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सिगरेट पर GST बढ़कर 40%, फिर भी ITC, गॉडफ्रे फिलिप्स के शेयरों में 4% तक की तेजी, जानें वजह

Cigarettes Stocks: जीएसटी काउंसिल ने सिगरेट, पान मसाला, गुटखा और दूसरे तंबाकू उत्पादों पर जीएसटी दर को 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने का फैसला किया है। हालांकि इस फैसले के बावजूद आज 4 सितंबर को शेयर बाजार में सिगरेट कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली। सुबह 10 बजे के करीब, आईटीसी (ITC), VST इंडस्ट्रीज और गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया के शेयर 1 से 4 प्रतिशत की तेजी के साथ कारोबार कर रहे थे

Vikrant singhअपडेटेड Sep 04, 2025 पर 11:14 AM
सिगरेट पर GST बढ़कर 40%, फिर भी ITC, गॉडफ्रे फिलिप्स के शेयरों में 4% तक की तेजी, जानें वजह
ITC Share: बीते एक साल में ITC के शेयरों में लगभग 16 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है।

Cigarettes Stocks: जीएसटी काउंसिल ने सिगरेट, पान मसाला, गुटखा और दूसरे तंबाकू उत्पादों पर जीएसटी दर को 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने का फैसला किया है। यह फैसला 56वीं जीएसटी काउंसिल बैठक के दौरान लिया गया। वित्त मंत्री ने कहा कि 40 प्रतिशत की यह स्पेशल दर केवल पान मसाला, सिगरेट, गुटखा और तंबाकू से बने उत्पादों जैसे जर्दा, बिना प्रोसेस किए तंबाकू और बीड़ी पर लागू होगी। हालांकि इस फैसले के बावजूद आज 4 सितंबर को शेयर बाजार में सिगरेट कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली। सुबह 10 बजे के करीब, आईटीसी (ITC), वीएसटी इंडस्ट्रीज (VST Industries) और गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया (Godfrey Phillips India) के शेयर 1 से 4 प्रतिशत की तेजी के साथ कारोबार कर रहे थे।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह फैसला तंबाकू कंपनियों के लिए न्यूट्रल या पॉजिटिव साबित हो सकता है। उन्होंने बताया कि तंबाकू उत्पादों पर अभी तक 28 प्रतिशत जीएसटी के साथ-साथ सेस भी लगाया जाता था। इस वजह से इन कंपनियों के लिए टैक्स की कुल प्रभावी दर एमआरपी का लगभग 50-55 प्रतिशत तक पहुंच जाता था। लेकिन अब नई व्यवस्था में 40 प्रतिशत जीएसटी के अलावा कोई सेस नहीं लगेगा।

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने कहा कि अगर इस नए जीएसटी ढांचे के अलावा सरकार कोई अतिरिक्त टैक्स नहीं लगाती है, तो यह तंबाकू इंडस्ट्री के लिए फायदे वाली बात होगी। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि तंबाकू उत्पादों पर लगने वाली नेशनल कैलैमिटी कंटिजेंट ड्यूटी (NCCD) जारी रहेगी या नहीं।

ब्रोकरेज ने कहा कि अगर NCCD मौजूदा दर पर जारी भी रहती है, तो भी कुल टैक्स का बोझ करीब 5 प्रतिशत कम हो जाएगा। ऐसे में तंबाकू कंपनियां अपने उत्पादों के दाम घटाकर अवैध बिक्री करने वाले प्लेयर्स से कॉम्पिटीशन में बढ़त ले सकती हैं।

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