिन रुक-रुक कर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

जब बाजार में करेक्शन होता है या भारी उतार-चढ़ाव आता है, तो लार्जकैप की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों को अधिक नुकसान होता है। अभी भी ऐसा ही हो रहा है। तो, क्या स्मॉलकैप और मिडकैप में निवेश करते समय सतर्क रहना चाहिए और लार्जकैप में बने रहना चाहिए?

कमजोर बिजनेस, वित्तीय सेहत और फंडामेटल वाली कंपनियां रूस-यूक्रेन संकट जैसी बड़ी घटनाओं के प्रति अधिक संवेदनशील होती है। इस तरह की बड़ी घटनाएं निवेशकों को अपने जोखिम कम करने पर मजबूर करती है। इसके चलते कम जोखिम वाले निवेश से पैसा कम गति से निकलता है, लेकिन अधिक जोखिम वाले निवेश से पैसा बहुत अधिक तेजी से निकलता है। इससे आमतौर पर यह धारणा बनती है कि लार्जकैप की तुलना में स्मॉल और मिडकैप अधिक अस्थिर होते हैं।

आने वाले 3-6 महीनों में क्या आप FII के मूड में सुधार होता हुए देखते हैं क्योंकि उन्होंने अक्टूबर 2021 से अब तक 1.7 लाख करोड़ रुपये से अधिक की शुद्ध बिक्री की है?

अर्थव्यवस्था की विपरीत स्थित और भू-राजनीतिक जोखिम होने की स्थिति में विदेशी निवेश जितनी तेजी से आती है, उससे अधिक तेजी से बाहर निकलती है। रूस-यूक्रेन संकट ने एक उत्प्रेरक की भूमिका निभाई है, जिसके चलते विदेशी निवेशकों की तरफ से बिकवाली बढ़ने की उम्मीद की जा सकती है। हालांकि, जैसे-जैसे स्थिति शांत होगी, विदेशी पूंजी के भारतीय बाजारों में वापस आने की उम्मीद की जा सकती है।

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बाजार में आई मौजूदा गिरावट के बाद कौन से सेक्टर्स निवेश के लिए आकर्षक दिख रहे हैं और क्यों?

भारतीय IT सेक्टर एक लंबी अवधि के विस्तार-साइकिल के शुरुआती बिंदु पर है और आने वाले तिमाहियों में इसकी कमाई में मजबूत ग्रोथ की संभावना है। फार्मास्यूटिकल्स एक और सेक्टर है, जहां कई कंपनियां मजूबत फंडामेंटल और ग्रोथ संभावना के साथ हैं। इन दोनों सेक्टर्स को लंबे समय से एक सुरक्षित दांव के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि साथ ही यह मानने के भी पर्याप्त कारण हैं कि ये आने वाले समय में में ग्रोथ कंट्रीब्यूटर के तौर पर इनकी एक बड़ी भूमिका निभाएंगे।

सरकार ने अभी तक LIC IPO के लॉन्च को टाला नहीं है। क्या आपको लगता है कि यूक्रेन-रूस तनाव के चलते बाजार में आई भारी गिरावट आईपीओ में देरी की वजह बन सकती है?

सरकार ने जिस तरह इस वित्त वर्ष के अंदर एलआईसी के आईपीओ को लॉन्च करने की प्रतिबद्धता जताई है, उसे देखते हुए इसके टालने की संभावना काफी कम है। हालांकि अगर आईपीओ को योजना के अनुसार लॉन्च किया जाता है, तो इसे बाजार में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। मुझे विश्वास है कि सरकार आईपीओ के साथ आगे बढ़ने से पहले सभी विकल्पों पर विचार करेगी और सभी जोखिमों पर विचार करेगी। अब तक, आईपीओ को टालने की उम्मीद के अलावा कोई जानकारी नहीं है।

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