अमेरिकी मल्टीनेशनल बैंक JP मॉर्गन चेज ने कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI के साथ FPI नियमों के कथित उल्लंघन से जुड़ा एक मामला सुलझा लिया है। इसके लिए बैंक ने सेटलमेंट चार्जेस के तौर पर 34.42 लाख रुपये का भुगतान किया। सेबी का कहना है कि बैंक ने खुद से (suo-motu) SEBI के पास सेटलमेंट के लिए आवेदन दायर किया था। इस आवेदन में बैंक ने प्रस्ताव दिया था कि वह तथ्यों और कानूनी निष्कर्षों को न तो स्वीकार करेगा और न ही उनका खंडन करेगा, और इस आधार पर मामले को सुलझाना चाहता है।
SEBI के अनुसार, JP Morgan Chase ने UK की 4 FPIs (विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों) को 'कैटेगरी II' का लाइसेंस दिया था। ये FPIs 'फाइनेंशियल कंडक्ट अथॉरिटी' (FCA) के साथ रजिस्टर नहीं थे, जो कि बाजार के मानदंडों का उल्लंघन है। इसके अलावा, SEBI ने यह भी पाया कि FPI रेगुलेशंस, 2019 लागू होने के बाद इन चारों एंटिटीज के रेगुलेटरी स्टेटस की जांच किए बिना ही उन्हें 'कैटेगरी I FPIs के रूप में रीकैटेगराइज कर दिया गया था। इसके अलावा बैंक एक FPI एंटिटी के विलय से जुड़े एक महत्वपूर्ण बदलाव पर तुरंत कार्रवाई करने में विफल रहा।
सूचित किए जाने के बावजूद JP Morgan Chase ने नहीं उठाया कदम
आदेश के अनुसार, 1 नवंबर 2024 को सूचित किए जाने के बावजूद JP Morgan Chase ने नए रजिस्ट्रेशन की सलाह देने में देरी की और 38 दिनों तक लेनदेन जारी रहने दिया। इस दौरान इन FPI ने 64 परचेज ट्रांजेक्शन किए। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कहा कि यह देरी, FPIs की पात्रता के रीअसेसमेंट और उनमें होने वाले महत्वपूर्ण बदलावों को संभालने से संबंधित प्रावधानों का पालन न करने के बराबर थी। इसके बाद SEBI की उच्चाधिकार प्राप्त सलाहकार समिति और होल टाइम मेंबर्स के एक पैनल ने सेटलमेंट की शर्तों को मंजूरी दे दी। इसके बाद बैंक ने 34.42 लाख रुपये की राशि जमा कर दी।
Sebi के होलटाइम मेंबर कमलेश सी. वार्ष्णेय और अमरजीत सिंह ने अपने आदेश में कहा, "...सेटलमेंट रेगुलेशंस के प्रावधानों के तहत यह आदेश दिया जाता है कि इन उल्लंघनों के संबंध में आवेदक (JP Morgan Chase Bank N.A.) के खिलाफ शुरू की जा सकने वाली किसी भी कार्यवाही को अब समाप्त (settled) माना जाएगा।"