Stocks to Buy: ब्रोकरेज फर्म Jefferies ने तीन भारतीय कंपनियों के शेयरों पर खरीदारी की सलाह दी है। इनमें Ambuja Cements, Max Financial Services और AU Small Finance Bank शामिल हैं। ब्रोकरेज के मुताबिक इन स्टॉक्स में आगे अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है। जानिए इन स्टॉक्स पर ब्रोकरेज फर्म किन वजहों से बुलिश है और इनमें कितना रिटर्न मिल सकता है।
ब्रोकरेज फर्म Jefferies ने AU Small Finance Bank पर भी ‘Buy’ रेटिंग दी है और 1,220 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है। यह मौजूदा स्तर से करीब 26.5 प्रतिशत संभावित तेजी दिखाता है।
ब्रोकरेज के मुताबिक रिजर्व बैंक से मिली नियामकीय राहत के बाद बैंक को अपनी कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर में बदलाव की जरूरत नहीं होगी। इससे बैंक आने वाले समय में यूनिवर्सल बैंक बनने की दिशा में ज्यादा ध्यान दे सकेगा।
Jefferies का मानना है कि यूनिवर्सल बैंक बनने के बाद बैंक को सस्ते डिपॉजिट मिल सकते हैं। विदेशी मुद्रा सेवाओं और क्रेडिट कार्ड जैसे कारोबार से आय बढ़ सकती है। अगले 3 से 5 वर्षों में इन बदलावों से मुनाफे में अच्छी बढ़त देखने को मिल सकती है।
Jefferies ने Max Financial Services पर ‘Buy’ रेटिंग देते हुए 2,240 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है। यह मौजूदा स्तर से करीब 31.2 प्रतिशत संभावित तेजी का संकेत देता है।
कंपनी ने 12 मार्च को बोर्ड बैठक बुलाई है, जिसमें पूंजी जुटाने पर चर्चा होगी। ब्रोकरेज का मानना है कि यह रकम मुख्य बीमा कारोबार में डाली जा सकती है, जिससे कंपनी की वित्तीय स्थिति और मजबूत होगी।
अगर कंपनी करीब 500 करोड़ रुपये जुटाती है, तो उसके लाइफ इंश्योरेंस कारोबार का सॉल्वेंसी रेशियो बेहतर हो सकता है। Jefferies के अनुसार मजबूत ग्रोथ और मुनाफे के कारण यह 2026 के लिए उनकी पसंदीदा कंपनियों में शामिल है।
Jefferies ने अदाणी ग्रुप Ambuja Cements पर ‘Buy’ रेटिंग दी है। साथ ही, 735 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है। यह मौजूदा स्तर से करीब 53 प्रतिशत संभावित तेजी दिखाता है।
ब्रोकरेज के मुताबिक कंपनी अब तेजी से क्षमता बढ़ाने की बजाय अपने मौजूदा प्लांट्स की दक्षता सुधारने पर ध्यान दे रही है। हाल के अधिग्रहणों के बाद कंपनी नई परिसंपत्तियों को स्थिर करने और प्रति टन सीमेंट मुनाफा बढ़ाने पर फोकस कर रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी जल्द ही 80-85 प्रतिशत क्षमता उपयोग तक पहुंचने का लक्ष्य रखती है। साथ ही लागत घटाने की दिशा में भी काम हो रहा है। क्लिंकर उत्पादन लागत पहले ही 2,000 रुपये प्रति टन से नीचे आ चुकी है। कंपनी इसे आगे 1,500 रुपये प्रति टन तक लाने की कोशिश कर रही है।
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