अमेरिकी ट्रेडिंग फर्म 'जेन स्ट्रीट ग्रुप एलएलसी (Jane Street Group LLC)' ने भारतीय शेयर बाजार में हेरफेर के आरोपों के खिलाफ अपना बचाव तैयार करने के लिए सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) से 6 हफ्तों का समय मांगा है। हालांकि उसे इससे कम समय मिल सकता है। इस मामले से वाकिफ एक सूत्र ने मनीकंट्रोल को यह जानकारी दी।
सूत्र ने बताया कि SEBI ने इस मामले में जेन स्ट्रीट को लगभग चार और हफ्तों का समय देने पर विचार कर रहा है। नियामक ने पहले ही कंपनी को जांच के शुरुआती नतीजों पर अपना पक्ष रखने के लिए 21 दिन का समय दिया था, जिसकी समयसीमा पिछले सप्ताह समाप्त हो चुकी है।
उस व्यक्ति ने बताया कि स्थिति अभी भी अस्थिर है और SEBI के बोर्ड मेंबर अनंत नारायण अभी भी कंपनी को और समय देने का फैसला कर सकते हैं। जेन स्ट्रीट ने इस खबर पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं SEBI की ओर से भी इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।
Jane Street ने सोमवार को एक बयान में कहा कि वह SEBI के साथ "पॉजिटिव तरीके से" बातचीत कर रही है और उसने 3 जुलाई के अंतरिम आदेश पर जवाब देने के लिए अधिक समय मांगा है। इससे पहले SEBI ने पिछले सप्ताह जेन स्ट्रीट पर लगाए गए अस्थायी ट्रेडिंग प्रतिबंध को हटा दिया था। इससे बदले में जेन स्ट्रीट ने भारतीय शेयर बाजार से कथित तौर पर अवैध रूप से कमाए 4,840 करोड़ रुपये एक एस्क्रो अकाउंट में जमा कराए।
भारतीय शेयर बाजार में बड़ा असर
जेन स्ट्रीट पर भारतीय शेयर बाजार के इक्विटी डेरिवेटिव्स मार्केट में हेरफेर करने और अवैध तरीके से करीब 4,840 करोड़ रुपये कमाने का आरोप है। भारत का इक्विटी डेरिवेटिव्स मार्केट, कॉन्ट्रैक्ट्स के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है। हाल के सालों में भारत के तेजी से बढ़ते इक्विटी ऑप्शंस मार्केट में कई ग्लोबल हाई-स्पीड ट्रेडिंग फर्में आई हैं। ऐसे में जेन स्ट्रीट मामले का असर इन ग्लोबल ट्रेडिंग फर्मों पर भी देखने को मिल सकता है।
Jane Street ने इस महीने की शुरुआत में अपने कर्मचारियों को बताया था कि SEBI ने भारत में उसकी ट्रेडिंग गतिविधियों के बारे में "कई गलत या बिना आधार वाले आरोप" लगाए हैं। कंपनी ने कहा कि वह इन आरोपों का बचाव करेगी। इन आरोपों में यह भी शामिल है कि उसने कैश और फ्यूचर्स सेगमेंट में कम लिक्विडिटी का फायदा उठाकर कीमतों में हेरफेर किया।
ब्लूमबर्ग न्यूज ने मंगलवार को बताया कि कंपनी यह दलील दे सकती है कि उसने जो ट्रेड्स किए थे, वे रिटेल निवेशकों की भारी मांग के जवाब में किए गए थे।
जेन स्ट्रीट का जवाब आने के बाद, SEBI के बोर्ड मेंबर अनंत नारायण उसके दलीलों की समीक्षा करेंगे। इसके बाद संभव है कि SEBI एक नया निर्देश जारी करे, जिसमें शुरुआती नतीजों की पुष्टि की जाए और जांच पूरी करने की समयसीमा तय की जाए। अनंत नारायण ने ही अंतरिम आदेशों पर भी हस्ताक्षर किए थे।
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