शेयर बाजार में इस समय कंसॉलिडेशेन की स्थिति लग रही है। इसके साथ ही मनी मैनेजर्स ने अपने पोर्टफोलियो में फेरबदल करना शुरू कर दिया है। जेफरीज (Jefferies) ने कुछ दिनों पहले अपने इंडिया मॉडल पोर्टफोलियो से जोमैटो (Zomato) को बाहर कर मेटल को जगह दी थी। अब इसके ग्लोबल इक्विटी स्ट्रैटजी हेड, क्रिस वुड (Chris Wood) ने भी कुछ बदलाव किए हैं। क्रिस वुड ने लंबी अवधि इक्विटी पोर्टफोलियो में आरईसी लिमिटेड (REC Ltd) को शामिल किया है, जिसे पहले रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन के नाम से जाना जाता था। क्रिस वुड के पोर्टफोलियो में REC Ltd का वेटेज करीब 4 फीसदी है।
क्रिस वुड ने एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank), बजाज फाइनेंस (Bajaj Finance), आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस (ICICI Prudential Life Insurance) और आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस (ICICI Lombard General Insurance) में निवेश को एक-एक प्रतिशत हिस्सेदारी घटाकर ऐसा किया है।
ऊपर बताए शेयरों के अलावा उनके इंडिया लॉन्ग-ओनली पोर्टफोलियो में आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank), एसबीआई (SBI), सीएएमएस (CAMS), रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries), ओएनजीसी (ONGC), गोदरेज प्रॉपर्टीज (Godrej Properties), सेंचुरी टेक्सटाइल्स (Century Textiles), डीएलएफ (DLF), मैक्रोटेक डेवलपर्स (Macrotech Developers), मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki), एलएंडटी (L&T), अदानी पोर्ट्स (Adani Ports) और कॉनकोर (Concor) हैं।
इसके अलावा, वुड्स ने एशिया एक्स-जापान लॉन्ग-ओनली पोर्टफोलियो में बजाज फाइनेंस के एक्सपोजर में भी कटौती की। इस कदम के साथ, भारतीय इक्विटी में उनका कुल आवंटन 37 प्रतिशत से घटकर 36 प्रतिशत हो गया। भारत का हिस्सा अभी भी उनके पोर्टफोलियो में सबसे अधिक बना हुआ है।
बजाज फाइनेंस (Bajaj Finance) हाल ही में बिकवाली के दबाव में रहा है। अन्य एनालिस्ट्स ने भी इस शेयर के लिए अपना नजरिया कम किया है।
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना हेतु दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।