HSBC के बाद अब जेपी मॉर्गन ने भी भारतीय इक्विटीज की रेटिंग घटा दी है। इसे "ओवरवेट" से कम करके "न्यूट्रल" कर दिया है। इसके पीछे अन्य उभरते बाजारों के मुकाबले भारतीय इक्विटीज की ज्यादा वैल्यूएशन और अमेरिका-ईरान युद्ध से जुड़े ऊर्जा आपूर्ति संकट के कारण कमाई पर पड़ रहे दबाव का हवाला दिया गया है। रॉयटर्स के मुताबिक, ब्रोकरेज फर्म ने एक नोट में कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत में महंगाई और आर्थिक विकास के जोखिमों को बढ़ा सकती हैं, खपत को कम कर सकती हैं और निकट भविष्य में कंपनियों के मार्जिन पर दबाव डाल सकती हैं। वहीं कमजोर होता रुपया इस दबाव को और बढ़ा रहा है।
इसके अलावा J.P.Morgan ने बेंचमार्क Nifty 50 के लिए ईयर एंड टारगेट को 10% घटाकर 27,000 कर दिया है। इस साल निफ्टी अब तक 8.5% और सेंसेक्स 10% गिरा है। अप्रैल की शुरुआत में J.P.Morgan ने एनर्जी, कंज्यूमर, ऑटो और वित्तीय सेवा जैसे घरेलू क्षेत्रों में वित्त वर्ष 2027 के लिए कमाई के अनुमानों में 2% से 10% तक की कटौती की थी। MSCI India की कमाई में वृद्धि के पूर्वानुमानों को भी 2026 के लिए 2 प्रतिशत घटाकर 11% और 2027 के लिए 1 प्रतिशत कम करके 13% कर दिया था।
कोरिया, ब्राजील, चीन, मेक्सिको में सस्ते में निवेश का मौका
J.P.Morgan ने कहा, "हाल की गिरावट के बावजूद भारत अभी भी कोरिया, ब्राजील, चीन, मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका जैसे अपने समकक्षों की तुलना में काफी ऊंचे प्रीमियम पर कारोबार कर रहा है। इन देशों में कम कीमत पर निवेश का मौका मिल रहा है, जबकि वहां भविष्य में कमाई भारत के बराबर ही या उससे बेहतर रहने की उम्मीद है।" ब्रोकरेज ने आगे कहा कि भारत की अभी AI (आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस), डेटा सेंटर, रोबोटिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे उच्च-विकास वाले सेक्टर्स में मौजूदगी अच्छी नहीं है। इसकी वजह से इन सेक्टर्स में मजबूत पकड़ रखने वाले समकक्ष उभरते बाजारों की तुलना में भारत की कमाई में वृद्धि सीमित हो सकती है।
इस कारण से भी इक्विटी मार्केट में होने वाले लाभ हो रहा सीमित
जेपी मॉर्गन ने यह भी कहा कि घरेलू निवेशकों से आ रहे अच्छे निवेश ने विदेशी निवेशकों की बिकवाली के असर को कुछ हद तक कम किया है। लेकिन बड़े शेयरधारकों द्वारा अपनी हिस्सेदारी बेचना और IPO व QIP (क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट) के माध्यम से रिकॉर्ड संख्या में नए शेयर जारी करना, इक्विटी मार्केट में होने वाले लाभ को सीमित कर रहा है। ब्रोकरेज ने कहा कि भले ही देश के आर्थिक विकास की लॉन्ग टर्म की कहानी अभी भी बरकरार है, लेकिन निकट भविष्य के लिए इसका आउटलुक कमजोर हुआ है। आउटलुक फाइनेंशियल्स, मैटीरियल्स, कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी, हॉस्पिटल, डिफेंस और पावर जैसे सेक्टर्स पर "ओवरवेट" बना हुआ है। वहीं IT और फार्मास्यूटिकल्स पर "अंडरवेट" है।
HSBC ने अब क्या कर दी रेटिंग
हाल ही में HSBC ने इंडियन इक्विटीज की रेटिंग को "न्यूट्रल" से घटाकर "अंडरवेट" कर दिया। ब्रोकरेज ने एक महीने से भी कम समय में दूसरी बार रेटिंग घटाई है। रॉयटर्स के मुताबिक, HSBC को लगता है कि मध्य पूर्व में अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण एनर्जी की तेजी से बढ़ती कीमतें भारत की कमाई में सुधार की स्थिरता के लिए खतरा बन सकती हैं। कच्चा तेल अभी 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर ट्रेड कर रहा है। इससे भारत के लिए महंगाई और विकास के जोखिम बढ़ गए हैं। मौजूदा मैक्रो माहौल में भारत अब उत्तर-पूर्वी एशियाई देशों की तुलना में कम आकर्षक लग रहा है।
Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।