जियो प्लेटफॉर्म्स का मार्केट कैप बढ़कर 13 लाख करोड़ रुपये के पार चला गया है। शेयर लिस्टिंग प्राइस से 4 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ गया है। बुधवार को लिस्टिंग डे पर शेयर BSE पर 1417.35 रुपये और NSE पर 1417.50 रुपये पर बंद हुआ। कंपनी देश की सेकेंड मोस्ट वैल्यूएबल कंपनी बन चुकी है। वहीं मोस्ट वैल्यूएबल टेलिकॉम कंपनी का तमगा भी अपने नाम कर चुकी है। इससे पहले यह पोजिशन भारती एयरटेल की थी। जियो के शेयर की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को 21.36 प्रतिशत के शानदार प्रीमियम के साथ हुई। BSE और NSE दोनों पर शेयर ने 1,358 रुपये पर शुरुआत की। IPO प्राइस 1119 रुपये प्रति शेयर था।
दिन में शेयर BSE पर 1,423.80 रुपये और NSE पर 1,423.90 रुपये के हाई तक गया। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। जियो प्लेटफॉर्म्स का 30,213 करोड़ रुपये का IPO देश में अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू रहा। यह 22.19 गुना सब्सक्रिप्शन के साथ बंद हुआ था। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 70.55 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 14 गुना, रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 2.72 गुना, एंप्लॉयीज के लिए रिजर्व हिस्सा 2.93 गुना और शेयरहोल्डर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 7.60 गुना भरा था।
बोनान्जा के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि जियो की मजबूत लिस्टिंग के पीछे निवेशकों की ओर से भारी मांग, शेयरों की सीमित उपलब्धता, कंपनी की मुनाफे की क्षमता और कैश फ्लो जैसे फैक्टर रहे हैं। इश्यू के बाद जियो के कुल शेयरों में से केवल 2.9 प्रतिशत शेयर ही ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हैं। शेयरों की इस सीमित उपलब्धता और निवेशकों की मजबूत मांग के कारण स्टॉक को सपोर्ट मिल रहा है।
'जियो में आगे और मुनाफा देने की क्षमता'
तिवारी का कहना है कि जियो को केवल शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग के मौके के बजाय लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। IPO के लिए संस्थागत निवेशकों की मजबूत मांग यह दर्शाती है कि उन्हें कंपनी के भविष्य के रेवेन्यू, मुनाफे और कैश फ्लो में अच्छी ग्रोथ की उम्मीद है। जियो में आगे और मुनाफा देने की क्षमता नजर आती है। तिवारी के मुताबिक, जियो के वित्तीय प्रदर्शन ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।
वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का EBITDA मार्जिन 50 प्रतिशत रहा। रेवेन्यू 14.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1.47 लाख करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 15.1 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ 30,000 करोड़ रुपये रहा। EBITDA 18.8 प्रतिशत बढ़कर 76,255 करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2024 से वित्त वर्ष 2026 के बीच रेवेन्यू और EBITDA में लगभग 16-16 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस दौरान कंपनी का शुद्ध मुनाफा 18 प्रतिशत बढ़ा।
जियो के लिए प्रमुख ग्रोथ ड्राइवर
जियो प्लेटफॉर्म्स की ग्रोथ के लिए प्रमुख ड्राइवर्स में तिवारी ने एवरेज रेवेन्यू प्रति यूजर (ARPU) में सुधार की गुंजाइश, जियोएयरफाइबर का विस्तार, 5G सेवाओं से अधिक कमाई और कम पूंजीगत व्यय को शामिल किया है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही यानि कि अप्रैल-जून 2026 में जियो का ARPU 215.6 रुपये रहा, जो इसके सबसे करीबी प्रतिस्पर्धी के मुकाबले लगभग 48 रुपये कम है। तिवारी के मुताबिक, टैरिफ में बढ़ोतरी, ग्राहकों का महंगे प्लान की ओर जाना और सर्विस बंडलिंग (कई सेवाओं को एक साथ जोड़कर बेचना) से ARPU बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
जियो का पूंजीगत व्यय वित्त वर्ष 2024 में रेवेन्यू का लगभग 49 प्रतिशत था। वित्त वर्ष 2026 में यह घटकर 23 प्रतिशत रह गया। तिवारी ने कहा कि कम खर्च और अधिक रेवेन्यू से फ्री कैश फ्लो में सुधार हो सकता है। ग्रोथ के अन्य ड्राइवर्स में महंगे प्लांस की ओर ग्राहकों का शिफ्ट, कर्ज चुकाने के बाद ब्याज लागत में कमी, और जियो की अपनी 5G व UBR (अनलाइसेंस्ड बैंड रेडियो) तकनीक के लिए अंतरराष्ट्रीय लाइसेंसिंग सौदे शामिल हैं।
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