ITC के शेयरों ने दिया HUL से ज्यादा रिटर्न, आगे इस शेयर से कितनी हो सकती है कमाई?

ब्रोकरेज फर्म शेयरखान ने बताया है कि कंज्यूमर्स लो प्राइस यूनिट्स खरीदना पसंद कर रहे हैं। वे गैर-जरूरी खर्च घटा रहे हैं। इसकी वजह बढ़ती महंगाई और रूरल मार्केट में स्लोडाउन है

अपडेटेड Apr 07, 2022 पर 4:24 PM
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शेयरखान ने चौथी तिमाही में हिंदुस्तान यूनिलीवर की सेल्स वॉल्यूम में गिरावट की उम्मीद जताई है। हालांकि, कंपनी ने अपने करीब सभी प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाई हैं।

इस साल आईटीसी (ITC) के शेयरों का प्रदर्श HUL के मुकाबले अच्छा रहा है। 2022 में अब तक आईटीसी का शेयर 20 फीसदी चढ़ा है। इस दौरान HUL का शेयर 8 फीसदी फिसला है। बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) में 1.5 फीसदी मजबूती आई है। बीएसई FMCG Index 1 फीसदी चढ़ा है। आइए जानते हैं HUL के शेयरों के कमजोर प्रदर्शन की क्या वजह है।

प्रदर्शन पर रूरल मार्केट में स्लोडाउन का असर

एनालिस्ट्स का कहना है कि हिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयरों में कमजोरी की मुख्य वजह रूरल मार्केट में स्लोडाउन हो सकता है। इसके चलते सेल्स वॉल्यूम घटा है। फाइनेंशियल ईयर 2021-22 की तीसरी तिमाही से ऐसा देखने को मिला है। इसके अलावा इनपुट कॉस्ट बढ़ने से भी पिछली दो तिमाहियों में मुनाफा कमाने की कंपनी की क्षमता पर असर पड़ा है।


चौथी तिमाही में घट सकती है HUL की सेल्स वॉल्यूम

ब्रोकरेज फर्म शेयरखान ने बताया है कि कंज्यूमर्स लो प्राइस यूनिट्स खरीदना पसंद कर रहे हैं। वे गैर-जरूरी खर्च घटा रहे हैं। इसकी वजह बढ़ती महंगाई और रूरल मार्केट में स्लोडाउन है। शेयरखान ने चौथी तिमाही में हिंदुस्तान यूनिलीवर की सेल्स वॉल्यूम में गिरावट की उम्मीद जताई है। हालांकि, कंपनी ने अपने करीब सभी प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाई हैं। इससे चौथी तिमाही में उसके रेवेन्यू में थोड़ी ग्रोथ दिख सकती है।

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प्रोडक्ट्स की कीमतें 2 से 13% फीसदी तक बढ़ा चुकी है एचयूएल

हिंदुस्तान यूनिलीवर के एग्जिक्यूटिव्स ने पहले संकेत दिए थे कि क्रूड ऑयल और पॉम ऑयल जैसी इनपुट कॉस्ट बढ़ने से चौथी तिमाही में कंपनी के ग्रॉस मार्जिन पर दबाव बढ़ जाएगा। कंपनी ने अपने प्रोडक्ट्स की कीमतें 2 से 13 फीसदी तक बढ़ाई हैं। इससे चौथी तिमाही में इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी के असर से निपटने में मदद मिलेगी।

कमोडिटी की कीमतों में उछाल से घटेगा प्रॉफिट मार्जिन

यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद कमोडिटी की कीमतों में उछाल है। शेयरखान ने कहा है कि इससे अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन में कमी आएगी। उसने इस वित्त वर्ष की पहली छमाही में मार्जिन में तेज गिरावट की आशंका जताई है। अगर कमोडिटी की कीमतों में नरमी आती है तो दूसरी छमाही में हालात में इम्प्रूवमेंट हो सकता है।

आईटीसी के बिजनेस पर स्लोडाउन का कम असर

एनालिस्ट्स का कहना है कि आईटीसी पर रूरल इलाकों में स्लोडाउन का कम असर पड़ा है। इसकी वजह यह है कि इसके पोर्टफोलियो में ज्याादतर फूड्स आइटम्स हैं। कंपनी का कोर बिजनेस इनफ्लेशन के रिस्क से पूरी तरह सुरक्षित है। सिगरेट मार्केट में वॉल्यूम ग्रोथ फिर से बेहतर होने से आईटीसी वित्त वर्ष 2022-23 में अपने प्रॉफिट से चौंका सकती है।

सिगरेट की सेल्स वॉल्यूम बढ़ने से आईटीसी को फायदा

आईटीसी देश की सबसे बड़ी कंज्यूमर कंपनियों में से एक है। इसके बिजनेस में सिगरेट, होटल्स, पेपर और एग्री कमोडिटीज तक शामिल हैं। इसके ब्रांडेड फूड डिविजन का परफॉर्मेंस बहुत अच्छा है। स्टेपल्स, कनफेक्शनरी, नूडल्स, स्नैक्स और बिस्कुट इसमें शामिल हैं। एडलवाइज वेल्थ रिसर्च ने कहा है, "फाइनेंशियल ईयर 2021-22 से 2023-24 के दौरान इसके सिगरेट के वॉल्यूम की सीएजीआर 5 फीसदी रहेगी।"

आईटीसी का शेयर 80 फीसदी प्रॉफिट दे सकता है

एडलवाइज ने आईटीसी के शेयर के लिए 450 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। यह शेयर के करेंट मार्केट प्राइस से करीब 80 फीसदी ज्यादा है। गुरुवार को ITC का शेयर 1.1 फीसदी की तेजी के साथ 256.70 रुपये पर बंद हुआ। एचयूएल का शेयर 1.3 फीसदी चढ़कर 2,170 रुपये पर बंद हुआ।

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